संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस नई दिल्ली में आयोजित होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में शामिल होंगे, जहां वे बहुपक्षवाद और सुरक्षा परिषद में सुधारों की वकालत करेंगे। गुटेरेस 13 सितंबर को ओपन सेशन को संबोधित करेंगे और बताएंगे कि आज की वैश्विक वास्तविकताओं के अनुसार वैश्विक संस्थाओं को बदलना अनिवार्य है।
- यूएन महासचिव एंटोनियो गुटेरेस 12-13 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में होने वाले 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे।
- गुटेरेस ओपन सेशन में 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता' विषय पर भाषण देंगे और यूएनएससी सुधारों का समर्थन करेंगे।
- साल 2026 के लिए ब्रिक्स की अध्यक्षता कर रहा भारत लंबे समय से संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता की मांग कर रहा है।
संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस 10 सितंबर, 2026 को भारत की राजधानी नई दिल्ली पहुंचेंगे। वह 12-13 सितंबर को आयोजित होने वाले ऐतिहासिक 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन (18th BRICS Summit) में हिस्सा लेंगे। इस सम्मेलन के दौरान, यूएन प्रमुख बहुपक्षवाद को बढ़ावा देने और संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) जैसी वैश्विक संस्थाओं में समकालीन वास्तविकताओं के अनुसार सुधार करने की आवश्यकता पर विशेष बल देंगे।
गुटेरेस को 13 सितंबर को होने वाले ओपन सेशन को संबोधित करने के लिए आमंत्रित किया गया है, जिसका मुख्य विषय 'लचीलापन, नवाचार, सहयोग और स्थिरता: समावेशी वैश्विक विकास के लिए भविष्य को आकार देना' रखा गया है। संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय में आयोजित दैनिक प्रेस वार्ता के दौरान प्रवक्ता स्टीफन दुजारिक ने बताया कि महासचिव इस बात को रेखांकित करेंगे कि आज की आर्थिक, जनसांख्यिकीय और भू-राजनीतिक परिस्थितियां 1945 जैसी नहीं हैं, और ब्रिक्स देश इस बदलती वास्तविकता का प्रतिनिधित्व करते हैं।
Why This Matters
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स जैसे मंच पर संयुक्त राष्ट्र प्रमुख द्वारा ढांचागत सुधारों की बात करना ग्लोबल साउथ (Global South) के बढ़ते प्रभाव को दर्शाता है। पश्चिमी देशों के दबदबे वाले वित्तीय और राजनीतिक संस्थानों के सामने खड़े प्रासंगिकता के संकट के बीच, ब्रिक्स उभरती अर्थव्यवस्थाओं को अपनी ताकत दिखाने का एक मजबूत विकल्प देता है। गुटेरेस की उपस्थिति यह साबित करती है कि संयुक्त राष्ट्र को भी समय के साथ खुद को बदलना होगा।
"संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद का पुराना ढांचा अब वैश्विक शक्ति के वास्तविक संतुलन को नहीं दर्शाता है। इसमें सुधार केवल निष्पक्षता का मामला नहीं है, बल्कि बहुपक्षवाद के अस्तित्व के लिए भी आवश्यक है।"
भारत, जिसने 1 जनवरी, 2026 को चौथी बार ब्रिक्स की अध्यक्षता संभाली है, लंबे समय से यूएनएससी में स्थायी सीट की मांग कर रहा है। नई दिल्ली का तर्क है कि भारत जैसे बड़े देशों को सुरक्षा परिषद के स्थायी प्रतिनिधित्व से बाहर रखना इस वैश्विक संस्था की प्रभावशीलता को कमजोर करता है। यह शिखर सम्मेलन ब्रिक्स की स्थापना के 20 साल पूरे होने के अवसर पर हो रहा है, जो भारत को अपनी कूटनीतिक प्राथमिकताओं को आगे बढ़ाने का सुनहरा अवसर देता है।
| विशेषता | यूएन ढांचा (1945) | वैश्विक वास्तविकता (2026) |
|---|---|---|
| भू-राजनीतिक फोकस | द्वितीय विश्व युद्ध के विजेता देशों का दबदबा | ग्लोबल साउथ के उभार के साथ बहुध्रुवीय दुनिया |
| आर्थिक इंजन | पश्चिमी यूरोप और उत्तरी अमेरिका | ब्रिक्स और उभरती हुई अर्थव्यवस्थाएं |
| सुरक्षा चुनौतियां | पारंपरिक युद्ध और दो देशों के बीच संघर्ष | साइबर सुरक्षा, एआई, जलवायु परिवर्तन और आर्थिक संकट |
अपने मुख्य संबोधन के अलावा, गुटेरेस भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और सम्मेलन में भाग लेने वाले अन्य वैश्विक नेताओं के साथ द्विपक्षीय बैठकें करेंगे। इस शिखर सम्मेलन में पश्चिम एशिया संकट के आर्थिक प्रभावों और कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) के सुरक्षित उपयोग जैसी गंभीर वैश्विक चुनौतियों पर भी गहन चर्चा होने की उम्मीद है।
Frequently Asked Questions
Q1: संयुक्त राष्ट्र महासचिव ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में क्यों शामिल हो रहे हैं?
एंटोनियो गुटेरेस ग्लोबल साउथ के नेताओं के साथ जुड़ने और वैश्विक शासन प्रणालियों में सुधारों की वकालत करने के लिए शामिल हो रहे हैं, ताकि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद समकालीन वास्तविकताओं को दर्शा सके।
Q2: 2026 ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत का मुख्य एजेंडा क्या है?
अध्यक्ष के रूप में, भारत का उद्देश्य वैश्विक लचीलापन और स्थिरता पर सहयोग बढ़ाना और सुरक्षा परिषद में अपनी स्थायी सदस्यता के दावे को मजबूत करना है।