पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव और यूक्रेन युद्ध के बीच इस सप्ताहांत ब्रिक्स शिखर सम्मेलन आयोजित होने जा रहा है, जिसमें रणनीतिक रक्षा और शांति प्रयासों पर चर्चा होगी।
- पीएम मोदी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन और राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।
- यूक्रेन शांति पहल और पश्चिम एशिया में स्थिरता मुख्य एजेंडा होंगे।
- ब्रह्मोस मिसाइल के नए सौदे और भारत के AMCA प्रोजेक्ट पर चर्चा की संभावना।
जब दुनिया कई प्रणालीगत संकटों के कगार पर खड़ी है, तब आगामी ब्रिक्स शिखर सम्मेलन ग्लोबल साउथ के लिए एक निर्णायक मोड़ साबित होगा। यह बैठक ऐसे समय में हो रही है जब यूक्रेन संघर्ष और पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव ने वैश्विक भू-राजनीतिक परिदृश्य को खंडित कर दिया है।
प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ उच्च-स्तरीय चर्चा करेंगे। सूत्रों के अनुसार, इस संवाद का केंद्र न केवल पूर्वी यूरोप में युद्धविराम होगा, बल्कि नई दिल्ली और मॉस्को के बीच रणनीतिक साझेदारी को और मजबूत करना भी होगा। भारत में राष्ट्रपति पुतिन का आगमन पश्चिमी देशों के लिए एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक संकेत है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह शिखर सम्मेलन केवल आर्थिक सहयोग के बारे में नहीं है, बल्कि एक नई सुरक्षा संरचना स्थापित करने के बारे में है। विभिन्न विचारधाराओं के नेताओं को एक साथ लाकर, ब्रिक्स खुद को वैश्विक संघर्षों में प्राथमिक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है।
पश्चिम एशिया की अस्थिरता के दौरान ब्रिक्स नेताओं का यह जमावड़ा क्षेत्रीय पतन को रोकने के एक समन्वित प्रयास का संकेत है।
भारत-रूस संबंधों में रक्षा सहयोग हमेशा से एक आधारशिला रहा है। एक नए ब्रह्मोस मिसाइल सौदे को लेकर काफी चर्चा है, जो दोनों देशों के बीच सैन्य तालमेल को और गहरा करेगा। हालांकि, विश्लेषक रूस के Su-57 स्टील्थ फाइटर का भारत के स्वदेशी AMCA (एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट) कार्यक्रम पर पड़ने वाले प्रभाव पर भी सवाल उठा रहे हैं।
रूस के अलावा, ईरान के राष्ट्रपति पेज़ेशकियन के साथ बैठक में मध्य पूर्व के मानवीय और सुरक्षा संकटों पर चर्चा होने की उम्मीद है। भारत एक 'ब्रिज पावर' के रूप में अपनी भूमिका निभा रहा है, जहाँ वह अमेरिका और पश्चिम के साथ संबंधों को संतुलित करते हुए ब्रिक्स सदस्यों के साथ गहरे रणनीतिक संबंध बनाए हुए है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: मोदी-पुतिन बैठक का प्राथमिक लक्ष्य क्या है?
उत्तर 1: प्राथमिक लक्ष्य यूक्रेन के लिए शांति रोडमैप पर चर्चा करना और मिसाइल सौदों सहित रणनीतिक रक्षा सहयोग को बढ़ाना है।
प्रश्न 2: Su-57 भारत के AMCA को कैसे प्रभावित करता है?
उत्तर 2: यह चिंता जताई जा रही है कि Su-57 जैसी उन्नत रूसी तकनीक की उपलब्धता भारत के अपने स्टील्थ फाइटर प्रोजेक्ट की आवश्यकता या डिजाइन को प्रभावित कर सकती है।