यमन के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में हूती विद्रोहियों और सरकारी सेना के बीच भीषण संघर्ष छिड़ गया है। हूती लड़ाके ताज़ से अल-मखा को जोड़ने वाले रणनीतिक मार्ग को काटने की कोशिश कर रहे हैं।
- हूती विद्रोहियों ने ताज़ प्रांत के पश्चिम में सरकारी सेना के खिलाफ बड़ा हमला किया।
- रणनीतिक लक्ष्य ताज़ को अल-मखा (मोचा) बंदरगाह से जोड़ने वाले सड़क मार्ग को काटना है।
- हूती लड़ाकों ने ताज़ और होदेदा प्रांतों में बैलिस्टिक मिसाइलों और ड्रोन का उपयोग किया।
- लाल सागर के समुद्री मार्ग पर नियंत्रण पाने की हो रही है होती की कोशिश।
यमन के दक्षिण-पश्चिम क्षेत्र में संघर्ष की स्थिति अत्यंत गंभीर हो गई है। ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों ने ताज़ प्रांत के पश्चिमी मोर्चों पर एक व्यापक हमला शुरू किया है, जिससे यमन में पूर्ण पैमाने पर युद्ध की वापसी की आशंका बढ़ गई है। हूती लड़ाकों ने गुरुवार को ताज़ को अल-मखा (Mocha) से जोड़ने वाली महत्वपूर्ण सड़क को काटने और शहर को तट से अलग करने के लिए तेजी से आगे बढ़ने का प्रयास किया।
अल जज़ीरा के संवाददाता युसूफ मावरी के अनुसार, यदि हूती अल-मखा बंदरगाह शहर पर नियंत्रण कर लेते हैं, तो यह सरकारी सेना के लिए एक महत्वपूर्ण रसद मार्ग को काट देगा। इसके साथ ही, हूती विद्रोहियों को लाल सागर में एक मजबूत आधार मिल जाएगा, जो वैश्विक तेल निर्यात और समुद्री व्यापार के लिए एक अत्यंत महत्वपूर्ण मार्ग है। हालांकि, यमन सरकार के अधिकारियों ने दावा किया है कि उन्होंने कुछ क्षेत्रों पर फिर से नियंत्रण हासिल कर लिया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह हमला केवल क्षेत्रीय नियंत्रण के लिए नहीं है, बल्कि वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए भी एक बड़ा खतरा है। लाल सागर पर नियंत्रण का अर्थ है वैश्विक व्यापार मार्गों पर दबाव बनाना। यदि हूती इस क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करते हैं, तो अंतरराष्ट्रीय शिपिंग और तेल की कीमतों पर इसका गहरा असर पड़ सकता है।
हूती विद्रोहियों द्वारा सरकारी क्षेत्रों में घुसपैठ करना इस बात का संकेत है कि युद्धविराम की तमाम कोशिशें विफल हो रही हैं।
यमन के सेना मीडिया केंद्र ने बताया कि हूती लड़ाकों ने ताज़ और होदेदा के घनी आबादी वाले जिलों में 14 बैलिस्टिक मिसाइलें और ड्रोन दाग दिए हैं। माकबाना पहाड़ों में भीषण लड़ाई के दौरान 18 से अधिक हूती लड़ाके मारे गए, जबकि सरकारी सूत्रों के अनुसार 13 सैनिकों ने अपनी जान गंवाई।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
यमन का संकट 2014 में शुरू हुआ जब हूतियों ने राजधानी सना पर कब्जा कर लिया। इसके बाद सऊदी नेतृत्व वाले सैन्य हस्तक्षेप ने संघर्ष को वर्षों तक लंबा खींच दिया। 2022 में एक युद्धविराम हुआ था, लेकिन 2023 में गाजा युद्ध और क्षेत्रीय तनाव बढ़ने के साथ शांति प्रक्रिया ठप हो गई है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: हूती विद्रोहियों का मुख्य लक्ष्य क्या है?
उत्तर: उनका मुख्य लक्ष्य ताज़ को अल-मखा बंदरगाह से जोड़ने वाले मार्ग को काटकर सरकारी आपूर्ति श्रृंखला को तोड़ना और लाल सागर पर नियंत्रण पाना है।
प्रश्न 2: इस संघर्ष का वैश्विक प्रभाव क्या हो सकता है?
उत्तर: लाल सागर में अस्थिरता से वैश्विक तेल व्यापार और अंतरराष्ट्रीय शिपिंग लागत में वृद्धि हो सकती है।