राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी के नेतृत्व में पेरू ने अपराध और ड्रग तस्करी के खिलाफ आक्रामक रणनीति अपनाने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले सुरक्षा गठबंधन 'शील्ड ऑफ द अमेरिकाज' में शामिल होने का फैसला किया है।
- पेरू ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करने और सैन्य सहयोग के लिए 'शील्ड ऑफ द अमेरिकाज' (ACCC) में शामिल हुआ।
- राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी ने अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बैठक के बाद इस निर्णय की घोषणा की।
- इस गठबंधन ने अमेरिकी सैन्य प्रभाव और चीन के साथ पेरू की आर्थिक निर्भरता को लेकर चिंताएं बढ़ा दी हैं।
- पेरू दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोकीन उत्पादक और तीसरा सबसे बड़ा तांबा उत्पादक है।
राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने की दिशा में एक बड़े कदम के रूप में, पेरू आधिकारिक तौर पर "शील्ड ऑफ द अमेरिकाज" में शामिल हो गया है। यह संयुक्त राज्य अमेरिका के नेतृत्व वाला एक क्षेत्रीय सुरक्षा गठबंधन है, जिसे औपचारिक रूप से अमेरिकाज काउंटर कार्टेल गठबंधन (ACCC) के नाम से जाना जाता है। इसका मुख्य उद्देश्य ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करना और सैन्य अभियानों में सहयोग करना है।
हाल ही में निर्वाचित दक्षिणपंथी नेता और राष्ट्रपति केइको फुजीमोरी ने लीमा में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रुबियो के साथ बातचीत के बाद इस फैसले की घोषणा की। फुजीमोरी ने कहा कि आतंकवाद से लड़ने के अपने पिछले अनुभव के कारण वे जानती हैं कि आज के संगठित अपराध का सामना करना कितना कठिन है। इस अवसर पर, पेरू सरकार ने मार्को रुबियो को देश के सर्वोच्च नागरिक सम्मानों में से एक, 'ऑर्डर ऑफ द सन' से सम्मानित किया।
यह क्यों महत्वपूर्ण है?
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक सुरक्षा समझौता नहीं है, बल्कि एक सोची-समझी भू-राजनीतिक चाल है। पेरू को ACCC में शामिल करके, अमेरिका दक्षिण अमेरिका में एक ऐसा 'सुरक्षा गलियारा' बनाना चाहता है जो उन अंतरराष्ट्रीय आपराधिक समूहों को चुनौती दे सके जिनके पास कई राज्यों से अधिक धन और सैन्य उपकरण हैं। साथ ही, यह कदम क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव, विशेष रूप से चांकाय (Chancay) मेगा-पोर्ट के नियंत्रण को कम करने की एक कोशिश है।
"शील्ड ऑफ द अमेरिकाज ड्रग कंट्रोल के पारंपरिक तरीकों से हटकर कार्टेल्स से राज्य की संप्रभुता वापस लेने के लिए एक आक्रामक सैन्य रणनीति की ओर बदलाव है।"
हालांकि, इस कदम का पेरू के भीतर कड़ा विरोध भी देखने को मिला है। लीमा में प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि पेरू किसी का उपनिवेश नहीं है और वे अमेरिकी सैन्य प्रभाव के कारण अपनी संप्रभुता खोने से डरते हैं। यह डर लातिन अमेरिका में अमेरिका के पिछले हस्तक्षेपों और मानवाधिकार उल्लंघन के आरोपों वाले दक्षिणपंथी नेताओं के समर्थन के इतिहास से उपजा है।
सुरक्षा के अलावा, आर्थिक हित भी इस गठबंधन का एक बड़ा हिस्सा हैं। पेरू दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तांबा उत्पादक है, जो वैश्विक तकनीकी और ऊर्जा बाजार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। ट्रंप प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि "सस्ता चीनी पैसा संप्रभुता की कीमत पर आता है" और पेरू को बीजिंग से दूरी बनाने की सलाह दी है। इसी क्रम में, अमेरिका ने पेरू को एक प्रमुख गैर-नाटो सहयोगी घोषित किया है और कालाओ नेवल बेस के लिए 1.5 बिलियन डॉलर की सैन्य बिक्री को मंजूरी दी है।
| विशेषता | पिछला दृष्टिकोण | नया 'शील्ड' गठबंधन |
|---|---|---|
| सुरक्षा दृष्टिकोण | पारंपरिक पुलिसिंग | सैन्य-नेतृत्व वाले खुफिया अभियान |
| प्रमुख वैश्विक सहयोगी | संतुलित (अमेरिका/चीन) | अमेरिका की ओर मजबूत झुकाव |
| रणनीतिक फोकस | आर्थिक व्यापार | काउंटर-कार्टेल और संप्रभुता |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
'शील्ड ऑफ द अमेरिकाज' क्या है?
यह अमेरिका के नेतृत्व वाला एक गठबंधन (ACCC) है, जिसका उद्देश्य ड्रग कार्टेल्स के खिलाफ खुफिया जानकारी साझा करना और सैन्य अभियान चलाना है।
इस सुरक्षा सौदे में चीन का जिक्र क्यों है?
अमेरिका पेरू में चीन के बढ़ते आर्थिक प्रभाव, विशेष रूप से चांकाय पोर्ट के निर्माण से चिंतित है और चाहता है कि पेरू चीन पर अपनी निर्भरता कम करे।