इरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने भारत टुडे के साथ साक्षात्कार में स्पष्ट किया कि इरान सऊदी अरब के साथ किसी भी प्रकार के युद्ध में नहीं है और क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचा बनाने की अपील की। यह बयान यमन में चल रहे संघर्ष के बीच आया है।
- इरान ने सऊदी अरब के साथ युद्ध न होने की पुष्टि की।
- राष्ट्रपति ने क्षेत्रीय सुरक्षा ढाँचा बनाने की मांग की।
- बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन में यूएई के साथ कूटनीतिक वार्तालाप।
इंडिया टुडे के विदेशी मामलों के समूह संपादक गीता मोहन के साथ एक विशेष साक्षात्कार में, इरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट रूप से कहा, “हम सऊदी अरब के साथ युद्ध नहीं में हैं।” यह बयान इरान की मध्य पूर्व में शांति और स्थिरता सुनिश्चित करने की प्रतिबद्धता को दोहराता है।
क्षेत्रीय तनाव और हालिया हमले
यह टिप्पणी यमन में सऊदी‑समर्थित सरकार और हूथी विद्रोहियों के बीच जारी टकराव के समय आई है। कुछ दिन पहले हूथी समूह ने दक्षिणी सऊदी अरब में हमला किया, जिससे 70 से अधिक लोगों को चोटें आईं, जिससे व्यापक संघर्ष की आशंकाएँ बढ़ गईं।
मध्य‑पूर्व सुरक्षा ढाँचा बनाने का आह्वान
पेज़ेश्कियन ने प्रस्ताव रखा कि इरान, सऊदी अरब, तुर्की, पाकिस्तान और अन्य पड़ोसी देशों को मिलकर एक व्यापक शांति और सुरक्षा ढाँचा तैयार करना चाहिए, जो यूरोप के द्वितीय विश्व युद्ध‑के‑बाद के मॉडल से प्रेरित हो। उन्होंने कहा कि सहयोग राष्ट्रीय पहचान या आर्थिक हितों को नुकसान नहीं पहुंचा सकता।
संयुक्त अरब अमीरात के साथ संबंध
बीआरआईसीएस शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली में, पेज़ेश्कियन ने यूएई के क Crown Prince Sheikh Khaled bin Mohamed bin Zayed Al Nahyan से मुलाकात की। यह “दुर्लभ कूटनीतिक चैनल” दोनों देशों के बीच हालिया इरानी मिसाइल और ड्रोन हमलों को लेकर तनाव को कम करने के उद्देश्य से था, जिन्हें अबू धाबी ने अपनी संप्रभुता के उल्लंघन के रूप में निंदा की थी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि तेहरान का यह कदम खाड़ी क्षेत्र की शक्ति संतुलन को बदल सकता है, सैन्य तनाव के बजाय कूटनीति को प्राथमिकता देकर यमन में मानवीय संकट को कम करने की संभावना को बढ़ा सकता है।
“एक क्षेत्रीय सुरक्षा समझौता स्थायी शांति की कुंजी बन सकता है, बशर्ते इसमें प्रभावी भरोसे‑निर्माण उपाय शामिल हों,” डॉ. लीला हदद, मध्य‑पूर्व सुरक्षा विशेषज्ञ ने कहा।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या इरान की यह घोषणा उसकी विदेश नीति में बदलाव दर्शाती है?
उत्तर: जबकि तेहरान अभी भी सहयोगी समूहों का समर्थन करता है, राष्ट्रपति के बयानों से कूटनीतिक जुड़ाव की ओर रणनीतिक बदलाव का संकेत मिलता है।
प्रश्न 2: सऊदी अरब इस पर कैसे प्रतिक्रिया देगा?
उत्तर: सऊदी अधिकारियों ने अभी तक आधिकारिक बयान नहीं दिया, लेकिन निजी चैनलों से संवाद में आशावाद की झलक मिल रही है।