संयुक्त राष्ट्र ने पारंपरिक मर्केटर प्रोजेक्शन के बजाय 'इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन' को अपनाने का प्रस्ताव पारित किया है, जो देशों के वास्तविक आकार को दर्शाता है। यह बदलाव सदियों से चली आ रही भौगोलिक गलतियों को सुधारने की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम है।
- संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 164-1 के भारी बहुमत से 'इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन' अपनाने का प्रस्ताव पारित किया।
- पारंपरिक मर्केटर मानचित्र अफ्रीका और दक्षिण एशिया जैसे क्षेत्रों को छोटा और यूरोप/उत्तरी अमेरिका को बहुत बड़ा दिखाते हैं।
- अफ्रीकी समूह के नेतृत्व में टोगा ने इस बदलाव का प्रस्ताव रखा, जिसे वैश्विक स्तर पर समर्थन मिला है।
- अमेरिका इस प्रस्ताव के खिलाफ एकमात्र देश था, जिसने इसे 'कट्टरपंथी वैचारिक परियोजना' बताया।
पिछले चार शताब्दियों से, दुनिया भर के स्कूलों और एटलस में उपयोग किए जाने वाले मर्केटर प्रोजेक्शन ने हमारी भौगोलिक समझ को विकृत कर दिया है। 16वीं शताब्दी में समुद्री व्यापार और औपनिवेशिक अन्वेषण के लिए बनाया गया यह नक्शा, पृथ्वी के गोल आकार को समतल करने की कोशिश में देशों के आकार को गलत तरीके से प्रदर्शित करता है।
इस विरूपण का सबसे बड़ा उदाहरण अफ्रीका और ग्रीनलैंड के बीच का अंतर है। मर्केटर मानचित्र पर ग्रीनलैंड लगभग अफ्रीका के बराबर दिखता है, जबकि वास्तविकता में अफ्रीका ग्रीनलैंड से लगभग 14 गुना बड़ा है। यह विरूपण भूमध्य रेखा से दूर जाने पर और भी बढ़ता जाता है, जिससे रूस और उत्तरी अमेरिका जैसे क्षेत्र अत्यधिक विशाल दिखाई देते हैं, जबकि अफ्रीका, लैटिन अमेरिका और दक्षिण एशिया छोटे नजर आते हैं।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि मानचित्र केवल भौगोलिक उपकरण नहीं हैं, बल्कि वे शिक्षा, कल्पना और सामूहिक धारणा को आकार देते हैं। जब हम गलत आकार देखते हैं, तो यह अनजाने में वैश्विक शक्ति संतुलन और क्षेत्रीय महत्व के बारे में गलत धारणाएं पैदा करता है।
मानचित्र शिक्षा और सामूहिक धारणा को आकार देते हैं, और यह प्रस्ताव अफ्रीकी वास्तविकता की पुष्टि करता है। - रॉबर्ट डुसी, टोगा के विदेश मंत्री
इस समस्या के समाधान के लिए, संयुक्त राष्ट्र महासभा (UNGA) ने शुक्रवार को 164-1 के बहुमत से 'इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन' को बढ़ावा देने का प्रस्ताव पारित किया। यह नया प्रोजेक्शन महाद्वीपों को उनके वास्तविक अनुपात में दिखाता है। टोगा के नेतृत्व में अफ्रीकी समूह द्वारा समर्थित इस पहल का उद्देश्य स्कूलों, शिक्षण संस्थानों और तकनीकी कंपनियों को पुराने नक्शों से हटाकर सटीक नक्शों की ओर ले जाना है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
1569 में भूगोलवेत्ता गेराड्रस मर्केटर ने इस मानचित्र का निर्माण किया था। उनका मुख्य उद्देश्य जहाजों के लिए दिशा और कोणों को सटीक बनाए रखना था, जो उस समय के समुद्री यात्रियों के लिए महत्वपूर्ण था। हालांकि, इस सटीकता की कीमत महाद्वीपों के क्षेत्रफल की सटीकता को खोकर चुकानी पड़ी। 'इक्वल अर्थ' मॉडल इसके विपरीत काम करता है; यह सीमाओं को थोड़ा मोड़ता है लेकिन क्षेत्रफल को पूरी तरह सटीक रखता है।
| विशेषता | मर्केटर प्रोजेक्शन | इक्वल अर्थ प्रोजेक्शन |
|---|---|---|
| मुख्य उद्देश्य | नेविगेशन और दिशा सटीकता | क्षेत्रफल की वास्तविक सटीकता |
| प्रमुख दोष | बड़े देशों (यूरोप/रूस) का अतिरंजित आकार | द्वीपों और तटरेखाओं का थोड़ा मुड़ा हुआ आकार |
| उपयोग | समुद्री यात्रा और नेविगेशन | शिक्षा और वैश्विक तुलना |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या संयुक्त राष्ट्र ने मर्केटर मानचित्र पर प्रतिबंध लगा दिया है?
नहीं, यह प्रस्ताव गैर-बाध्यकारी है। इसका उद्देश्य केवल दुनिया को अधिक सटीक 'इक्वल अर्थ' मानचित्रों का उपयोग करने के लिए प्रोत्साहित करना है।
प्रश्न 2: अमेरिका ने इस प्रस्ताव का विरोध क्यों किया?
अमेरिका ने इसे एक 'कट्टरपंथी वैचारिक परियोजना' बताते हुए विरोध किया और कहा कि संयुक्त राष्ट्र को मानचित्र के बजाय वास्तविक वैश्विक समस्याओं पर ध्यान देना चाहिए।