नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दूसरे दिन, प्रधानमंत्री मोदी ने वैश्विक दक्षिण के देशों के बढ़ते विश्वास पर जोर दिया। इस दौरान कई द्विपक्षीय बैठकें हुईं और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग सहित कई नेता दिल्ली से रवाना हुए।

  • प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि वैश्विक दक्षिण (Global South) का भारत पर भरोसा बढ़ा है।
  • कजाकिस्तान के राष्ट्रपति तोकायेव और मिस्र के नेताओं के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता हुई।
  • चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और इथियोपिया के प्रधानमंत्री सम्मेलन के बाद दिल्ली से रवाना हुए।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का दूसरा दिन कूटनीतिक हलचलों से भरा रहा। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक मंच पर भारत की बढ़ती भूमिका को रेखांकित करते हुए कहा कि 'ग्लोबल साउथ' के देशों का भारत पर विश्वास और भरोसा पहले से कहीं अधिक मजबूत हुआ है। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया बहुध्रुवीय व्यवस्था की ओर बढ़ रही है।

सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने कजाकिस्तान के राष्ट्रपति कस्यम-जोमार्ट तोकायेव के साथ एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय बैठक की। इसके अलावा, उन्होंने मिस्र और फिलीपींस के नेताओं के साथ भी गहन चर्चा की, जो भारत के रणनीतिक संबंधों को विस्तार देने की दिशा में एक बड़ा कदम है। इन वार्ताओं का मुख्य उद्देश्य व्यापार, सुरक्षा और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देना था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि ब्रिक्स का विस्तार और भारत की सक्रिय भागीदारी वैश्विक शक्ति संतुलन को बदल रही है। भारत न केवल एक प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में उभर रहा है, बल्कि वह विकासशील देशों की आवाज बनकर भी सामने आ रहा है।

भारत का नेतृत्व वैश्विक दक्षिण के लिए एक सेतु का काम कर रहा है, जो विकसित और विकासशील दुनिया के बीच की खाई को पाट सकता है।

सम्मेलन के दूसरे दिन कई महत्वपूर्ण नेताओं का आगमन और प्रस्थान भी देखा गया। बहरीन के विदेश मंत्री अल ज़यानी और सऊदी अरब के विदेश मंत्री भी नई दिल्ली पहुंचे, जिससे क्षेत्रीय सहयोग की नई संभावनाएं खुलीं। वहीं, चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग और इथियोपिया के प्रधानमंत्री के दिल्ली से प्रस्थान ने इस शिखर सम्मेलन के एक महत्वपूर्ण चरण के समापन का संकेत दिया।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

ब्रिक्स (BRICS) समूह का गठन उभरती अर्थव्यवस्थाओं के बीच सहयोग बढ़ाने के लिए किया गया था। समय के साथ, इसमें नए सदस्यों का शामिल होना और भारत की केंद्रीय भूमिका ने इसे वैश्विक भू-राजनीति का एक अनिवार्य हिस्सा बना दिया है।

Did You Know?: ब्रिक्स समूह का उद्देश्य वैश्विक वित्तीय संस्थानों में सुधार लाना और विकासशील देशों को अधिक आवाज देना है।

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक और सांस्कृतिक सहयोग को मजबूत करना है।

2. 'ग्लोबल साउथ' से क्या तात्पर्य है?
यह शब्द उन विकासशील और कम विकसित देशों के लिए उपयोग किया जाता है जो वैश्विक नीति निर्धारण में अधिक प्रतिनिधित्व चाहते हैं।