दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूक्लल ने वैश्विक संस्थाओं के संकट के बीच BRICS को ग्लोबल साउथ की शक्ति के रूप में पेश किया है। उन्होंने जोर दिया कि इस समूह की सफलता इसकी डिलीवरी और परिणामों से मापी जानी चाहिए।

  • दक्षिण अफ्रीकी envoy ने वर्तमान अंतरराष्ट्रीय स्थिति को 'वैश्विक अव्यवस्था' (Global Disorder) करार दिया।
  • BRICS की सफलता का पैमाना बैठकों की संख्या नहीं, बल्कि ठोस परिणाम होने चाहिए।
  • भारत के G20 সভাপতিত্ব को ग्लोबल साउथ के नेतृत्व क्षमता का एक उत्कृष्ट उदाहरण बताया गया।

नई दिल्ली में आयोजित इंडिया टुडे के BRICS राउंडटेबल, जिसका विषय 'अफ्रीका राइजिंग: BRICS नेक्स्ट फ्रंटियर' था, में दक्षिण अफ्रीका के उच्चायुक्त अनिल सूक्लल ने अंतरराष्ट्रीय राजनीति के बदलते समीकरणों पर गहरी चिंता और उम्मीद व्यक्त की। सूक्लल ने स्पष्ट किया कि दुनिया वर्तमान में एक ऐसी स्थिति से गुजर रही है जहाँ पुराने वैश्विक ढांचे चरमरा रहे हैं और एक नई व्यवस्था की आवश्यकता है।

सूक्लल ने तर्क दिया कि BRICS अब केवल एक चर्चा समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह दुनिया के उन नए प्रभाव केंद्रों में से एक बन गया है जो पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से उल्लेख किया कि संयुक्त राष्ट्र (UN), विश्व व्यापार संगठन (WTO), विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) और UNESCO जैसी संस्थाएं वर्तमान चुनौतियों का सामना करने में विफल रही हैं, जिससे एक 'वैश्विक अव्यवस्था' पैदा हुई है।

Why This Matters

BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, यह बयान इस बात की पुष्टि करता है कि ग्लोबल साउथ अब केवल विकसित देशों के निर्देशों का पालन नहीं करना चाहता, बल्कि वैश्विक शासन (Global Governance) में अपनी निर्णायक भूमिका चाहता है। BRICS का विस्तार और इसकी बढ़ती सक्रियता यह दर्शाती है कि आर्थिक और राजनीतिक शक्ति का केंद्र अब पश्चिम से पूर्व और दक्षिण की ओर खिसक रहा है।

"ग्लोबल साउथ यह संदेश देने में सक्षम है कि वह वैश्विक स्तर पर शक्ति और परिणाम देने की क्षमता रखता है।"

भारत की भूमिका पर चर्चा करते हुए, सूक्लल ने भारत द्वारा G20 शिखर सम्मेलन की सफल मेजबानी की सराहना की। उन्होंने कहा कि जिस तरह भारत ने परस्पर विरोधी विचारधारा वाले देशों को एक मेज पर लाकर सहमति बनाई, वह यह साबित करता है कि खंडित दुनिया में भी नेतृत्व संभव है। यह मॉडल BRICS के लिए भी एक प्रेरणा हो सकता है।

सदस्य देशों के बीच आपसी मतभेदों पर बात करते हुए, उन्होंने एक व्यावहारिक दृष्टिकोण अपनाने का सुझाव दिया। सूक्लल के अनुसार, BRICS के सदस्यों को अपने द्विपक्षीय विवादों को समूह के व्यापक एजेंडे से अलग रखना चाहिए। यदि सदस्य देश अपने व्यक्तिगत मतभेदों को किनारे रखकर साझा आर्थिक और रणनीतिक लक्ष्यों पर ध्यान केंद्रित करें, तो यह समूह दुनिया की सबसे शक्तिशाली आर्थिक इकाई बन सकता है।

क्या आप जानते हैं?: BRICS की शुरुआत मूल रूप से केवल चार देशों (ब्राजील, रूस, भारत और चीन) से हुई थी, लेकिन अब इसमें दक्षिण अफ्रीका और कई नए सदस्य शामिल हो चुके हैं, जिससे इसकी वैश्विक पहुंच कई गुना बढ़ गई है।

Frequently Asked Questions

1. अनिल सूक्लल ने 'वैश्विक अव्यवस्था' से क्या तात्पर्य किया?
उनका तात्पर्य अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं (जैसे UN, WTO) की घटती प्रभावशीलता और दुनिया में बढ़ते भू-राजनीतिक तनावों से था।

2. BRICS की सफलता को कैसे मापा जाना चाहिए?
सूक्लल के अनुसार, इसकी सफलता बैठकों की संख्या से नहीं, बल्कि इस बात से मापी जानी चाहिए कि यह समूह अपने सदस्यों और दुनिया के लिए क्या ठोस परिणाम डिलीवर करता है।