बिश्केक में आयोजित SCO शिखर सम्मेलन में सदस्य देशों ने ईरान की संप्रभुता का समर्थन करते हुए अमेरिका और इजरायल की सैन्य कार्रवाइयों की आलोचना की है। प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मापदंडों' को समाप्त करने का आह्वान किया।

  • SCO सदस्यों ने ईरान की क्षेत्रीय अखंडता का समर्थन किया और सैन्य हमलों की निंदा की।
  • प्रधानमंत्री मोदी ने आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मापदंड' खत्म करने की मांग की।
  • समूह ने फिलिस्तीन मुद्दे के न्यायपूर्ण समाधान को पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए आवश्यक बताया।
  • अगला SCO शिखर सम्मेलन पाकिस्तान की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा।

किर्गिस्तान की राजधानी बिश्केक में आयोजित शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के 26वें शिखर सम्मेलन ने वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ का संकेत दिया है। 31 अगस्त से 1 सितंबर, 2026 तक चले इस ऐतिहासिक सम्मेलन में दुनिया के शक्तिशाली नेताओं, जिनमें भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग शामिल थे, ने भाग लिया। यह शिखर सम्मेलन संगठन के 25 वर्ष पूरे होने के उपलक्ष्य में आयोजित किया गया था।

इस शिखर सम्मेलन का सबसे महत्वपूर्ण पहलू 'बिश्केक घोषणापत्र' रहा। सम्मेलन के दौरान सदस्य देशों ने ईरान पर किए गए सैन्य हमलों की कड़ी निंदा की और ईरान की संप्रभुता एवं क्षेत्रीय अखंडता के प्रति अपना अटूट समर्थन दोहराया। घोषणापत्र में अमेरिका और इजरायल द्वारा अंतरराष्ट्रीय कानून और संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उल्लंघन के लिए स्पष्ट रूप से आलोचना की गई। यह बैठक ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या के बाद पहली बड़ी अंतरराष्ट्रीय बैठक थी।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि SCO अब केवल एक क्षेत्रीय समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने वाले एक महत्वपूर्ण बहुपक्षीय मंच के रूप में उभर रहा है। ईरान के परमाणु अधिकारों का समर्थन करना और पश्चिम एशिया में स्थिरता के लिए फिलिस्तीन समाधान की वकालत करना यह दर्शाता है कि SCO अब वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को मजबूती से उठा रहा है।

आतंकवाद के खिलाफ 'दोहरे मापदंडों' को समाप्त करना वैश्विक सुरक्षा के लिए अनिवार्य है।

प्रधानमंत्री मोदी ने अपने संबोधन में आतंकवाद, अलगाववाद और उग्रवाद की 'त्रयी' (troika) पर प्रहार किया। उन्होंने विशेष रूप से जोर दिया कि आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में कोई 'दोहरे मापदंड' नहीं होने चाहिए। भारत ने अफगानिस्तान में शांति और स्थिरता के लिए अपनी प्रतिबद्धता दोहराई और वहां एक 'समावेशी सरकार' के गठन का आह्वान किया। इसके अलावा, मोदी ने कनेक्टिविटी बढ़ाने की बात कही, लेकिन साथ ही राज्यों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की शर्त भी रखी, जो चीन के CPEC प्रोजेक्ट पर एक सूक्ष्म कटाक्ष था।

एक अन्य महत्वपूर्ण मुद्दा 'अनाधिकृत उपग्रह इंटरनेट सेवाओं' का था, जिसे अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन माना गया। यह स्पष्ट रूप से एलन मस्क की 'स्टारलिंक' सेवा की ओर इशारा था, जो युद्ध क्षेत्रों में सक्रिय है। साथ ही, समूह ने सदस्य देशों के शांतिपूर्ण उद्देश्यों के लिए परमाणु ऊर्जा विकसित करने के 'अविभाज्य अधिकार' की भी रक्षा की।

Frequently Asked Questions

1. SCO का अगला शिखर सम्मेलन कहाँ आयोजित होगा?
अगला शिखर सम्मेलन पाकिस्तान की अध्यक्षता में आयोजित किया जाएगा।

2. बिश्केक घोषणापत्र में ईरान के बारे में क्या कहा गया है?
घोषणापत्र में ईरान की संप्रभुता का समर्थन किया गया और उस पर हुए सैन्य हमलों की निंदा की गई है।

Did You Know?: SCO की स्थापना 2001 में 'शंघाई फाइव' (चीन, रूस, कजाकिस्तान, किर्गिस्तान और ताजिकिस्तान) द्वारा की गई थी।