नेपाल में भोटे कोशी नदी में आई भीषण अचानक बाढ़ के बाद, कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर मौजूद सभी भारतीय नागरिकों को चीन से सुरक्षित निकाल लिया गया है। विदेश मंत्रालय के अनुसार, अब भी 275 भारतीय लापता हैं जबकि 169 को बचा लिया गया है।

  • नेपाल में भोटे कोशी नदी में आई बाढ़ के कारण कैलाश यात्रा बाधित हुई।
  • विदेश मंत्रालय के अनुसार 275 भारतीय नागरिक अभी भी लापता हैं।
  • अब तक 169 भारतीय नागरिकों को सुरक्षित बचा लिया गया है।
  • चीन की सीमा से सभी भारतीय तीर्थयात्रियों को वापस भेज दिया गया है।

नई दिल्ली: नेपाल में आई विनाशकारी अचानक बाढ़ (Flash Floods) के बाद, विदेश मंत्रालय (MEA) ने पुष्टि की है कि कैलाश मानसरोवर यात्रा मार्ग पर मौजूद सभी भारतीय नागरिक अब चीनी क्षेत्र से बाहर निकल चुके हैं। 26 अगस्त को भोटे कोशी नदी में आई भीषण बाढ़ ने इस पवित्र यात्रा मार्ग को बुरी तरह प्रभावित किया था, जिसके बाद सुरक्षा कारणों से तीर्थयात्रियों को वापस लाने की प्रक्रिया शुरू की गई।

विदेश मंत्रालय के आधिकारिक प्रवक्ता रंधिर जायसवाल ने शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण अपडेट देते हुए बताया कि इस आपदा में अब तक 275 भारतीय नागरिक लापता हैं। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि बचाव कार्य अभी भी जारी है, इसलिए लापता लोगों की संख्या में बदलाव हो सकता है क्योंकि आपदा प्रभावित क्षेत्र के विभिन्न हिस्सों से अभी भी जीवित बचे लोगों के मिलने की संभावना है। अब तक 169 भारतीयों को सफलतापूर्वक सुरक्षित निकाल लिया गया है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि हिमालयी क्षेत्र में जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़ती प्राकृतिक आपदाएं अब धार्मिक पर्यटन और अंतरराष्ट्रीय यात्राओं के लिए एक गंभीर खतरा बन गई हैं। नेपाल और तिब्बत के सीमावर्ती क्षेत्रों में अचानक आने वाली बाढ़ न केवल जानमाल का नुकसान करती है, बल्कि महत्वपूर्ण तीर्थ मार्गों और द्विपक्षीय यात्रा प्रोटोकॉल को भी अस्थिर कर देती है।

हिमालयी पारिस्थितिकी तंत्र में अचानक आने वाली बाढ़ की बढ़ती आवृत्ति अंतरराष्ट्रीय तीर्थयात्रियों की सुरक्षा के लिए एक गंभीर चुनौती पेश कर रही है।

वर्ष 2026 की कैलाश मानसरोवर यात्रा की घोषणा 30 अप्रैल को की गई थी, जो जून से अगस्त के बीच आयोजित होने वाली थी। सरकार द्वारा सहायता प्राप्त इस यात्रा में 10 बैच शामिल थे, जिनमें से प्रत्येक में 50 यात्री लिपुलेख दर्रे और नाथू ला दर्रे के माध्यम से यात्रा कर रहे थे। हालांकि, जिन यात्रियों ने निजी ट्रैवल एजेंसियों के माध्यम से चीन के ग्यिरोंग सीमा पार मार्ग को चुना था, वे इस आपदा की चपेट में सबसे अधिक आए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

कैलाश मानसरोवर यात्रा सदियों से हिंदुओं, बौद्धों, जैनों और बॉनों के लिए एक अत्यंत पवित्र तीर्थ रही है। ऐतिहासिक रूप से, यह यात्रा कठिन भौगोलिक परिस्थितियों और मौसम की अनिश्चितताओं से भरी रही है। हाल के वर्षों में, जलवायु परिवर्तन के कारण ग्लेशियरों के पिघलने और अचानक आने वाली बाढ़ (GLOFs) की घटनाओं में वृद्धि देखी गई है, जिससे इस मार्ग पर यात्रा करना और भी जोखिम भरा हो गया है।

Did You Know?: भोटे कोशी नदी हिमालय के सबसे तेज बहने वाले जलमार्गों में से एक है, जो अपनी तीव्र ढलान और अचानक आने वाली बाढ़ के लिए जानी जाती है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: वर्तमान में कितने भारतीय लापता हैं?
उत्तर: विदेश मंत्रालय के अनुसार, वर्तमान में 275 भारतीय नागरिक लापता हैं।

प्रश्न 2: तीर्थयात्री किस मार्ग से यात्रा कर रहे थे?
उत्तर: तीर्थयात्री मुख्य रूप से लिपुलेख और नाथू ला दर्रे के साथ-साथ निजी एजेंसियों के माध्यम से ग्यिरोंग सीमा मार्ग का उपयोग कर रहे थे।