युद्धग्रस्त यमन में आर्थिक तबाही के कारण लाखों बच्चे शिक्षा छोड़कर जीवित रहने के लिए मजदूरी करने को मजबूर हैं। परिवार अब भूख और पढ़ाई के बीच एक दर्दनाक चुनाव कर रहे हैं।
- यमन में वर्तमान में लगभग 32 लाख बच्चे स्कूल से बाहर हैं, जो 2015 के 18 लाख से काफी अधिक है।
- आर्थिक तंगी के कारण 11 साल तक के बच्चे प्लास्टिक कचरा बीनने और कार धोने जैसे कठिन कामों में लगे हैं।
- UNICEF और OCHA के अनुसार, 66 लाख बच्चों को शिक्षा सहायता की तत्काल आवश्यकता है।
तइज़, यमन के बाहरी इलाकों में, नए शैक्षणिक वर्ष की शुरुआत कुछ के लिए उम्मीद लेकर आई है, लेकिन 11 वर्षीय हसना जबेर के लिए यह केवल जीवित रहने का एक और दिन है। जब उसके साथी कक्षा में जा रहे होते हैं, हसना खाली खेतों में फेंकी गई प्लास्टिक की बोतलें इकट्ठा करती है। एक दशक से अधिक समय से चल रहे युद्ध ने यमन की अर्थव्यवस्था को इस कदर तबाह कर दिया है कि हसना का शिक्षिका बनने का सपना अब धुंधला पड़ता जा रहा है।
हसना अकेली नहीं है। UNICEF के आंकड़ों के अनुसार, स्कूल न जाने वाले बच्चों की संख्या बढ़कर 32 लाख हो गई है। 2015 में यह संख्या 18 लाख थी, जो यह दर्शाता है कि स्थिति कितनी भयावह हो चुकी है। हसना जैसे परिवारों के लिए शिक्षा अब एक विलासिता बन गई है, क्योंकि किताबों और स्टेशनरी के खर्च से कहीं ज्यादा जरूरी परिवार के लिए भोजन जुटाना है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यमन एक 'खोई हुई पीढ़ी' (lost generation) के संकट का सामना कर रहा है। जब बच्चों को समय से पहले श्रम बाजार में धकेल दिया जाता है, तो गरीबी का चक्र और मजबूत हो जाता है। 11 साल की उम्र में छात्र से मजदूर बनने का मतलब केवल पढ़ाई का रुकना नहीं है, बल्कि भविष्य में कुशल रोजगार की संभावनाओं का खत्म होना है।
हसना के पिता, जाबेर अली, जो कार धोकर गुजारा करते हैं, यमन के माता-पिता की हताशा का चेहरा हैं। उन्होंने स्वीकार किया कि उनके पास केवल दो विकल्प थे: या तो बच्चों को स्कूल भेजें और उन्हें भूखा मरते देखें, या उन्हें कमाने में मदद करने के लिए कहें। यमनी रियाल की गिरती कीमत के बीच, प्लास्टिक बेचकर कमाई गई मामूली राशि (लगभग 1 डॉलर प्रतिदिन) परिवार के लिए जीवनरक्षक है।
"स्कूल छोड़ना बच्चों को उनके शिक्षा के अधिकार से वंचित करता है और भविष्य में स्थिर रोजगार मिलने की उनकी संभावनाओं को कमजोर करता है, जिससे वे कम उम्र में कठिन श्रम के लिए मजबूर हो जाते हैं।"
यमन मानवीय आवश्यकता और प्रतिक्रिया योजना (HNRP) के अनुसार, संकट केवल स्कूल छोड़ने वालों तक सीमित नहीं है। लगभग 66 लाख बच्चे बुनियादी सेवाओं के पतन और युद्ध के मानसिक आघात के कारण सीखने में गंभीर बाधाओं का सामना कर रहे हैं। शिक्षा विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि इसका सामाजिक प्रभाव स्थायी निरक्षरता और बेरोजगारी के रूप में सामने आएगा।
| पैमाना | 2015 (युद्ध का शुरुआती दौर) | 2026 (वर्तमान संकट) |
|---|---|---|
| स्कूल से बाहर बच्चे | 18 लाख | 32 लाख |
| शिक्षा सहायता की आवश्यकता | निर्धारित नहीं | 66 लाख |
| मुख्य कारण | प्रत्यक्ष संघर्ष | आर्थिक पतन और गरीबी |
अदन में शिक्षा मंत्रालय ने गहरी चिंता व्यक्त की है, लेकिन यह स्वीकार किया है कि समस्या प्रणालीगत है। चूंकि मुख्य कारण आर्थिक है न कि शैक्षणिक, इसलिए केवल कक्षा-आधारित समाधान प्रभावी नहीं होंगे। जब तक अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप के जरिए अर्थव्यवस्था को स्थिर नहीं किया जाता, लाखों बच्चों के लिए स्कूल के दरवाजे बंद ही रहेंगे।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न: सरकारी स्कूलों के बावजूद यमन में बच्चे स्कूल क्यों छोड़ रहे हैं?
उत्तर: हालांकि स्कूल मौजूद हो सकते हैं, लेकिन स्टेशनरी की लागत और भोजन खरीदने के लिए दैनिक आय की तत्काल आवश्यकता परिवारों को शिक्षा के बजाय काम चुनने पर मजबूर करती है।
प्रश्न: इस शैक्षिक अंतर का दीर्घकालिक प्रभाव क्या होगा?
उत्तर: इससे निरक्षरता बढ़ेगी, बेरोजगारी दर में वृद्धि होगी और देश के पुनर्निर्माण के लिए आवश्यक कुशल कार्यबल की कमी हो जाएगी।