पूर्व भारतीय राजदूत अशोक कांता ने प्रधानमंत्री मोदी और शी जिनपिंग की मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों की जटिलताओं और सीमा विवाद पर महत्वपूर्ण टिप्पणी की है।
- भारत-चीन संबंधों में जल्दबाजी में सुधार की संभावना नहीं है।
- सीमा पर शांति और स्थिरता किसी भी सामान्यीकरण के लिए अनिवार्य शर्त है।
- व्यापार घाटा और चीन का पाकिस्तान को समर्थन प्रमुख बाधाएं हैं।
नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच हुई मुलाकात ने वैश्विक कूटनीति में नई चर्चा छेड़ दी है। हालांकि, इस मुलाकात के बाद भारत-चीन संबंधों के भविष्य को लेकर विशेषज्ञ काफी सतर्क हैं।
भारत में चीन के पूर्व राजदूत अशोक कांता ने 'इंडिया टुडे' को दिए एक साक्षात्कार में इस राजनयिक बातचीत का गहराई से विश्लेषण किया। कांता ने स्पष्ट किया कि यह एक क्रमिक और नपा-तुला (calibrated) मामला है। उन्होंने कहा, "हम संबंधों में किसी भी तरह के तत्काल रीसेट (reset) की ओर नहीं बढ़ सकते।" उनके अनुसार, संबंधों के सामान्य होने की दिशा में कोई भी प्रगति पूरी तरह से सीमावर्ती क्षेत्रों में शांति और स्थिरता बनाए रखने पर निर्भर करती है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण दिखाता है कि केवल शिखर सम्मेलन की कूटनीति द्विपक्षीय विवादों का समाधान नहीं कर सकती। भारत को बीजिंग के साथ एक अत्यंत यथार्थवादी और 'हार्ड-हेडेड' (कठोर एवं व्यावहारिक) दृष्टिकोण अपनाना होगा।
भारत को बीजिंग के प्रति एक व्यावहारिक और सख्त दृष्टिकोण अपनाना चाहिए और निरंतरता के साथ मुख्य द्विपक्षीय विवादों को संबोधित करना चाहिए।
कांता ने उन संरचनात्मक मुद्दों को भी रेखांकित किया जो दोनों देशों के बीच तनाव का मुख्य कारण हैं। इनमें बढ़ता व्यापार घाटा, आर्थिक जुड़ाव की शर्तें, और ऑपरेशन सिंदूर के दौरान पाकिस्तान को चीन का समर्थन जैसे गंभीर मुद्दे शामिल हैं। इसके अलावा, तिब्बत में मेडॉग (Medog) में चल रही मेगा हाइड्रोपावर परियोजना भी एक बड़ा रणनीतिक चिंता का विषय बनी हुई है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और चीन के बीच संबंध दशकों से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। 1962 के युद्ध से लेकर हाल के वर्षों में गलवान घाटी में हुए संघर्ष तक, दोनों देशों के बीच विश्वास की कमी एक स्थायी समस्या रही है। वर्तमान में, सीमा प्रबंधन और आर्थिक सुरक्षा दोनों ही कूटनीतिक प्राथमिकताएं हैं।
Frequently Asked Questions
1. क्या मोदी-जिनपिंग मुलाकात से सीमा विवाद सुलझ जाएगा?
विशेषज्ञों का मानना है कि केवल मुलाकात पर्याप्त नहीं है; सीमा पर शांति बनाए रखना सबसे महत्वपूर्ण है।
2. अशोक कांता ने किन मुख्य मुद्दों पर ध्यान केंद्रित किया?
उन्होंने व्यापार घाटा, पाकिस्तान को चीन का समर्थन और तिब्बत में हाइड्रोपावर परियोजनाओं का उल्लेख किया।