प्रसिद्ध लेखक पंकज मिश्रा ने अल जज़ीरा के 'डेजा वू' पॉडकास्ट में यह विश्लेषण किया है कि कैसे प्रबोधन (Enlightenment) के अधूरे वादों ने आज के वैश्विक राजनीतिक गुस्से को जन्म दिया है।
- प्रबोधन काल के स्वतंत्रता और समानता के वादे साम्राज्यवादी नीतियों के साथ टकराए।
- वैश्विक दक्षिण (Global South) अब पश्चिमी आदर्शों का उपयोग पश्चिम के खिलाफ ही कर रहा है।
- राष्ट्रवाद और पूंजीवाद ने लोकतांत्रिक वादों को कमजोर किया है।
आज की दुनिया में राजनीतिक आक्रोश और असंतोष का माहौल क्यों बना हुआ है? प्रसिद्ध लेखक पंकज मिश्रा ने अल जज़ीरा के नवीनतम पॉडकास्ट 'डेजा वू' (Deja Vu) में इस जटिल प्रश्न का उत्तर खोजने का प्रयास किया है। उनका तर्क है कि वर्तमान युग का क्रोध अचानक पैदा नहीं हुआ है, बल्कि यह प्रबोधन (Enlightenment) के युग के दौरान किए गए उन वादों का परिणाम है जो कभी पूरे नहीं हुए।
मिश्रा के अनुसार, जब पश्चिमी देशों ने स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व के सिद्धांत दिए, तो वे अक्सर साम्राज्यवाद, राष्ट्रवाद और अनियंत्रित पूंजीवाद के साथ विरोधाभास में थे। यह विरोधाभास ही आज के वैश्विक अस्थिरता का मूल कारण है। जब साम्राज्यवादी शक्तियों ने इन आदर्शों को केवल अपने लिए सुरक्षित रखा और बाकी दुनिया को इससे वंचित रखा, तो एक गहरे असंतोष की नींव पड़ी।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि आज के भू-राजनीतिक तनाव केवल सीमाओं के विवाद नहीं हैं, बल्कि वे एक वैचारिक युद्ध हैं। जब 'ग्लोबल साउथ' के देश उन्हीं पश्चिमी मूल्यों का उपयोग पश्चिमी देशों की नीतियों को चुनौती देने के लिए करते हैं, तो यह वैश्विक शक्ति संतुलन को पूरी तरह से बदल देता है।
पश्चिमी उदारवाद के विरोधाभास ही आज के वैश्विक राजनीतिक आक्रोश की जननी हैं।
ऐतिहासिक रूप से, प्रबोधन काल ने तर्क और व्यक्तिगत स्वतंत्रता पर जोर दिया, लेकिन उसी समय उपनिवेशवाद ने दुनिया के बड़े हिस्सों को व्यवस्थित रूप से दबाया। यह दोहरा मापदंड आज के कट्टरपंथी आंदोलनों और राष्ट्रवादी लहरों को शक्ति प्रदान कर रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
18वीं और 19वीं शताब्दी के दौरान, यूरोप में लोकतंत्र की बातें हो रही थीं, जबकि उसी समय अफ्रीका और एशिया के देशों को औपनिवेशिक शासन के अधीन रखा जा रहा था। यह ऐतिहासिक विसंगति आज भी अंतरराष्ट्रीय संबंधों में एक गहरी दरार के रूप में मौजूद है।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: पंकज मिश्रा का मुख्य तर्क क्या है?
उत्तर: उनका तर्क है कि आज का राजनीतिक गुस्सा पश्चिमी देशों द्वारा किए गए स्वतंत्रता के अधूरे और विरोधाभासी वादों का परिणाम है।
प्रश्न 2: 'ग्लोबल साउथ' का उल्लेख क्यों किया गया है?
उत्तर: क्योंकि विकासशील देश अब उन्हीं लोकतांत्रिक और मानवाधिकारों के सिद्धांतों का उपयोग पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने के लिए कर रहे हैं।