नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी, राष्ट्रपति पुतिन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात ने दुनिया का ध्यान खींचा है। इस बैठक ने एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की ओर बढ़ते कदमों को स्पष्ट कर दिया है।
- नई दिल्ली में ब्रिक्स देशों के शीर्ष नेताओं की ऐतिहासिक बैठक।
- अमेरिका की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति के कारण वैश्विक शक्तियों का झुकाव ब्रिक्स की ओर।
- बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था (Multipolar World) के निर्माण की ओर बढ़ते कदम।
नई दिल्ली की धरती पर आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन ने वैश्विक भू-राजनीति में एक नए अध्याय की शुरुआत कर दी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच होने वाली महत्वपूर्ण मुलाकातें इस बात का संकेत हैं कि दुनिया अब केवल एक शक्ति केंद्र के इर्द-गिर्द नहीं घूमती।
इस सम्मेलन का सबसे दिलचस्प पहलू 'ट्रम्पवाद' (Trumpism) का प्रभाव है। विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की 'अमेरिका फर्स्ट' नीति ने अन्य वैश्विक शक्तियों को अपनी सुरक्षा और आर्थिक हितों के लिए अन्य विकल्पों की तलाश करने के लिए मजबूर कर दिया है। इससे ब्रिक्स समूह को एक नई मजबूती मिली है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह बैठक केवल एक औपचारिक मुलाकात नहीं है, बल्कि यह वैश्विक व्यापार और कूटनीति के केंद्र को पश्चिम से पूर्व की ओर स्थानांतरित करने का एक प्रयास है। ब्रिक्स देशों का बढ़ता आर्थिक प्रभाव भविष्य में डॉलर के वर्चस्व को चुनौती दे सकता है।
ब्रिक्स का विस्तार केवल एक आर्थिक गठबंधन नहीं, बल्कि वैश्विक शक्ति संतुलन को फिर से परिभाषित करने की एक रणनीतिक चाल है।
सम्मेलन में ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन की उपस्थिति ने भी इस समूह की बढ़ती व्यापकता को दर्शाया है। यह स्पष्ट है कि ब्रिक्स अब केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं का समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह एक राजनीतिक शक्ति के रूप में उभर रहा है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
ब्रिक्स की स्थापना शुरुआत में केवल उभरती अर्थव्यवस्थाओं के एक समूह के रूप में हुई थी, लेकिन पिछले एक दशक में इसने अपनी सदस्यता का विस्तार किया है और अब यह वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज़ बन चुका है।
Frequently Asked Questions
1. ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य सदस्य देशों के बीच आर्थिक सहयोग को बढ़ावा देना और वैश्विक शासन में सुधार करना है।
2. क्या यह सम्मेलन अमेरिका के लिए चुनौती है?
जी हाँ, यह सम्मेलन अमेरिका की एकपक्षीय नीतियों के विकल्प के रूप में देखा जा रहा है।