एक संभावित ट्रंप-शी-पुतिन शिखर सम्मेलन की आहट ने BRICS की एकजुटता पर सवाल खड़े कर दिए हैं। वैश्विक राजनीति में 'G3' के उदय की संभावना भारत और अन्य उभरती अर्थव्यवस्थाओं के लिए नई चुनौतियां पेश कर सकती है।

  • ट्रंप, शी और पुतिन के बीच संभावित त्रिपक्षीय बैठक वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल सकती है।
  • BRICS की आंतरिक एकजुटता ईरान और यूएई जैसे देशों के बीच मतभेदों के कारण कमजोर हो रही है।
  • एक संभावित 'G3' व्यवस्था भारत के लिए रणनीतिक चिंता का विषय बन सकती है।

इस सप्ताह दिल्ली में होने वाले BRICS शिखर सम्मेलन में कृषि, स्वास्थ्य और डिजिटलीकरण जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा होगी। हालांकि, जब BRICS धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा है, तब बाहरी वैश्विक राजनीति बहुत तेजी से बदल रही है। जहाँ एक ओर BRICS अमेरिकी प्रभुत्व को चुनौती देने का प्रयास कर रहा है, वहीं इसके दो मुख्य स्तंभ—रूस और चीन—अमेरिका के साथ अलग-अलग या संयुक्त समझौते तलाश रहे हैं।

विशेषज्ञों का मानना है कि इस शिखर सम्मेलन का असली महत्व घोषणापत्रों में नहीं, बल्कि नेताओं की उपस्थिति में है। नरेंद्र मोदी और शी जिनपिंग के बीच संभावित द्विपक्षीय बैठक पर पूरी दुनिया की नजरें टिकी हैं, जो सीमा विवाद और आर्थिक संबंधों को पुनर्जीवित करने की कोशिश कर सकते हैं।

क्यों यह महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि वैश्विक भू-राजनीति एक नए मोड़ पर है। यदि अमेरिका, चीन और रूस के बीच एक नया त्रिकोणीय तालमेल बनता है, तो यह मौजूदा बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था को पूरी तरह से बदल सकता है।

'G3' का उदय यातस्ता प्रणाली (Yalta System) के अंत और एक नई वैश्विक व्यवस्था की शुरुआत का संकेत हो सकता है।

BRICS के भीतर भी मतभेद स्पष्ट होने लगे हैं। ईरान और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच के तनाव ने समूह की एकता को प्रभावित किया है। ईरान जहाँ अमेरिकी और इजरायली सैन्य कार्रवाई की निंदा चाहता है, वहीं UAE संप्रभुता और समुद्री व्यापार की सुरक्षा पर जोर दे रहा है।

दूसरी ओर, डोनाल्ड ट्रंप की कूटनीति व्यक्तिगत संबंधों पर आधारित है। उनका मानना है कि पुतिन और शी के साथ सीधे संबंध वैश्विक तनाव को कम कर सकते हैं। हालांकि, यूरोपीय देश और एशियाई सहयोगी इस बात से डरे हुए हैं कि अमेरिका इन देशों के साथ समझौता करके उनकी सुरक्षा की अनदेखी कर सकता है।

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग एक मजबूत स्थिति में हैं। वे खुद को न केवल 'ग्लोबल साउथ' के नेता के रूप में, बल्कि अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था के एक समान भागीदार के रूप में पेश कर रहे हैं। यदि नवंबर में शंघाई में APEC शिखर सम्मेलन के दौरान ट्रंप-शी-पुतिन की बैठक होती है, तो यह एक नए 'G3' युग की शुरुआत होगी।

Did You Know?: रूस कभी G8 का हिस्सा था, जो पश्चिमी औद्योगिक देशों का एक प्रमुख समूह था।

Frequently Asked Questions

1. 'G3' क्या है? यह एक संभावित त्रिपक्षीय व्यवस्था है जिसमें अमेरिका, चीन और रूस मिलकर वैश्विक नेतृत्व कर सकते हैं।

2. भारत के लिए चुनौती क्या है? भारत को डर है कि यदि दुनिया G3 द्वारा संचालित होती है, तो भारत को इस नए शक्ति केंद्र से बाहर रखा जा सकता है।