इजरायली सेना द्वारा खिरबेट अल-तब्बन में 12 घरों को ध्वस्त किए जाने के बाद, स्थानीय ग्रामीणों ने अपनी जमीन छोड़ने से इनकार कर दिया है और फिर से बसने का संकल्प लिया है।
- इजरायली सेना ने वेस्ट बैंक के खिरबेट अल-तब्बन में 12 घरों और सामुदायिक संरचनाओं को ध्वस्त कर दिया।
- इस कार्रवाई से लगभग 70 लोग बेघर हो गए हैं, जिनमें बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं।
- ग्रामीणों ने इजरायली आदेशों के बावजूद अपनी भूमि पर डटे रहने और पुनर्निर्माण करने की शपथ ली है।
वेस्ट बैंक के दक्षिणी मसाफर यट्टा क्षेत्र में स्थित छोटे से गाँव खिरबेट अल-तब्बन में बुधवार को भारी तबाही देखी गई। इजरायली सुरक्षा बलों ने बिना किसी पूर्व सूचना के गाँव में प्रवेश किया और वहां के सभी 12 घरों सहित अधिकांश सामुदायिक संरचनाओं को मलबे में तब्दील कर दिया। इस अचानक हुई कार्रवाई ने लगभग 70 निवासियों को खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर कर दिया है।
मसाफर यट्टा परिषद के प्रमुख, निदल यूनिस ने इस घटना को "गाँव को धरती के नक्शे से मिटाने" जैसा बताया। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इस विनाशकारी कार्रवाई के बावजूद निवासी अपनी जमीन छोड़ने को तैयार नहीं हैं। यूनिस के अनुसार, ग्रामीणों के पास इस भूमि के अलावा कोई विकल्प नहीं है और वे अपनी जड़ों से जुड़े रहने का निर्णय ले चुके हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि वेस्ट बैंक के 'एरिया सी' (Area C) में घर तोड़ना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि एक गहरा भू-राजनीतिक मुद्दा है। इजरायल इन निर्माणों को 'अवैध' बताता है, लेकिन फिलिस्तीनियों के लिए इस क्षेत्र में निर्माण की अनुमति प्राप्त करना लगभग असंभव है। यह स्थिति क्षेत्र में विस्थापन और जनसांख्यिकीय परिवर्तन की एक निरंतर चलने वाली प्रक्रिया का हिस्सा प्रतीत होती है।
"यह निर्णय कि हम यहीं रहेंगे और डटे रहेंगे, लोगों का अपना निर्णय है। वे इस भूमि के अलावा कोई विकल्प नहीं देखते।" - निदल यूनिस
ग्रामीणों के सामने अब बुनियादी सुविधाओं का भारी संकट खड़ा हो गया है। पानी के स्रोत और स्वच्छता सुविधाएं नष्ट कर दी गई हैं। यूनिस ने चेतावनी दी है कि आने वाले महीनों में तेज हवाओं और ठंड के बीच टेंटों में रहना बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों के लिए बेहद चुनौतीपूर्ण होगा।
एक अन्य निवासी, नसर महमूद ओबेद, जो 1999 के बड़े विध्वंस के गवाह रहे हैं, ने कहा कि उन्होंने मलबे को साफ करना और अस्थायी आश्रय बनाना शुरू कर दिया है। उनका कहना है, "यह हमारी जमीन है, और हम यहाँ फिर से निर्माण करेंगे। हमने उम्मीद नहीं खोई है।"
32 वर्षों से यहाँ रह रही सुआद मोहम्मद ओबेद ने अपने जीवन के संघर्ष को साझा करते हुए बताया कि कैसे उनका घर और उनकी आजीविका (पशुपालन और डेयरी) पूरी तरह नष्ट हो गई। उन्होंने बताया कि बच्चों के लिए खुले में सोना कितना डरावना है, खासकर सेटलर हमलों के डर के बीच।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: खिरबेट अल-तब्बन में क्या हुआ?
उत्तर: इजरायली सेना ने खिरबेट अल-तब्बन गाँव के 12 घरों को ध्वस्त कर दिया, जिससे 70 लोग बेघर हो गए।
प्रश्न 2: इजरायल इन घरों को क्यों तोड़ रहा है?
उत्तर: इजरायल का दावा है कि ये निर्माण अवैध हैं, जबकि स्थानीय लोग इसे विस्थापन की एक योजना मानते हैं।