पश्चिमी एशिया में तनाव एक बार फिर चरम पर है क्योंकि ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य हमले फिर से शुरू हो गए हैं। अमेरिकी ठिकानों पर ड्रोन हमलों और तेल की कीमतों में उछाल ने वैश्विक चिंता बढ़ा दी है।

  • ईरान और अमेरिका के बीच सैन्य संघर्ष फिर से शुरू हो गया है।
  • अमेरिकी कमांड ने होर्मुज जलडमरूमध्य के पास 60 ठिकानों को निशाना बनाया।
  • ईरान ने कुवैत, यूएई और बहरीन में अमेरिकी सैन्य ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।
  • तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें $100 के करीब पहुंच गईं।

पश्चिमी एशिया में शांति के कुछ हफ्तों के बाद, ईरान और अमेरिका के बीच संघर्ष एक बार फिर हिंसक रूप ले चुका है। पिछले एक महीने से जारी सापेक्ष शांति अब पूरी तरह से भंग हो गई है, जिससे क्षेत्र में एक बड़े युद्ध का खतरा मंडरा रहा है।

अमेरिकी strikes और ईरान की प्रतिक्रिया

अमेरिकी सेंट्रल कमांड (CENTCOM) ने बुधवार और गुरुवार की सुबह होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) के पास ईरानी तट के साथ लगभग 60 स्थानों पर हमले किए। अमेरिकी अधिकारियों के अनुसार, इन हमलों में मिसाइल और ड्रोन प्रणालियों, भंडारण केंद्रों, समुद्री बारूदी सुरंग बिछाने वाली नावों और नौसैनिक केंद्रों को सफलतापूर्वक नष्ट कर दिया गया है।

इन हमलों के जवाब में, ईरान के इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) ने जवाबी कार्रवाई करते हुए कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात (UAE) और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य अड्डों को निशाना बनाया। ईरान ने दावा किया कि उन्होंने कुवैत के अहमद अल-जबेर एयरबेस पर उपग्रह संचार प्रणालियों और हथियारों के गोदामों को नष्ट कर दिया है। इसके अलावा, यूएई के अल मिन्हाद एयरबेस में रडार प्रणालियों को भी निशाना बनाया गया है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह संघर्ष केवल दो देशों के बीच का युद्ध नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक बड़ा खतरा है। होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण तेल पारगमन मार्गों में से एक है। यदि यहाँ संघर्ष बढ़ता है, तो वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला पूरी तरह से बाधित हो सकती है।

ईरान और अमेरिका के बीच का यह नया सैन्य चक्र वैश्विक अर्थव्यवस्था, विशेष रूप से ऊर्जा बाजारों के लिए एक अत्यंत अस्थिर समय की शुरुआत कर सकता है।

इस सैन्य गतिरोध का सीधा असर वैश्विक बाजार पर देखा जा रहा है। पश्चिमी एशिया में बढ़ते तनाव के कारण कच्चे तेल की कीमतें तेजी से बढ़ी हैं। गुरुवार शाम तक, ब्रेंट क्रूड प्रति बैरल 97.39 डॉलर के स्तर पर पहुंच गया, जो $100 के मनोवैज्ञानिक स्तर के बेहद करीब है।

Historical Background

ईरान और अमेरिका के बीच तनाव का इतिहास दशकों पुराना है, जो 1979 की ईरानी क्रांति के बाद से चला आ रहा है। पिछले कुछ वर्षों में, परमाणु समझौते (JCPOA) के टूटने और ईरान के परमाणु कार्यक्रम को लेकर बढ़ते संदेह ने इस शत्रुता को और गहरा कर दिया है।

Did You Know?: होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के कुल तेल निर्यात का लगभग 20% हिस्सा संभालता है, जो इसे दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'चोक पॉइंट' बनाता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: ईरान ने किन अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया?
उत्तर: ईरान ने कुवैत के अहमद अल-जबेर एयरबेस और यूएई के अल मिन्हाद एयरबेस सहित कई ठिकानों पर मिसाइल और ड्रोन हमले किए।

प्रश्न 2: इस संघर्ष का तेल की कीमतों पर क्या प्रभाव पड़ा है?
उत्तर: तनाव के कारण ब्रेंट क्रूड की कीमतें बढ़कर लगभग $97.39 प्रति बैरल तक पहुंच गई हैं।