ट्रंप प्रशासन ने अमेरिकी जनगणना में आमूल-चूल बदलाव का प्रस्ताव दिया है, जिसके तहत लाखों प्रवासियों को गणना से बाहर किया जा सकता है और नस्ल एवं जातीयता से संबंधित महत्वपूर्ण प्रश्नों को हटाया जा सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि इससे राजनीतिक प्रतिनिधित्व और संसाधनों के वितरण पर गहरा असर पड़ेगा।
- प्रस्ताव के तहत बिना कानूनी दस्तावेज़ वाले प्रवासियों और शरणार्थियों को जनगणना से बाहर रखा जा सकता है।
- नस्ल, जातीयता और LGBTQ+ पहचान से जुड़े प्रश्नों को हटाने पर विचार किया जा रहा है।
- इस कदम से अमेरिकी हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में सीटों के आवंटन और चुनावी कॉलेज के वोटों पर प्रभाव पड़ सकता है।
वॉशिंगटन: ट्रंप प्रशासन ने दशक में एक बार होने वाली अमेरिकी जनगणना (US Census) में व्यापक बदलावों का प्रस्ताव रखा है। इस प्रस्ताव का मुख्य उद्देश्य जनगणना को 'रंग-अंध' (colourblind) बनाना और केवल उन लोगों को गिनना है जिन्हें प्रशासन 'सच्चा निवासी' मानता है। इस योजना के तहत उन प्रवासियों को बाहर करने की बात कही गई है जिनके पास स्थायी निवास या नागरिकता नहीं है।
अमेरिकी जनगणना ब्यूरो ने फेडरल रजिस्टर की वेबसाइट पर स्पष्ट किया है कि 'अवैध प्रवासियों' को गणना में शामिल नहीं किया जाना चाहिए क्योंकि उनके पास संयुक्त राज्य अमेरिका के प्रति पर्याप्त निष्ठा या संबंध नहीं हैं। इसके अलावा, ब्यूरो का तर्क है कि नस्ल जैसे 'गैर-जरूरी व्यक्तिगत गुणों' के प्रश्न डेटा को विकृत करते हैं, इसलिए उन्हें हटाया जा सकता है। प्रशासन LGBTQ+ समुदाय से संबंधित डेटा को भी हटाने पर विचार कर रहा है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल एक प्रशासनिक बदलाव नहीं है, बल्कि एक गहरी राजनीतिक रणनीति है। अमेरिकी जनगणना का उपयोग सीधे तौर पर राजनीतिक शक्ति के वितरण (Apportionment) के लिए किया जाता है। यदि लाखों प्रवासियों को गणना से बाहर किया जाता है, तो उन राज्यों की राजनीतिक शक्ति कम हो जाएगी जहाँ प्रवासी आबादी अधिक है, जिससे हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में सीटों का संतुलन बदल सकता है।
"सभी निवासियों की गणना न करना वास्तव में एक बड़ा खतरा है, क्योंकि जनगणना डेटा का उपयोग सार्वजनिक स्वास्थ्य आपात स्थितियों और आपदा प्रबंधन में संसाधनों के आवंटन के लिए किया जाता है।" - बेथ जारोज़, डेटा शोधकर्ता।
ऐतिहासिक रूप से, 1790 से ही अमेरिकी जनगणना में नस्ल से संबंधित प्रश्न शामिल रहे हैं। साल 2000 से लोगों को एक से अधिक नस्ल चुनने की अनुमति दी गई थी। 2020 की जनगणना के अनुसार, लगभग 3.38 करोड़ लोगों ने खुद को बहु-नस्लीय बताया था। यह डेटा भेदभाव, अपराध दर और समुदायों के बीच धन की खाई का अध्ययन करने वाले शोधकर्ताओं के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण होता है।
एएपीआई इक्विटी एलायंस (AAPI Equity Alliance) जैसी संस्थाओं ने इस कदम की कड़ी निंदा की है। उनका तर्क है कि नस्ल और जातीयता के डेटा को हटाने से यह संदेश जाता है कि ये समुदाय देश के लिए मायने नहीं रखते। इससे स्वास्थ्य सेवा प्रदाताओं और सार्वजनिक सुरक्षा अधिकारियों के लिए सटीक योजना बनाना असंभव हो जाएगा।
| विशेषता | पारंपरिक जनगणना | प्रस्तावित ट्रंप योजना |
|---|---|---|
| प्रवासी गणना | सभी निवासियों को गिना जाता है | केवल कानूनी निवासियों को गिना जाएगा |
| नस्लीय डेटा | विस्तृत नस्ल और जातीयता प्रश्न | 'रंग-अंध' दृष्टिकोण (डेटा हटाना) |
| प्रतिनिधित्व | कुल जनसंख्या आधारित | नागरिकता/स्थायी स्थिति आधारित |
Frequently Asked Questions
1. क्या प्रवासियों को बाहर करने से चुनाव प्रभावित होंगे?
हाँ, क्योंकि जनगणना डेटा का उपयोग यह तय करने के लिए किया जाता है कि प्रत्येक राज्य को हाउस ऑफ रिप्रेजेंटेटिव्स में कितनी सीटें मिलेंगी।
2. नस्लीय डेटा क्यों महत्वपूर्ण है?
यह डेटा सामाजिक असमानता, स्वास्थ्य सेवाओं की पहुँच और भेदभाव के विरुद्ध कानून बनाने के लिए आधार प्रदान करता है।