नई दिल्ली में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में दुनिया के सबसे शक्तिशाली नेता एकत्रित हुए हैं। यह सम्मेलन वैश्विक अर्थव्यवस्था, सुरक्षा और भू-राजनीतिक समीकरणों को बदलने की क्षमता रखता है।

  • शी जिनपिंग की 2020 के सीमा विवाद के बाद पहली भारत यात्रा।
  • रूस-भारत ऊर्जा और रक्षा संबंधों में नई मजबूती की संभावना।
  • वैश्विक शासन और IMF/विश्व बैंक में सुधार के लिए साझा प्रयास।
  • डॉलर पर निर्भरता कम करने और स्थानीय मुद्राओं के उपयोग पर जोर।

भारत की राजधानी नई दिल्ली वर्तमान में 18वें ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन का केंद्र बनी हुई है। इस उच्च-स्तरीय बैठक में चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, ईरान के राष्ट्रपति मसऊद पेज़ेशकियन और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा जैसे दिग्गज शामिल हैं। यह सम्मेलन ऐसे समय में हो रहा है जब पश्चिम एशिया और यूक्रेन में युद्ध की स्थिति ने वैश्विक सुरक्षा को खतरे में डाल दिया है।

शी जिनपिंग: चीन का प्रभाव और भारत के साथ तनाव

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग की उपस्थिति सबसे अधिक चर्चा में है क्योंकि 2020 के घातक सीमा संघर्षों के बाद यह उनकी पहली भारत यात्रा है। चीन ब्रिक्स की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था है और 'बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव' के माध्यम से ग्लोबल साउथ में अपना प्रभाव बढ़ा रहा है। भारत के लिए, चीन के साथ सीमा विवाद और व्यापार घाटा अभी भी बड़ी चुनौतियां बनी हुई हैं।

व्लादिमीर पुतिन: रूस की कूटनीतिक ढाल

रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के लिए ब्रिक्स एक ऐसा मंच है जहाँ वे पश्चिमी प्रतिबंधों के बावजूद अपनी अंतरराष्ट्रीय प्रासंगिकता सिद्ध कर सकते हैं। भारत और रूस के संबंध रक्षा और ऊर्जा के क्षेत्र में अटूट रहे हैं। 2024-25 में द्विपक्षीय व्यापार लगभग 70 अरब डॉलर तक पहुँच गया, जिसे 2030 तक 100 अरब डॉलर करने का लक्ष्य है।

Why This Matters

BozokMedia analysis shows कि यह शिखर सम्मेलन केवल एक औपचारिक बैठक नहीं है, बल्कि यह पश्चिमी प्रभुत्व वाले 'एकध्रुवीय विश्व' (Unipolar World) के खिलाफ एक 'बहुध्रुवीय व्यवस्था' (Multipolar System) की स्थापना का प्रयास है। जब भारत जैसे देश अमेरिका और रूस दोनों के साथ संतुलन बनाते हैं, तो वैश्विक कूटनीति का केंद्र शिफ्ट होता है।

"ब्रिक्स अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं रहा, बल्कि यह ग्लोबल साउथ की सामूहिक आवाज बन चुका है जो वैश्विक वित्तीय संस्थानों में आमूल-चूल परिवर्तन चाहता है।"

ब्राजील और दक्षिण अफ्रीका की भूमिका

ब्राजील के विदेश मंत्री माउरो विएरा और दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा इस समूह में संतुलन बनाए रखने का काम करते हैं। ब्राजील कृषि और ऊर्जा निर्यात में अग्रणी है और डॉलर पर निर्भरता कम करने की वकालत करता है। वहीं, रामाफोसा का अनुभव रंगभेद विरोधी संघर्ष से आता है, जो उन्हें अफ्रीका की आवाज बनाता है।

देश प्रमुख फोकस क्षेत्र भारत के साथ मुख्य संबंध
चीन बहुध्रुवीय विश्व, विनिर्माण सीमा विवाद, व्यापार घाटा
रूस रणनीतिक स्वायत्तता, ऊर्जा रक्षा सहयोग, कच्चा तेल
ब्राजील वैश्विक शासन सुधार, कृषि फार्मास्यूटिकल्स, व्यापार
Did You Know?: ब्रिक्स की शुरुआत मूल रूप से केवल पांच देशों (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) से हुई थी, लेकिन अब यह नए सदस्यों और साझेदार देशों के साथ एक विशाल वैश्विक गठबंधन बन चुका है।

Frequently Asked Questions

1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका मुख्य उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग बढ़ाना और वैश्विक शासन में विकासशील देशों की भूमिका को मजबूत करना है।

2. भारत और चीन के बीच संबंधों पर इसका क्या असर पड़ेगा?
शी जिनपिंग की यात्रा तनाव कम करने की दिशा में एक सकारात्मक कदम हो सकती है, हालांकि सीमा विवाद अभी भी एक बड़ी बाधा है।