एक जटिल वित्तीय नेटवर्क और मुखौटा कंपनियों (front companies) के सहारे पश्चिमी प्रतिबंधों को धता बताते हुए चीन और ईरान के बीच अरबों डॉलर का व्यापार निर्बाध रूप से जारी है। इस विशेष रिपोर्ट में खुलासा किया गया है कि कैसे बीजिंग और तेहरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों से बचने के लिए गुप्त रास्तों का इस्तेमाल किया।

  • चीन और ईरान ने अमेरिकी प्रतिबंधों को दरकिनार करने के लिए एक अरब डॉलर का गुप्त व्यापार नेटवर्क स्थापित किया है।
  • इस नेटवर्क में मुखौटा कंपनियों, तीसरे देशों के बैंकों और शेल फर्मों के एक जटिल जाल का उपयोग किया गया है।
  • इस व्यापारिक सांठगांठ से ईरान को सस्ती दरों पर चीनी सामान और बीजिंग को रियायती दरों पर ईरानी कच्चा तेल प्राप्त हो रहा है।

एक बेहद चौंकाने वाले खुलासे में यह बात सामने आई है कि कैसे एक बहु-अरब डॉलर के प्रतिबंध-उल्लंघन नेटवर्क ने वैश्विक वित्तीय प्रणालियों को चकमा देकर चीन और ईरान के बीच व्यापारिक संबंधों को जीवित रखा है। अमेरिकी प्रतिबंधों के अत्यधिक दबाव के बावजूद, बीजिंग और तेहरान ने एक ऐसा समानांतर वित्तीय तंत्र विकसित कर लिया है जो पश्चिमी नियामकों की पकड़ से पूरी तरह बाहर है। इस नेटवर्क के जरिए न केवल चीनी उपभोक्ता सामान बल्कि संवेदनशील औद्योगिक उपकरण भी ईरानी बाजारों तक पहुंच रहे हैं।

इस गुप्त व्यापारिक तंत्र की रीढ़ की हड्डी वे मुखौटा कंपनियां (front companies) और शेल फर्में हैं, जो संयुक्त अरब अमीरात (UAE), तुर्की और कुछ एशियाई देशों में पंजीकृत हैं। ये कंपनियां कागजों पर स्वतंत्र दिखती हैं, लेकिन वास्तव में इनका नियंत्रण ईरानी और चीनी एजेंटों के हाथों में होता है। इन कंपनियों के माध्यम से धन का लेन-देन इस तरह घुमाया जाता है कि अमेरिकी ट्रेजरी विभाग के विदेशी संपत्ति नियंत्रण कार्यालय (OFAC) के लिए इसके वास्तविक लाभार्थियों का पता लगाना लगभग असंभव हो जाता है।

यह क्यों मायने रखता है

BozokMedia का विश्लेषण दर्शाता है कि यह प्रतिबंध-विरोधी तंत्र केवल दो देशों के बीच का व्यापारिक समझौता नहीं है, बल्कि यह अमेरिकी डॉलर के वैश्विक प्रभुत्व को दी जा रही एक खुली चुनौती है। जैसे-जैसे अमेरिका प्रतिबंधों को एक हथियार के रूप में अधिक इस्तेमाल कर रहा है, वैसे-वैसे चीन और ईरान जैसी अर्थव्यवस्थाएं डॉलर-मुक्त वित्तीय पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही हैं, जो भविष्य में वैश्विक आर्थिक संतुलन को बदल सकता है।

इस व्यवस्था में कच्चे तेल की भूमिका सबसे महत्वपूर्ण है। चीन, ईरान से भारी छूट पर कच्चा तेल खरीदता है। इस तेल का भुगतान अमेरिकी डॉलर के बजाय चीनी युआन (RMB) में या फिर बार्टर (वस्तु-विनिमय) प्रणाली के माध्यम से किया जाता है। इसके बदले में, चीन ईरान को मशीनरी, इलेक्ट्रॉनिक्स, ऑटो पार्ट्स और अन्य आवश्यक वस्तुएं निर्यात करता है। इस तरह, ईरान को अपनी अर्थव्यवस्था को चालू रखने के लिए आवश्यक वस्तुएं मिल जाती हैं और चीन को अपनी ऊर्जा सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए सस्ता तेल मिल जाता है।

