कांग्रेस नेता शशि थरूर ने तर्क दिया है कि बदलती भू-राजनीतिक परिस्थितियों के बीच भारत को पश्चिम एशिया में अपनी 'रणनीतिक दूरी' की नीति पर पुनर्विचार करना चाहिए। उन्होंने ऊर्जा सुरक्षा और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए एक अधिक सक्रिय भूमिका का सुझाव दिया है।

  • भारत को पश्चिम एशिया में अपनी 'रणनीतिक दूरी' की नीति को बदलने की जरूरत है।
  • क्षेत्रीय सुरक्षा, ऊर्जा आपूर्ति और आर्थिक हितों की रक्षा के लिए सक्रिय भागीदारी अनिवार्य है।
  • भारत को सैन्य गठबंधनों में फंसे बिना अपने रणनीतिक हितों को सुरक्षित करना होगा।

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता और प्रखर विचारक शशि थरूर ने 'द हिंदू' में अपने नवीनतम लेख में भारत की विदेश नीति के एक अत्यंत महत्वपूर्ण पहलू पर सवाल उठाए हैं। थरूर का तर्क है कि पश्चिम एशिया (West Asia) की बदलती सुरक्षा वास्तुकला को देखते हुए, नई दिल्ली अब अपनी पारंपरिक 'रणनीतिक दूरी' (Strategic Distance) बनाए रखने की नीति को लंबे समय तक जारी नहीं रख सकती।

थरूर के अनुसार, पश्चिम एशिया केवल एक भौगोलिक क्षेत्र नहीं है, बल्कि यह भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापारिक संबंधों, प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन (remittances) और व्यापक आर्थिक हितों का आधार स्तंभ है। जैसे-जैसे इस क्षेत्र में शक्ति संतुलन बदल रहा है, भारत की निष्क्रियता उसके दीर्घकालिक हितों को नुकसान पहुंचा सकती है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बड़ा हिस्सा मध्य पूर्व से आता है। यदि भारत इस क्षेत्र में सुरक्षा ढांचे का हिस्सा नहीं बनता है, तो वह महत्वपूर्ण व्यापारिक मार्गों और ऊर्जा आपूर्ति श्रृंखलाओं पर नियंत्रण खो सकता है। क्षेत्रीय अस्थिरता सीधे तौर पर भारतीय अर्थव्यवस्था और प्रवासी भारतीयों की सुरक्षा को प्रभावित करती है।

भारत को बिना किसी कठोर सैन्य गठबंधन में शामिल हुए, अपनी रक्षा क्षमताओं का उपयोग करते हुए एक सक्रिय सुरक्षा भागीदार के रूप में उभरना चाहिए।

लेख में उभरते हुए सुरक्षा समझौतों और भारत की बढ़ती रक्षा क्षमताओं पर भी चर्चा की गई है। थरूर का सुझाव है कि भारत को 'गठबंधन नहीं, बल्कि साझेदारी' के मॉडल पर काम करना चाहिए, जिससे वह किसी एक गुट का हिस्सा बने बिना अपने हितों की रक्षा कर सके।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ऐतिहासिक रूप से, भारत ने पश्चिम एशिया में गुटनिरपेक्षता और तटस्थता की नीति अपनाई है। हालांकि, पिछले दशक में भारत ने यूएई, सऊदी अरब और इजराइल जैसे देशों के साथ अपने संबंधों को काफी मजबूत किया है, जो एक बड़े नीतिगत बदलाव का संकेत है।

Did You Know?: पश्चिम एशिया से आने वाला तेल भारत की ऊर्जा जरूरतों का एक बहुत बड़ा हिस्सा पूरा करता है, जो देश की जीडीपी और महंगाई को सीधे प्रभावित करता है।

Frequently Asked Questions

1. शशि थरूर भारत को क्या करने की सलाह दे रहे हैं?
थरूर सलाह दे रहे हैं कि भारत को पश्चिम एशिया में केवल एक दर्शक बने रहने के बजाय एक सक्रिय सुरक्षा भूमिका निभानी चाहिए।

2. पश्चिम एशिया भारत के लिए क्यों महत्वपूर्ण है?
यह क्षेत्र भारत की ऊर्जा सुरक्षा, व्यापार और प्रवासियों द्वारा भेजे जाने वाले धन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।