नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सकारात्मक परिणामों के प्रति विश्वास व्यक्त किया है। वैश्विक तनाव के बीच उभरती अर्थव्यवस्थाएं पश्चिम के विकल्प की तलाश कर रही हैं।
- प्रधानमंत्री मोदी ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में सार्थक और सकारात्मक चर्चाओं पर भरोसा जताया।
- नई दिल्ली 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी कर रहा है, जिसमें वैश्विक नेता शामिल हुए हैं।
- सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य पश्चिम के प्रभुत्व वाले वैश्विक ढांचे का एक प्रभावी विकल्प खोजना है।
- रूस-यूक्रेन युद्ध और अन्य क्षेत्रीय संघर्ष सदस्य देशों के बीच वैचारिक मतभेद पैदा कर रहे हैं।
भारत की राजधानी नई दिल्ली वर्तमान में दुनिया के सबसे प्रभावशाली नेताओं की मेजबानी कर रही है। 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन की शुरुआत के साथ ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विश्वास व्यक्त किया है कि यह बैठक न केवल सकारात्मक होगी, बल्कि वैश्विक शासन में सुधार लाने की दिशा में सार्थक कदम उठाएगी।
इस शिखर सम्मेलन का आयोजन ऐसे समय में हो रहा है जब दुनिया गहरे भू-राजनीतिक विभाजन का सामना कर रही है। चीन, रूस और भारत जैसे देश एक ऐसी बहुध्रुवीय दुनिया (Multipolar World) का निर्माण करना चाहते हैं जहाँ निर्णय लेने की शक्ति केवल पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका और यूरोपीय संघ, के पास न हो।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह सम्मेलन भारत के लिए अपनी 'रणनीतिक स्वायत्तता' (Strategic Autonomy) को प्रदर्शित करने का एक सुनहरा अवसर है। भारत एक पुल की तरह काम कर रहा है, जो एक तरफ वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज उठा रहा है और दूसरी तरफ विकसित अर्थव्यवस्थाओं के साथ अपने संबंधों को संतुलित कर रहा है।
"ब्रिक्स अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं, बल्कि एक राजनीतिक विकल्प बन चुका है जो वैश्विक वित्तीय प्रणालियों के वि-डॉलरकरण (De-dollarization) की वकालत करता है।"
हालांकि, चुनौतियां कम नहीं हैं। सदस्य देशों के बीच आपसी मतभेद, विशेष रूप से चीन और भारत के बीच सीमा विवाद और रूस-यूक्रेन युद्ध पर अलग-अलग दृष्टिकोण, इस समूह की एकजुटता के सामने सबसे बड़ी बाधा हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि: ब्रिक्स की शुरुआत 2006 में ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका के बीच एक अनौपचारिक समूह के रूप में हुई थी। समय के साथ, इसने खुद को एक शक्तिशाली आर्थिक ब्लॉक के रूप में स्थापित किया है, जो वैश्विक जीडीपी के एक महत्वपूर्ण हिस्से का प्रतिनिधित्व करता है।
| पहलू | पश्चिमी गठबंधन (G7) | ब्रिक्स (BRICS) |
|---|---|---|
| मुख्य फोकस | उन्नत अर्थव्यवस्थाएं और सुरक्षा | उभरती अर्थव्यवस्थाएं और विकास |
| दृष्टिकोण | नियम-आधारित व्यवस्था (पश्चिमी नेतृत्व) | बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था |
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026 का मुख्य एजेंडा क्या है?
उत्तर: मुख्य एजेंडा वैश्विक शासन में सुधार, व्यापार विस्तार, और पश्चिमी प्रभुत्व के विकल्प के रूप में एक नई आर्थिक व्यवस्था बनाना है।
प्रश्न 2: इस सम्मेलन में भारत की भूमिका क्या है?
उत्तर: भारत मेजबान के रूप में ग्लोबल साउथ के हितों का प्रतिनिधित्व कर रहा है और सदस्य देशों के बीच आम सहमति बनाने का प्रयास कर रहा है।