नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन में भारत ने समूह को एक वैचारिक युद्ध का मैदान बनने से रोककर बड़ी कूटनीतिक सफलता हासिल की है। भारत ने डॉलर के विकल्प के बजाय व्यावहारिक सहयोग और डिजिटल बुनियादी ढांचे पर ध्यान केंद्रित करने की वकालत की है।
- भारत ने ब्रिक्स को पश्चिम के खिलाफ एक वैचारिक ब्लॉक बनने से सफलतापूर्वक रोका।
- शिखर सम्मेलन में 'डी-डॉलराइजेशन' के बजाय भुगतान प्रणालियों में सुधार पर जोर दिया गया।
- डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे और खाद्य सुरक्षा जैसे व्यावहारिक मुद्दों को प्राथमिकता दी गई।
नई दिल्ली में आयोजित ब्रिक्स (BRICS) शिखर सम्मेलन में भारत की कूटनीति ने एक बार फिर अपनी कुशलता का परिचय दिया है। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने इस मंच को एक कट्टरपंथी भू-राजनीतिक ब्लॉक बनने से बचाकर एक महत्वपूर्ण उपलब्धि हासिल की है। जहाँ कुछ सदस्य देश इस समूह को पश्चिमी प्रभुत्व के खिलाफ एक हथियार के रूप में देखना चाहते हैं, वहीं भारत ने इसे 'उबाऊ' लेकिन 'उपयोगी' बनाए रखने पर जोर दिया है।
वैचारिक टकराव के बजाय व्यावहारिक सहयोग
दिल्ली घोषणापत्र में किसी भी प्रकार के वैचारिक युद्ध या पश्चिमी देशों के खिलाफ सीधे टकराव के संकेत नहीं मिलते हैं। इसके बजाय, शिखर सम्मेलन का मुख्य केंद्र आपूर्ति श्रृंखला (Supply Chains), स्वास्थ्य, खाद्य सुरक्षा, जलवायु अनुकूलन और डिजिटल प्रणालियों जैसे महत्वपूर्ण वैश्विक मुद्दों पर रहा है। भारत का उद्देश्य वैश्विक व्यवस्था को नष्ट करना नहीं, बल्कि उसे लोकतांत्रिक और समावेशी बनाना है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत की यह रणनीति उसे अमेरिका और यूरोप के साथ अपने महत्वपूर्ण व्यापारिक और रक्षा संबंधों को बनाए रखते हुए भी विकासशील देशों की आवाज बनने की अनुमति देती है। यदि ब्रिक्स एक कट्टरपंथी ब्लॉक बन जाता, तो भारत के लिए अपनी स्वतंत्र विदेश नीति का संचालन करना अत्यंत कठिन हो जाता।
भारत ने ब्रिक्स को एक वैचारिक 'स्ट्रेच जैकेट' पहनने से बचाकर इसे बहुलवाद का मंच बनाए रखा है।
डी-डॉलराइजेशन (De-dollarisation) के मुद्दे पर भी भारत ने बहुत ही संतुलित रुख अपनाया है। रूस और चीन जैसे देश अमेरिकी डॉलर पर निर्भरता कम करने के पक्षधर हैं, लेकिन भारत ने किसी 'साझा ब्रिक्स मुद्रा' के बजाय सीमा पार भुगतान को तेज, सस्ता और अधिक विश्वसनीय बनाने के तकनीकी सहयोग पर ध्यान केंद्रित किया है।
भारत का डिजिटल प्रभाव
इस शिखर सम्मेलन में भारत ने अपने डिजिटल सार्वजनिक बुनियादी ढांचे (DPI) के माध्यम से एक अलग छाप छोड़ी है। एआई (AI) क्षमता निर्माण और डिजिटल सार्वजनिक वस्तुओं पर चर्चा ने वैश्विक मंच पर भारत की साख को और मजबूत किया है।
Frequently Asked Questions
1. क्या ब्रिक्स अब पश्चिम के खिलाफ एक नया गठबंधन है?
नहीं, दिल्ली घोषणापत्र के अनुसार, ब्रिक्स एक वैचारिक ब्लॉक नहीं बल्कि सहयोग का एक मंच है जो वैश्विक सुधारों पर केंद्रित है।
2. भारत ने डॉलर के विकल्प के बारे में क्या कहा?
भारत ने किसी नई मुद्रा बनाने के बजाय मौजूदा भुगतान प्रणालियों को अधिक कुशल और सस्ता बनाने का समर्थन किया है।