हूती विद्रोहियों द्वारा रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने के बाद सऊदी अरब ने हवाई हमले किए हैं। इस तनाव से बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य और वैश्विक तेल आपूर्ति पर गंभीर खतरा मंडरा रहा है।

  • हूती बलों द्वारा मोखा शहर पर कब्जे के बाद सऊदी अरब ने हवाई अड्डे को निशाना बनाया।
  • हूती अब बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के 80 किमी करीब पहुंच गए हैं, जिससे वैश्विक शिपिंग को खतरा है।
  • ईरान ने बातचीत की अपील की है, जबकि 2022 से चला आ रहा नाजुक युद्धविराम टूटने की कगार पर है।

क्षेत्रीय तनाव में भारी वृद्धि करते हुए, सऊदी अरब ने यमन के विद्रोही-नियंत्रित मोखा हवाई अड्डे पर हवाई हमले किए हैं। यह सैन्य कार्रवाई ईरान समर्थित हूती विद्रोहियों द्वारा रणनीतिक बंदरगाह शहर मोखा पर कब्जा करने के ठीक एक दिन बाद हुई है। मोखा पर कब्जा करना पिछले कई वर्षों में हूतियों की सबसे बड़ी क्षेत्रीय जीत मानी जा रही है।

मोखा की रणनीतिक स्थिति अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस शहर पर नियंत्रण के साथ, हूती बल अब बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य के मात्र 80 किलोमीटर के दायरे में आ गए हैं। यह जलमार्ग अंतरराष्ट्रीय वाणिज्य के लिए एक जीवन रेखा है, जो लाल सागर को अदन की खाड़ी से जोड़ता है। यहां किसी भी तरह की अस्थिरता का सीधा असर वैश्विक तेल और गैस आपूर्ति पर पड़ता है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह संघर्ष अब केवल एक स्थानीय गृहयुद्ध नहीं रह गया है, बल्कि एक बड़े भू-राजनीतिक खेल का हिस्सा है। मोखा पर हूतियों का नियंत्रण ईरान को अमेरिका पर दबाव बनाने के लिए एक शक्तिशाली हथियार देता है। बाब अल-मंडेब को बाधित करके, तेहरान वैश्विक तेल कीमतों को प्रभावित कर सकता है और अमेरिका को अपनी शर्तों पर बातचीत के लिए मजबूर कर सकता है।

बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य का सैन्यीकरण एक क्षेत्रीय विद्रोह को वैश्विक आर्थिक जोखिम में बदल देता है, जिससे ऊर्जा बाजार रातों-रात अस्थिर हो सकते हैं।
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आर्थिक प्रभाव विनाशकारी हो सकते हैं। दुनिया के लगभग 12% माल का परिवहन इसी जलडमरूमध्य से होता है। लॉयड्स लिस्ट इंटेलिजेंस के अनुसार, हूतियों द्वारा जहाजों पर किए जा रहे हमलों के कारण इस मार्ग से होने वाली शिपिंग में भारी गिरावट आई है, जिससे कच्चे तेल की कीमतों में फिर से उछाल देखा जा रहा है।

रणनीतिक बिंदु मुख्य जोखिम आर्थिक प्रभाव
बाब अल-मंडेब हूती नाकाबंदी वैश्विक तेल कीमतों में वृद्धि
हॉर्मुज जलडमरूमध्य ईरानी हस्तक्षेप कच्चे तेल निर्यात में बाधा

ऐतिहासिक रूप से, यमन का यह संघर्ष 2014 में शुरू हुआ जब हूतियों ने उत्तरी और मध्य यमन पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद 2015 में सऊदी अरब युद्ध में शामिल हुआ। इस युद्ध में अब तक लगभग 1.5 लाख लोग मारे जा चुके हैं और देश अकाल की कगार पर है। 2022 में हुआ युद्धविराम अब पूरी तरह समाप्त होने की स्थिति में है।

राजनयिक स्तर पर, यमन की अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सरकार ने नौवहन की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने के लिए अंतरराष्ट्रीय समर्थन की अपील की है। वहीं, ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने संकेत दिया है कि स्थिरता बहाल करने के लिए रियाद और तेहरान के बीच बातचीत के रास्ते खुले हैं।

क्या आप जानते हैं?: बाब अल-मंडेब को "आंसुओं का द्वार" (Gate of Tears) कहा जाता है, जो इस संकरे जलमार्ग से गुजरने वाले जहाजों के साथ जुड़े ऐतिहासिक खतरों और त्रासदियों को दर्शाता है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

1. मोखा हवाई अड्डा इतना महत्वपूर्ण क्यों है?
मोखा एक रणनीतिक बंदरगाह शहर है जो टैंकर मार्गों की निगरानी करता है; इस पर नियंत्रण हूतियों को बाब अल-मंडेब की ओर जाने वाले जहाजों को बाधित करने की शक्ति देता है।

2. इसका वैश्विक तेल कीमतों पर क्या असर होगा?
चूंकि दुनिया के तेल का एक बड़ा हिस्सा लाल सागर से गुजरता है, इसलिए इस क्षेत्र में कोई भी सैन्य हमला बाजार में अनिश्चितता पैदा करता है, जिससे वैश्विक स्तर पर कच्चे तेल की कीमतें बढ़ जाती हैं।