भारत ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में दुनिया के नक्शे को अधिक सटीक और निष्पक्ष बनाने वाले एक ऐतिहासिक प्रस्ताव का समर्थन किया है। भारत ने स्पष्ट किया है कि यह कदम किसी एक विशेष मानचित्र प्रणाली के पक्ष में नहीं है।
- भारत ने संयुक्त राष्ट्र के 'Correct the map' प्रस्ताव के पक्ष में मतदान किया।
- प्रस्ताव का उद्देश्य महाद्वीपीय भूभागों के आकार के चित्रण में सुधार करना है।
- भारत ने स्पष्ट किया कि वह किसी एक विशिष्ट मानचित्र प्रोजेक्शन का समर्थन नहीं कर रहा है।
- अमेरिका इस प्रस्ताव के खिलाफ मतदान करने वाले प्रमुख देशों में शामिल रहा।
संयुक्त राष्ट्र महासभा में एक महत्वपूर्ण बदलाव की दिशा में कदम बढ़ाते हुए, भारत ने उस प्रस्ताव का समर्थन किया है जो दुनिया के नक्शे को अधिक सटीक और संतुलित बनाने की मांग करता है। 'Correct the map: rebalancing global cartographic representation' नामक इस प्रस्ताव को 193 सदस्यीय महासभा में भारी बहुमत के साथ अपनाया गया। मतदान के दौरान 164 देशों ने इसके पक्ष में वोट दिया, जबकि अमेरिका ने इसके विरोध में मतदान किया।
वर्तमान में उपयोग किए जाने वाले अधिकांश विश्व मानचित्र, विशेष रूप से 16वीं शताब्दी का मर्केटर प्रोजेक्शन (Mercator projection), भूमध्य रेखा से दूर स्थित भूभागों के आकार को विकृत कर देते हैं। इससे अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों का वास्तविक आकार छोटा दिखाई देता है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य इस भौगोलिक असंतुलन को दूर करना है ताकि वैश्विक प्रतिनिधित्व अधिक न्यायसंगत हो सके।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि मानचित्र केवल नेविगेशन के उपकरण नहीं हैं, बल्कि वे दुनिया को देखने के हमारे दृष्टिकोण को भी आकार देते हैं। जब महाद्वीपों का आकार गलत दिखाया जाता है, तो यह अनजाने में कुछ क्षेत्रों के महत्व को कम कर सकता है और वैश्विक भू-राजनीतिक धारणाओं को प्रभावित कर सकता है। भारत का रुख इस मामले में अत्यंत संतुलित रहा है।
मानचित्र समाज की भौगोलिक समझ और विश्व के सापेक्ष पैमाने को समझने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव, रागहू पुरी ने स्पष्ट किया कि भारत इस पहल का स्वागत करता है क्योंकि यह अधिक सटीक कार्टोग्राफिक प्रथाओं को बढ़ावा देती है। हालांकि, भारत ने एक महत्वपूर्ण तकनीकी अंतर भी स्पष्ट किया। भारत ने कहा कि वह 'इक्वल एरिया' (Equal Area) मानचित्र प्रोजेक्शन के व्यापक उपयोग का समर्थन कर रहा है, न कि किसी एक विशिष्ट प्रणाली जैसे 'इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन' का।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
मर्केटर प्रोजेक्शन को मूल रूप से समुद्री नेविगेशन के लिए बनाया गया था। यह सीधी रेखाओं में यात्रा करने के लिए तो बेहतरीन है, लेकिन यह ध्रुवों के पास के क्षेत्रों (जैसे ग्रीनलैंड) को वास्तविक आकार से कई गुना बड़ा दिखा देता है, जिससे वैश्विक शक्ति संतुलन की धारणा प्रभावित होती है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: भारत ने किस विशेष बात पर जोर दिया?
उत्तर: भारत ने स्पष्ट किया कि वह मानचित्र सुधार का समर्थन करता है, लेकिन किसी एक विशेष प्रोजेक्शन प्रणाली का नहीं।
प्रश्न 2: इस प्रस्ताव को किसने पेश किया था?
उत्तर: इस प्रस्ताव को टोगो (Togo) देश द्वारा प्रायोजित किया गया था।