BRICS देशों ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में बड़ी हलचल पैदा कर दी है, जहाँ रूस के साथ 90% व्यापार अब स्थानीय मुद्राओं में हो रहा है। रूस ने भारत की नेतृत्व क्षमता की सराहना करते हुए आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर जोर दिया है।

  • रूस के साथ BRICS देशों का 90% व्यापार अब राष्ट्रीय मुद्राओं में हो रहा है।
  • रूस ने भारत की BRICS अध्यक्षता और रणनीतिक साझेदारी की जमकर प्रशंसा की।
  • संगठन अब आर्थिक सहयोग के साथ-साथ सुरक्षा, अंतरिक्ष और आतंकवाद विरोधी अभियानों पर ध्यान केंद्रित कर रहा है।
  • डीडॉलराइजेशन के बजाय भुगतान के विकल्पों को व्यापक बनाने पर जोर।

वैश्विक वित्तीय व्यवस्था में एक बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। BRICS देशों के बीच व्यापारिक संबंधों में अमेरिकी डॉलर की पकड़ ढीली पड़ती नजर आ रही है। रूस के राष्ट्रपति के प्रवक्ता दिमित्री पेस्कोव ने एक महत्वपूर्ण खुलासा करते हुए बताया कि रूस के BRICS सदस्य देशों के साथ लगभग 90 फीसदी भुगतान अब उनकी अपनी राष्ट्रीय मुद्राओं (National Currencies) में किए जा रहे हैं।

यह घटनाक्रम उस समय सामने आया है जब दुनिया भर में 'डीडॉलराइजेशन' (De-dollarization) की चर्चा तेज है। हालांकि, पेस्कोव ने स्पष्ट किया कि इसका मुख्य उद्देश्य डॉलर को पूरी तरह खत्म करना नहीं, बल्कि भुगतान के तरीकों में विविधता लाना और आर्थिक संप्रभुता को बढ़ाना है। यह कदम वैश्विक व्यापार में पश्चिमी देशों के प्रभुत्व को चुनौती देने की दिशा में एक बड़ा संकेत माना जा रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, BRICS द्वारा स्थानीय मुद्राओं को अपनाना वैश्विक बैंकिंग प्रणाली के लिए एक निर्णायक मोड़ है। यदि उभरती अर्थव्यवस्थाएं अपनी मुद्राओं में व्यापार करने में सफल होती हैं, तो इससे डॉलर पर निर्भरता कम होगी और वैश्विक मुद्रा बाजार में नई शक्तियों का उदय होगा।

रूस का यह कदम वैश्विक वित्त में बहुध्रुवीय व्यवस्था (Multipolar World Order) की ओर एक स्पष्ट संक्रमण है।

रूस ने इस प्रक्रिया में भारत की भूमिका को अत्यंत महत्वपूर्ण बताया है। पेस्कोव ने भारत को रूस का एक मजबूत 'रणनीतिक साझेदार' करार दिया और भारत की BRICS अध्यक्षता के दौरान हासिल किए गए परिणामों की सराहना की। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि भारत के साथ अधिकांश लेनदेन भी अब राष्ट्रीय मुद्राओं में ही संपन्न हो रहे हैं।

सहयोग के नए आयाम

BRICS अब केवल एक आर्थिक ब्लॉक नहीं रह गया है। संगठन अब तीन प्रमुख स्तंभों पर काम कर रहा है: मानवीय सहयोग, आर्थिक सहयोग और सुरक्षा। सुरक्षा के मोर्चे पर, BRICS सदस्य देश आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी और साइबर सुरक्षा जैसे मुद्दों पर एक साझा तंत्र विकसित कर रहे हैं। इसके अलावा, अंतरिक्ष अनुसंधान के क्षेत्र में भी सहयोग बढ़ाने की योजना है।

Did You Know?: BRICS का विस्तार अब नए देशों को भी शामिल करने की ओर अग्रसर है, जिससे यह दुनिया की एक बड़ी आबादी और जीडीपी का प्रतिनिधित्व करने वाला समूह बन जाएगा।

Frequently Asked Questions

1. क्या BRICS डॉलर को पूरी तरह खत्म करना चाहता है?
नहीं, पेस्कोव के अनुसार इसका उद्देश्य भुगतान के विकल्पों को बढ़ाना और आर्थिक जोखिमों को कम करना है।

2. भारत की भूमिका इस संगठन में क्या है?
भारत एक प्रमुख रणनीतिक साझेदार है और BRICS के भीतर आर्थिक और राजनयिक स्थिरता बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।