एल नीनो के प्रभाव से श्रीलंका में सूखा गहरा गया है, जिससे 1.15 लाख से अधिक लोग पीने के पानी की कमी से जूझ रहे हैं। जलाशयों का स्तर गिरने और फसलों के नुकसान से स्थिति गंभीर हो गई है।

  • एल नीनो के कारण श्रीलंका के 7 जिलों में 1,15,586 लोग जल संकट का सामना कर रहे हैं।
  • एरुवेवा जलाशय का जल स्तर 3,500 एकड़-फीट से घटकर मात्र 1,000 एकड़-फीट रह गया है।
  • सूखे के कारण कृषि, वन्यजीव और जलीय जीवन पर विनाशकारी प्रभाव पड़ रहा है।

श्रीलंका में मौसम की बदलती परिस्थितियों और एल नीनो (El Nino) के उभरते प्रभाव ने एक गंभीर मानवीय संकट खड़ा कर दिया है। आपदा प्रबंधन केंद्र (DMC) के अनुसार, देश के 25 प्रशासनिक जिलों में से 7 जिलों में अब तक 1,15,586 लोग पीने के पानी की भारी कमी का सामना कर रहे हैं। उच्च तापमान और वर्षा की कमी ने स्थिति को और भी भयावह बना दिया है।

मौसम विज्ञान विभाग के महानिदेशक अजीत विजेमान ने पुष्टि की है कि मध्य और पूर्वी उष्णकटिबंधीय प्रशांत महासागर में हो रहा तापमान परिवर्तन, जिसे एल नीनो कहा जाता है, इस शुष्क मौसम का मुख्य कारक हो सकता है। यह स्थिति न केवल इंसानों के लिए, बल्कि पारिस्थितिकी तंत्र के लिए भी एक बड़ी चुनौती बन गई है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि श्रीलंका जैसे द्वीप राष्ट्र के लिए एल नीनो का प्रभाव अत्यंत विनाशकारी होता है। हिंद महासागर से घिरे होने के कारण, यहाँ समुद्री तापमान में मामूली बदलाव भी मानसून के पैटर्न को पूरी तरह से अस्त-व्यस्त कर सकता है, जिससे खाद्य सुरक्षा और जल आपूर्ति दोनों खतरे में पड़ जाती हैं।

एल नीनो के कारण होने वाला यह शुष्क दौर न केवल कृषि को प्रभावित कर रहा है, बल्कि पारिस्थितिक संतुलन को भी बिगाड़ रहा है।

क्षेत्रीय प्रभाव की बात करें तो, उत्तर-मध्य अनुराधापुरा जिले में एरुवेवा जलाशय का स्तर तेजी से गिर रहा है। 3,500 एकड़-फीट की क्षमता वाला यह जलाशय अब केवल 1,000 एकड़-फीट पर सिमट गया है। इसी तरह, मटाले और नंदिकदल जैसे क्षेत्रों में भी जल स्तर में भारी गिरावट दर्ज की गई है।

इस सूखे का असर केवल मनुष्यों तक सीमित नहीं है। उत्तर-पूर्व में मुल्लाइतिवू लैगून में हजारों मछलियाँ मृत पाई गई हैं, जिसका कारण खारे और मीठे पानी का मिश्रण बताया जा रहा है। साथ ही, प्राकृतिक जल स्रोतों के सूखने से जंगली जानवर भी पानी की तलाश में बस्तियों की ओर पलायन करने को मजबूर हैं।

कृषि क्षेत्र में भी भारी तबाही देखी जा रही है। धान, नारियल, केला और अमरूद जैसी प्रमुख फसलों को पानी की कमी के कारण भारी नुकसान हुआ है। हालांकि, मौसम विभाग ने सितंबर के अंत तक कुछ राहत भरी बारिश की उम्मीद जताई है, जिससे किसानों और आम जनता को राहत मिल सकती है।

Did You Know?: एल नीनो एक ऐसी प्राकृतिक घटना है जो वैश्विक मौसम पैटर्न को बदल सकती है, जिससे कहीं अत्यधिक बाढ़ तो कहीं भीषण सूखा पड़ता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: श्रीलंका के कितने जिले जल संकट से प्रभावित हैं?
उत्तर: वर्तमान में श्रीलंका के 25 जिलों में से 7 जिले गंभीर जल संकट का सामना कर रहे हैं।

प्रश्न 2: एल नीनो का क्या प्रभाव है?
उत्तर: एल नीनो प्रशांत महासागर के तापमान में वृद्धि करता है, जिससे दुनिया भर में वर्षा के पैटर्न बदल जाते हैं और सूखे जैसी स्थितियां पैदा होती हैं।