यह नेटवर्क दर्शाता है कि जब दो बड़ी आर्थिक और रणनीतिक शक्तियां आपस में सहयोग करने का निर्णय लेती हैं, तो एकतरफा प्रतिबंधों की प्रभावशीलता बेहद सीमित हो जाती है। यह डॉलर के प्रभुत्व के खिलाफ एक नई आर्थिक व्यवस्था की शुरुआत है।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: चीन-ईरान आर्थिक धुरी का उदय

साल 2018 में जब संयुक्त राज्य अमेरिका ने तत्कालीन राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के नेतृत्व में ईरान परमाणु समझौते (JCPOA) से खुद को अलग कर लिया और तेहरान पर 'अधिकतम दबाव' (Maximum Pressure) की नीति के तहत कड़े प्रतिबंध लगाए, तब ईरान की अर्थव्यवस्था गंभीर संकट में आ गई थी। ऐसे समय में, चीन ईरान के लिए सबसे बड़ा आर्थिक सहारा बनकर उभरा। 2021 में दोनों देशों ने 25 साल के व्यापक रणनीतिक सहयोग समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिसने इस गुप्त व्यापारिक नेटवर्क को और अधिक संस्थागत रूप प्रदान किया।

इस समझौते के तहत चीन ने ईरान के ऊर्जा, बुनियादी ढांचे और सुरक्षा क्षेत्रों में 400 अरब डॉलर के निवेश का वादा किया था। हालांकि आधिकारिक तौर पर इस निवेश की गति धीमी दिखती है, लेकिन पर्दे के पीछे चलने वाला अनौपचारिक व्यापार तेजी से बढ़ा है। नीचे दी गई तालिका में आधिकारिक और अनौपचारिक व्यापारिक चैनलों के बीच के अंतर को स्पष्ट किया गया है:

विशेषताआधिकारिक स्वीकृत चैनलप्रतिबंध-उल्लंघन गुप्त तंत्र
मुख्य मुद्राअमेरिकी डॉलर (पूरी तरह से प्रतिबंधित)चीनी युआन (RMB) / वस्तु-विनिमय (Barter)
वित्तीय मध्यस्थस्वीफ्ट-अनुरूप वैश्विक बैंकपंजीकृत मुखौटा कंपनियां और स्थानीय क्लियरिंगहाउस
पारदर्शिता स्तरउच्च (अमेरिकी निगरानी के अधीन)अत्यंत निम्न (बहु-स्तरीय शेल कंपनियों के पीछे छिपा हुआ)
क्या आप जानते हैं?: ईरान से चीन को निर्यात होने वाले तेल का एक बड़ा हिस्सा अक्सर समुद्र में ही 'शिप-टू-शिप' ट्रांसफर के जरिए अन्य देशों के तेल के रूप में री-ब्रांड कर दिया जाता है ताकि प्रतिबंधों से बचा जा सके।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: चीन और ईरान प्रतिबंधों से बचने के लिए किस मुद्रा का उपयोग करते हैं?
उत्तर: वे मुख्य रूप से चीनी युआन (RMB) का उपयोग करते हैं या फिर सीधे तौर पर कच्चे तेल के बदले वस्तुओं के आयात-निर्यात (बार्टर सिस्टम) का सहारा लेते हैं।

प्रश्न 2: अमेरिकी ट्रेजरी विभाग (OFAC) इस नेटवर्क को रोकने में असमर्थ क्यों है?
उत्तर: क्योंकि यह नेटवर्क कई देशों में फैली शेल कंपनियों और अनौपचारिक बैंकिंग प्रणालियों (जैसे हवाला) का उपयोग करता है, जो अमेरिकी बैंकिंग प्रणाली और डॉलर के अधिकार क्षेत्र से बाहर काम करते हैं।