बांग्लादेश में खसरे के प्रकोप ने लगभग 1,000 बच्चों की जान ले ली है, जिसका मुख्य कारण राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में आई भारी गिरावट है। सरकार अब राजनीतिक अस्थिरता और महामारी के कारण पैदा हुए 'इम्युनिटी गैप' को भरने की कोशिश कर रही है।
- 2026 की शुरुआत से अब तक बांग्लादेश में खसरे से लगभग 1,000 संदिग्ध मौतें।
- 1,66,000 से अधिक संदिग्ध मामले दर्ज, जिनमें से करीब 20,000 लैब-पुष्ट हैं।
- कोविड-19 और 2024 के राजनीतिक उथल-पुथल के कारण टीकाकरण में आई कमी।
- WHO और गावी (Gavi) के सहयोग से आपातकालीन टीकाकरण अभियान जारी।
बांग्लादेश की स्वास्थ्य प्रणाली इस समय गहरे संकट से गुजर रही है। देश भर में खसरे (Measles) का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जिसने अब तक सैकड़ों बच्चों की जान ले ली है। सरकार के स्वास्थ्य सेवा महानिदेशालय के अनुसार, 8 सितंबर 2026 तक संदिग्ध खसरे के मामलों में मरने वालों की संख्या 999 तक पहुंच गई है। राजधानी ढाका के विशेष बाल अस्पतालों में गंभीर रूप से बीमार बच्चों की भीड़ उमड़ रही है।
महामारी का पैमाना डराने वाला है। स्वास्थ्य मंत्रालय के आंकड़ों के मुताबिक, मार्च से अब तक 1,66,000 से अधिक संदिग्ध मामले सामने आए हैं, जिनमें से 19,835 मामलों की प्रयोगशाला में पुष्टि हो चुकी है। ग्रामीण इलाकों से माता-पिता अपने बच्चों को लेकर सैकड़ों किलोमीटर का सफर तय कर ढाका आ रहे हैं, क्योंकि स्थानीय अस्पतालों में संसाधनों की कमी है और बीमारी का रूप घातक होता जा रहा है।
यह मामला क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह प्रकोप केवल एक चिकित्सा विफलता नहीं है, बल्कि व्यवस्थागत पतन का परिणाम है। वैश्विक महामारी और घरेलू राजनीतिक अस्थिरता के मेल ने एक 'घातक इम्युनिटी गैप' पैदा कर दिया। 2021-2022 के दौरान जब नियमित टीकाकरण छूटा, तो बच्चों की एक पूरी पीढ़ी असुरक्षित हो गई। इसके बाद, शेख हसीना के शासन से मोहम्मद यूनुस की अंतरिम सरकार तक के राजनीतिक संक्रमण के दौरान 2024 का चतुर्वार्षिक टीकाकरण अभियान बाधित हुआ, जिसने आग में घी का काम किया।
"वर्तमान स्थिति टीकाकरण श्रृंखला के टूटने का सीधा परिणाम है; हम अब उन बच्चों का इलाज कर रहे हैं जिन्हें निमोनिया और एन्सेफलाइटिस जैसी जटिलताएं हैं, क्योंकि उनके पास टीकाकरण का प्राथमिक सुरक्षा कवच नहीं था।"
ऐतिहासिक रूप से, बांग्लादेश को सार्वजनिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में एक सफल देश माना जाता था। 2021 से 2025 के बीच, देश में प्रति वर्ष केवल 100 से 300 मामले दर्ज किए गए थे। हालांकि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) का कहना है कि बीमारी को रोकने के लिए 95% आबादी का टीकाकरण अनिवार्य है। इस आंकड़े से नीचे गिरने के कारण न केवल बिना टीकाकरण वाले बच्चे, बल्कि कमजोर इम्यून सिस्टम वाले लोग भी जोखिम में आ गए हैं।
इस स्वास्थ्य संकट ने राजनीतिक रंग भी ले लिया है। प्रधानमंत्री तारीक रहमान के नेतृत्व वाली वर्तमान सरकार ने टीकों की कमी और खराब कवरेज के लिए पूर्व नेतृत्व की योजना विफलताओं को जिम्मेदार ठहराया है। दूसरी ओर, भारत में निर्वासित शेख हसीना ने इस आपदा के लिए यूनुस के नेतृत्व वाली अंतरिम सरकार को दोषी ठहराया है।
| अवधि | अनुमानित वार्षिक मामले | टीकाकरण कार्यक्रम की स्थिति |
|---|---|---|
| 2020 | 2,410 | सक्रिय/मानक |
| 2021-2025 | 100 - 300 | उच्च नियंत्रण/सफल |
| 2026 (वर्तमान) | 1,66,000+ (संदिग्ध) | आपातकालीन रिकवरी चरण |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: बांग्लादेश में खसरे के मामले अचानक क्यों बढ़े?
इसका मुख्य कारण कोविड-19 महामारी के दौरान छूटा हुआ टीकाकरण और 2024 में राजनीतिक उथल-पुथल के कारण बाधित हुआ राष्ट्रीय टीकाकरण अभियान है।
प्रश्न 2: सरकार इस प्रसार को रोकने के लिए क्या कर रही है?
बांग्लादेश ने WHO, यूनिसेफ और गावी वैक्सीन गठबंधन के साथ मिलकर एक आपातकालीन टीकाकरण अभियान शुरू किया है, जिसमें मुख्य रूप से छह महीने से पांच साल तक के बच्चों पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है।