वेनिस फिल्म फेस्टिवल में 'NAZA' डॉक्यूमेंट्री ने दर्शकों को झकझोर कर रख दिया, जिसमें गाजा में फिलिस्तीनियों को निशाना बनाने के लिए इजरायली सेना द्वारा AI प्रणालियों के उपयोग का खुलासा किया गया है।
- 'NAZA' फिल्म गाजा में टारगेट तय करने के लिए 'लैवेंडर' जैसे AI सिस्टम के उपयोग का पर्दाफाश करती है।
- फिल्म में इजरायली सैन्य और खुफिया सूत्रों के गुमनाम बयानों को शामिल किया गया है।
- निर्देशक युवल अब्राहम और राचेल ज़ोर का दावा है कि नागरिक मौतें पूर्व-नियोजित और गणनात्मक थीं।
83वें वेनिस फिल्म फेस्टिवल में एक ऐसा क्षण आया जब पूरा हॉल सन्न रह गया और उसके बाद 25 मिनट तक तालियों की गड़गड़ाहट गूंजती रही। यह सम्मान डॉक्यूमेंट्री 'NAZA' को मिला, जिसने गाजा संघर्ष में इजरायली सेना द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के एकीकरण की भयावह सच्चाई को दुनिया के सामने रखा है। ऑस्कर विजेता युवल अब्राहम और राचेल ज़ोर द्वारा निर्देशित यह फिल्म युद्ध के व्यवस्थित स्वरूप पर एक बड़ा प्रहार है।
यह फिल्म लगभग तीन साल की गहन जांच का परिणाम है। अपनी पहचान गुप्त रखने के लिए, इजरायली सैन्य और खुफिया अधिकारियों को तेल अवीव की छतों पर रात के समय फिल्माया गया, और उनकी आवाज़ों व चेहरों को डिजिटल रूप से बदल दिया गया। ये सूत्र युद्ध की मशीनी प्रक्रिया का ऐसा विवरण देते हैं जो सैन्य रणनीति कम और औद्योगिक हत्या का कारखाना अधिक लगता है।
'लैवेंडर' प्रणाली की कार्यप्रणाली
फिल्म का मुख्य केंद्र 'लैवेंडर' नामक एक AI-सहायता प्राप्त प्रणाली है। यह सिस्टम गाजा के दूरसंचार नेटवर्क—फोन कॉल, आवाजाही और बातचीत—की निगरानी करता है ताकि हत्या के लक्ष्यों (टारगेट्स) की पहचान की जा सके। फिल्म का शीर्षक 'NAZA' वास्तव में एक हिब्रू खुफिया शब्द है, जिसका उपयोग यह बताने के लिए किया जाता है कि किसी हवाई हमले में कितने नागरिकों के मारे जाने की आशंका है।
फिल्म में एक साक्षात्कार देने वाला व्यक्ति इस पूरी प्रक्रिया की तुलना एक "फैक्ट्री" से करता है, जबकि एक अन्य व्यक्ति, जो लक्ष्यों की पहचान करने में शामिल था, कहता है कि यह "वीडियो गेम की तरह" था क्योंकि सब कुछ रिमोटली किया जाता था और यह "अत्यधिक मजेदार" था। यह बयान युद्ध के मानवीय पक्ष के प्रति एक भयानक उदासीनता को दर्शाता है।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण के अनुसार, 'NAZA' गाजा संघर्ष के विमर्श को 'संपार्श्विक क्षति' (collateral damage) से हटाकर 'एल्गोरिदमिक युद्ध' की ओर ले जाती है। आंतरिक सैन्य गवाहों का उपयोग करके, यह फिल्म आधुनिक युद्ध के कानूनी और नैतिक ढांचे को चुनौती देती है और उन पश्चिमी सरकारों पर दबाव डालती है जो इन ऑपरेशनों के लिए तकनीकी और सैन्य बुनियादी ढांचा प्रदान कर रही हैं।
मानव-आधारित खुफिया जानकारी से AI-संचालित टारगेटिंग की ओर बढ़ना वैश्विक युद्ध में एक खतरनाक मिसाल है, जहाँ जवाबदेही को एल्गोरिदम के पीछे छिपा दिया जाता है।
फिल्म निर्माताओं का तर्क है कि गाजा में फिलिस्तीनी नागरिकों की हत्या हमास के खिलाफ युद्ध का कोई "दुखद उप-उत्पाद" नहीं थी, बल्कि एक "पूर्व-नियोजित, गणनात्मक और जानबूझकर किया गया कृत्य" था। स्क्रीन इंटरनेशनल ने इसे एक "अर्जेंट गट-पंच" बताया है, जबकि द हॉलीवुड रिपोर्टर ने कहा कि यह वर्तमान इजरायली शासन के प्रति गहरी घृणा पैदा करती है।
जिम विल्सन और कार्यकारी निर्माता जोनाथन ग्लेज़र (द ज़ोन ऑफ़ इंटरेस्ट के निर्माता) द्वारा निर्मित यह फिल्म ऐसे समय में आई है जब गाजा स्वास्थ्य मंत्रालय के अनुसार, अक्टूबर 2023 से अब तक लगभग 73,500 फिलिस्तीनी मारे जा चुके हैं और 174,500 घायल हुए हैं।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
फिल्म में उल्लेखित 'लैवेंडर' सिस्टम क्या है?
लैवेंडर एक AI-पावर्ड सिस्टम है जिसका उपयोग इजरायली खुफिया एजेंसी गाजा के संचार नेटवर्क से डेटा विश्लेषण कर हत्या के लक्ष्यों को पहचानने के लिए करती है।
फिल्म 'NAZA' के निर्देशक कौन हैं?
इस फिल्म का निर्देशन युवल अब्राहम और राचेल ज़ोर ने किया है, जिन्हें उनके पिछले पुरस्कार विजेता कार्यों के लिए जाना जाता है।