नई दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन के बीच उच्च स्तरीय वार्ता हुई, जिसमें व्यापार, तकनीक और कूटनीति के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊर्जा देने पर जोर दिया गया। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने वैश्विक स्तर पर ईरान के बढ़ते प्रभाव और भारत के साथ सहयोग की इच्छा व्यक्त की।
- भारत और ईरान ने व्यापार, अर्थव्यवस्था और प्रौद्योगिकी में सहयोग बढ़ाने पर सहमति जताई।
- प्रधानमंत्री मोदी ने पश्चिम एशिया में शांति के लिए संवाद और कूटनीति के महत्व को दोहराया।
- राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने अमेरिका और इजरायल की आलोचना करते हुए ईरान की संप्रभुता का बचाव किया।
- BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान यह मुलाकात वैश्विक दक्षिण (Global South) की एकजुटता को दर्शाती है।
भारतीय राजधानी नई दिल्ली में शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटनाक्रम देखने को मिला, जब ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियन ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाकात की। यह यात्रा इसलिए विशेष है क्योंकि 2018 में हसन रूहानी की यात्रा के बाद यह पहली बार है जब कोई ईरानी राष्ट्रपति भारत आया है। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने स्पष्ट किया कि भारत और ईरान मिलकर अपने पुराने संबंधों को पुनर्जीवित कर सकते हैं, जो आने वाले समय में व्यापार और तकनीक के नए द्वार खोलेगा।
द्विपक्षीय वार्ता के बाद, राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने धार्मिक नेताओं और व्यापारिक दिग्गजों के एक समूह को संबोधित किया। उन्होंने भारत की मेहमाननवाज़ी की सराहना करते हुए कहा कि संस्कृति, विज्ञान और अर्थव्यवस्था के क्षेत्र में दोनों देशों के बीच गहरी सहानुभूति और सहयोग की आवश्यकता है। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग नहीं है और वह अपनी पहचान बनाए रखने के लिए प्रतिबद्ध है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, यह मुलाकात केवल द्विपक्षीय संबंधों तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक व्यापक भू-राजनीतिक संदेश है। पश्चिम एशिया में जारी तनाव और अमेरिका-इजरायल के साथ ईरान के संघर्ष के बीच, भारत का संतुलित दृष्टिकोण उसे एक मध्यस्थ के रूप में स्थापित करता है। भारत एक ओर जहां अमेरिका के साथ रणनीतिक साझेदारी रखता है, वहीं दूसरी ओर ईरान के साथ अपने ऐतिहासिक और ऊर्जा संबंधों को बनाए रखना चाहता है।
"भारत की संवाद-आधारित कूटनीति पश्चिम एशिया के अस्थिर वातावरण में एक स्थिरता प्रदान करने वाले स्तंभ के रूप में कार्य कर रही है।"
वार्ता के दौरान, राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने अमेरिका और इजरायल पर कड़ा प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि जो देश मानवाधिकारों की बात करते हैं, वे ही बुनियादी ढांचे और मासूमों को निशाना बना रहे हैं। उन्होंने स्पष्ट शब्दों में कहा कि ईरान किसी के सामने नहीं झुकेगा और अपनी संप्रभुता की रक्षा के लिए हर कदम उठाएगा।
दूसरी ओर, विदेश मंत्रालय (MEA) के अनुसार, प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी निरंतर स्थिति स्पष्ट की कि क्षेत्र की सभी समस्याओं का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। उन्होंने विशेष रूप से समुद्री नेविगेशन की स्वतंत्रता और नाविकों की सुरक्षा पर जोर दिया, क्योंकि होर्मुज जलडमरूमध्य में जहाजों पर हमले भारत के लिए एक गंभीर चिंता का विषय रहे हैं।
इस यात्रा का एक मुख्य केंद्र BRICS शिखर सम्मेलन भी रहा। राष्ट्रपति पेज़ेशकियन ने कहा कि BRICS का मूल उद्देश्य एकपक्षीयता (Unilateralism) का मुकाबला करना है। प्रधानमंत्री मोदी ने चुनौतीपूर्ण परिस्थितियों के बावजूद BRICS बैठकों में ईरान की सक्रिय भागीदारी की सराहना की और इसे ग्लोबल साउथ की मजबूती के लिए आवश्यक बताया।
Frequently Asked Questions
1. राष्ट्रपति पेज़ेशकियन की भारत यात्रा का मुख्य उद्देश्य क्या था?
मुख्य उद्देश्य BRICS शिखर सम्मेलन में भाग लेना और प्रधानमंत्री मोदी के साथ द्विपक्षीय संबंधों को पुनर्जीवित करने पर चर्चा करना था।
2. पश्चिम एशिया के तनाव पर भारत का क्या रुख है?
भारत का मानना है कि सभी विवादों का समाधान युद्ध के बजाय संवाद और कूटनीति के माध्यम से किया जाना चाहिए।