अमेरिकी पेंटागन में 9/11 हमलों की 25वीं बरसी पर भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने श्रद्धांजलि अर्पित की और आतंकवाद को जड़ से मिटाने के लिए भारत-अमेरिका की अटूट साझेदारी पर जोर दिया।
- भारतीय राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने पेंटागन में 9/11 पीड़ितों को श्रद्धांजलि दी।
- भारत ने आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को दोहराया।
- पहलगाम हमले का जिक्र करते हुए सीमा पार आतंकवाद पर कड़ा प्रहार किया गया।
- आतंकवाद के खिलाफ भारत-अमेरिका की रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।
वॉशिंगटन स्थित पेंटागन में 9/11 के विनाशकारी आतंकवादी हमलों की 25वीं बरसी के अवसर पर भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने राष्ट्रीय 9/11 स्मारक पर अपनी श्रद्धांजलि अर्पित की। इस भावुक और गंभीर अवसर पर, उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत और संयुक्त राज्य अमेरिका आतंकवाद के पूर्ण विनाश तक अपनी ताकत और संकल्प को एकजुट रखेंगे।
राजदूत क्वात्रा ने उन निर्दोष लोगों को याद किया जिन्होंने 2001 के हमलों में अपनी जान गंवाई। उन्होंने कहा, "आज से 25 साल पहले, आतंकवादियों ने संयुक्त राज्य अमेरिका पर हमला किया था। हम आज पीड़ितों को याद करते हैं और उनके परिवारों को अपनी प्रार्थनाओं में रखते हैं।" उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि आतंकवाद ने दुनिया भर में अनगिनत मासूमों की जान ली है और यह मानवता के विरुद्ध सबसे बड़ा अपराध है।
अपने संबोधन में, उन्होंने आतंकवाद के समर्थकों और प्रायोजकों की कड़ी निंदा करते हुए कहा कि जो लोग आतंकवाद को बढ़ावा देते हैं, वे हमारी साझा मानवता की हर अच्छी और सभ्य चीज के खिलाफ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि ऐसे तत्व करुणा, गरिमा और स्वयं सभ्यता के विरुद्ध कार्य करते हैं।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह दौरा केवल एक औपचारिक श्रद्धांजलि नहीं है, बल्कि एक रणनीतिक संकेत है। भारत द्वारा पहलगाम (जम्मू और कश्मीर) में हुए हालिया हमलों का जिक्र करना यह दर्शाता है कि भारत चाहता है कि अमेरिका सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर वैश्विक दबाव बढ़ाए। यह साझा संकल्प वैश्विक सुरक्षा ढांचे को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
आतंकवाद का कोई धर्म या देश नहीं होता, लेकिन इसे पालने वाले देशों को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग करना ही एकमात्र समाधान है।
भारत ने लंबे समय से सीमा पार आतंकवाद का सामना किया है और वह इस लड़ाई में दुनिया के अग्रणी देशों में रहा है। राजदूत क्वात्रा ने स्पष्ट किया कि भारत की नीति आतंकवाद के सभी रूपों और अभिव्यक्तियों के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की है। उन्होंने पिछले वर्ष पहलगाम में 26 नागरिकों की हत्या का उल्लेख किया, जिन्हें सीमा पार प्रशिक्षित और आश्रय दिए गए आतंकवादियों ने निशाना बनाया था।
ऐतिहासिक रूप से, 11 सितंबर 2001 को अल-कायदा ने न्यूयॉर्क और वॉशिंगटन में समन्वित आत्मघाती हमले किए थे। एक चौथा हमला तब विफल रहा जब यात्रियों और चालक दल ने अपहरणकर्ताओं का मुकाबला किया, जिससे विमान पेंसिल्वेनिया के एक खुले मैदान में दुर्घटनाग्रस्त हो गया। आज 25 साल बाद, भारत और अमेरिका का यह साथ यह संदेश देता है कि दुनिया अब आतंकवाद के सामने झुकने वाली नहीं है।
Frequently Asked Questions
1. भारतीय राजदूत ने पेंटागन में किस मुख्य मुद्दे पर जोर दिया?
राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने आतंकवाद के खिलाफ भारत और अमेरिका के साझा संकल्प और 'जीरो टॉलरेंस' नीति पर जोर दिया।
उन्होंने जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए हमले का जिक्र किया जिसमें 26 निर्दोष नागरिक मारे गए थे।