रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने कोलंबो में भारतीय प्रवासियों को संबोधित करते हुए कहा कि भारत किसी भी संकट में श्रीलंका का मजबूती से समर्थन करेगा, साथ ही उन्होंने भारत की आर्थिक प्रगति का भी विवरण दिया।
- भारत ने श्रीलंका को आश्वासन दिया कि वह किसी भी संकट में उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा।
- रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने भारत की 7.8% जीडीपी वृद्धि और वैश्विक साख का उल्लेख किया।
- भारतीय प्रवासियों को दोनों देशों के बीच 'सेतु' के रूप में परिभाषित किया गया।
- 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'महासागर' पहल के माध्यम से क्षेत्रीय सुरक्षा पर जोर।
भारत के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने अपनी पहली तीन दिवसीय श्रीलंका यात्रा के दौरान एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संदेश दिया है। कोलंबो में भारतीय प्रवासियों के साथ बातचीत करते हुए, सिंह ने स्पष्ट किया कि जब भी श्रीलंका किसी संकट का सामना करेगा, भारत उसके साथ मजबूती से खड़ा रहेगा। उन्होंने जोर दिया कि दोनों देशों के संबंध केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि साझा इतिहास, संस्कृति और विश्वास पर आधारित हैं।
यह यात्रा ऐसे समय में हुई है जब भारत हिंद महासागर क्षेत्र (IOR) में अपनी रणनीतिक स्थिति को और मजबूत करना चाहता है। राजनाथ सिंह ने श्रीलंका में रहने वाले भारतीय समुदाय को एक "सेतु" बताया, जो दोनों राष्ट्रों के बीच मित्रता को गहरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह दौरा केवल तात्कालिक सहायता के बारे में नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक संकेत है। भारत अपनी आर्थिक प्रगति—जैसे कि दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा मोबाइल निर्माता बनना और तीसरा सबसे बड़ा स्टार्टअप इकोसिस्टम होना—का प्रदर्शन कर खुद को क्षेत्र के लिए एक मुख्य आर्थिक स्तंभ के रूप में पेश कर रहा है।
"भारत की 'नेबरहुड फर्स्ट' नीति अब केवल सहायता प्रदान करने से बढ़कर दक्षिण एशियाई देशों के लिए सतत आर्थिक विकास का एक मॉडल पेश करने की ओर बढ़ रही है।"
अपने संबोधन में, सिंह ने भारत की घरेलू उपलब्धियों का विवरण दिया ताकि श्रीलंका को अपने साझेदार की ताकत का अंदाजा हो सके। उन्होंने बताया कि भारत का वस्तु और सेवा निर्यात 2014 के 45 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 2025-26 में 79 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने भारत-यूरोपीय संघ FTA को "सभी सौदों की जननी" (Mother of All Deals) बताते हुए भारत की बढ़ती राजनयिक शक्ति का उल्लेख किया।
रक्षा मंत्री ने आत्मनिर्भर भारत अभियान पर भी चर्चा की और बताया कि कैसे रक्षा क्षेत्र में भारत की क्षमताएं बढ़ी हैं। श्रीलंका के लिए यह विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत समुद्री सुरक्षा और रक्षा सहयोग के माध्यम से क्षेत्र में स्थिरता सुनिश्चित करना चाहता है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने हमेशा श्रीलंका के संकटों में सबसे पहले प्रतिक्रिया दी है, जैसा कि 2022 के आर्थिक संकट के दौरान देखा गया था। यह यात्रा उसी परंपरा को आगे बढ़ाती है और महासागर (MAHASAGAR) पहल के तहत हिंद महासागर को शांति और समृद्धि का क्षेत्र बनाने के लक्ष्य को पुष्ट करती है।
| पैरामीटर | 2014 की स्थिति | 2025-26 की स्थिति |
|---|---|---|
| मोबाइल निर्माण इकाइयाँ | 2 इकाइयाँ | 300+ इकाइयाँ |
| वस्तु एवं सेवा निर्यात | 45 लाख करोड़ रुपये | 79 लाख करोड़ रुपये |
| वैश्विक आर्थिक योगदान | सामान्य | वैश्विक विकास में 16% |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: 'नेबरहुड फर्स्ट' और 'महासागर' पहल क्या हैं?
ये भारत के रणनीतिक ढांचे हैं जिनका उद्देश्य पड़ोसी देशों के साथ संबंधों को प्राथमिकता देना और हिंद महासागर क्षेत्र में सुरक्षा और सहयोग बढ़ाना है।
प्रश्न 2: राजनाथ सिंह ने कोलंबो में EU FTA का जिक्र क्यों किया?
यह दिखाने के लिए कि भारत की वैश्विक राजनयिक साख कितनी बढ़ी है और वह बड़े स्तर के व्यापारिक सौदे करने में सक्षम है, जिससे उसके पड़ोसियों का भरोसा बढ़े।