BRICS देशों ने नई दिल्ली घोषणापत्र को सर्वसम्मति से अपनाया है, जिसमें आतंकवाद, परमाणु जोखिम और वैश्विक व्यापार युद्धों जैसे गंभीर मुद्दों पर कड़ा रुख अपनाया गया है। भारत की कूटनीतिक जीत ने गहरे मतभेदों के बावजूद एक साझा मंच तैयार किया है।

  • आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' और दोहरे मापदंडों को खारिज करने का संकल्प।
  • परमाणु संघर्ष के बढ़ते जोखिमों पर गहरी चिंता व्यक्त की गई।
  • एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और टैरिफ युद्धों का कड़ा विरोध।
  • मध्य पूर्व संघर्ष और गाजा में मानवीय सहायता पर जोर।

नई दिल्ली: भारत की कूटनीतिक कुशलता एक बार फिर वैश्विक पटल पर चमक उठी है। BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान, सदस्य देशों ने भारी मतभेदों के बावजूद 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को सर्वसम्मति से स्वीकार कर लिया है। यह उपलब्धि विशेष रूप से महत्वपूर्ण है क्योंकि इसमें रूस, चीन, ईरान और संयुक्त अरब अमीरात जैसे देश शामिल हैं, जिनके बीच भू-राजनीतिक तनाव स्पष्ट है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने घोषणा की कि किसी भी सदस्य देश ने इस पर कोई आपत्ति नहीं जताई है। यह क्षण वैश्विक राजनीति में भारत के बढ़ते प्रभाव का प्रतीक है, जहाँ उसने विभिन्न विचारधाराओं वाले देशों को एक साझा दस्तावेज़ पर सहमत होने के लिए प्रेरित किया।

आतंकवाद पर कड़ा प्रहार

घोषणापत्र में आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को दोहराया गया है। विशेष रूप से, जम्मू-कश्मीर के पहलगाम हमले की कड़ी निंदा की गई है। घोषणापत्र में आतंकवाद पर 'दोहरे मापदंडों' को खारिज करने की बात कही गई है, जो स्पष्ट रूप से पाकिस्तान जैसे देशों की ओर इशारा करता है। इसके अलावा, भारत द्वारा 1996 में संयुक्त राष्ट्र में प्रस्तावित 'व्यापक आतंकवाद विरोधी कन्वेंशन' (CCIT) को जल्द से जल्द अपनाने का आह्वान किया गया है।

परमाणु जोखिम और वैश्विक संघर्ष

इस बार के घोषणापत्र की भाषा पहले की तुलना में कहीं अधिक गंभीर है। BRICS नेताओं ने परमाणु युद्ध के "बढ़ते जोखिमों" पर चिंता व्यक्त की है, जो हाल के वर्षों में वैश्विक परमाणु नियंत्रण ढांचे के कमजोर होने के बाद आया है।

BRICS का यह साझा रुख वैश्विक अस्थिरता के बीच एक सुरक्षा कवच की तरह काम कर सकता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि BRICS अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं रह गया है, बल्कि यह सुरक्षा और भू-राजनीतिक स्थिरता के लिए एक महत्वपूर्ण आवाज बन गया है। मध्य पूर्व में जारी तनाव और रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच, इस समूह का संवाद ही भविष्य की वैश्विक व्यवस्था की दिशा तय करेगा।

व्यापारिक युद्ध और टैरिफ का विरोध

यद्यपि अमेरिका इस बैठक का हिस्सा नहीं था, लेकिन घोषणापत्र में एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों और टैरिफ उपायों की आलोचना की गई है। यह सीधे तौर पर अमेरिका की संरक्षणवादी नीतियों की ओर संकेत करता है, जो वैश्विक खाद्य सुरक्षा और विकास को बाधित कर सकती हैं।

Did You Know?: भारत ने 1996 में ही आतंकवाद के खिलाफ एक वैश्विक कानूनी ढांचा तैयार करने के लिए संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव रखा था।

Frequently Asked Questions

1. नई दिल्ली घोषणापत्र का मुख्य उद्देश्य क्या है?
इसका उद्देश्य आतंकवाद, परमाणु खतरे और व्यापारिक बाधाओं जैसे वैश्विक मुद्दों पर सदस्य देशों के बीच सहमति बनाना है।

2. क्या BRICS देशों के बीच मतभेद हैं?
हाँ, ईरान, यूएई और रूस के बीच मध्य पूर्व को लेकर मतभेद हैं, फिर भी उन्होंने इस घोषणापत्र पर सहमति जताई है।