ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने दावा किया है कि अमेरिका ईरान में एक कठपुतली सरकार स्थापित करने के अपने मंसूबों में पूरी तरह विफल रहा है। उन्होंने कहा कि अमेरिकी रणनीति वेनेजुएला और सीरिया की तरह ईरान को अस्थिर करने की थी, लेकिन ईरानी जनता ने सरकार का साथ दिया।

  • अमेरिका ईरान में 'कठपुतली सरकार' स्थापित करने की कोशिश कर रहा था।
  • ईरानी जनता और सैन्य नेतृत्व ने बाहरी हमलों के खिलाफ एकजुटता दिखाई।
  • पेज़ेश्कियन ने अमेरिका पर दवाओं और भोजन की आपूर्ति रोकने का आरोप लगाया।
  • ईरान परमाणु मुद्दों पर अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के तहत बातचीत के लिए तैयार है।

ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने एक विस्फोटक साक्षात्कार में अमेरिका पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि वाशिंगटन को लगा था कि वह वेनेजुएला की तरह महज 24 घंटों के भीतर ईरान की सरकार को उखाड़ फेंकेगा और वहां अपनी पसंद की एक 'कठपुतली सरकार' बिठा देगा। पेज़ेश्कियन के अनुसार, अमेरिकी योजना ईरान के नेतृत्व, सैन्य कमांडरों और महत्वपूर्ण बुनियादी ढांचे को निशाना बनाकर देश में अराजकता फैलाना था।

पेज़ेश्कियन ने विस्तार से बताया कि अमेरिका ने ईरान के मामले में सीरिया जैसा परिदृश्य बनाने की कोशिश की। उनका मानना था कि यदि ईरान के शीर्ष नेताओं और सैन्य अधिकारियों को निशाना बनाया जाता है, तो समाज शांत हो जाएगा और सरकार ढह जाएगी। हालांकि, राष्ट्रपति ने दावा किया कि यह गणना पूरी तरह गलत साबित हुई। बाहरी हमलों के बावजूद, ईरानी नागरिकों ने देश की क्षेत्रीय अखंडता की रक्षा के लिए सरकार के साथ खड़े होकर अपनी ताकत दिखाई।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि पेज़ेश्कियन का यह बयान वैश्विक भू-राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ है। यह न केवल अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव को दर्शाता है, बल्कि यह भी संकेत देता है कि ईरान अब पश्चिमी दबाव के आगे झुकने के बजाय अपनी आंतरिक एकता को अपनी सबसे बड़ी शक्ति के रूप में पेश कर रहा है। यह बयान मध्य पूर्व में शक्ति संतुलन के बदलते स्वरूप की ओर इशारा करता है।

"अमेरिका ने ईरान की लचीलापन क्षमता को कम करके आंका, जिससे उसकी तख्तापलट की रणनीति विफल हो गई।"

राष्ट्रपति ने अमेरिका पर मानवीय आधार पर भी हमला करने का आरोप लगाया। उन्होंने कहा कि अमेरिका न केवल सैन्य हमलों का सहारा ले रहा है, बल्कि ईरान में भोजन, दवाओं और आवश्यक वस्तुओं के आयात के समुद्री और जमीनी मार्गों को भी अवरुद्ध करने का प्रयास कर रहा है। पेज़ेश्कियन ने इसे 'जंगली' व्यवहार करार देते हुए कहा कि यह मानवाधिकारों के प्रति अमेरिका के दावों का खंडन करता है।

ऐतिहासिक रूप से, ईरान और अमेरिका के संबंध दशकों से तनावपूर्ण रहे हैं। 1979 की क्रांति के बाद से दोनों देशों के बीच राजनयिक संबंध लगभग समाप्त हो चुके हैं। पेज़ेश्कियन ने स्पष्ट किया कि ईरान परमाणु मुद्दों पर वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन यह बातचीत परमाणु अप्रसार संधि (NPT) और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त सिद्धांतों के ढांचे के भीतर ही होनी चाहिए।

Did You Know?: ईरान का परमाणु कार्यक्रम दुनिया भर में भू-राजनीतिक चर्चा का केंद्र बना हुआ है, जो वैश्विक सुरक्षा को प्रभावित करता है।

Frequently Asked Questions

1. पेज़ेश्कियन ने अमेरिका पर क्या मुख्य आरोप लगाए हैं?
उन्होंने आरोप लगाया कि अमेरिका ईरान में कठपुतली सरकार लाने के लिए सैन्य हमलों और आवश्यक वस्तुओं (दवा, भोजन) की आपूर्ति रोकने की कोशिश कर रहा है।

2. ईरान परमाणु वार्ता पर क्या रुख अपना रहा है?
ईरान ने कहा है कि वह परमाणु अप्रसार संधि (NPT) के ढांचे के भीतर बातचीत के लिए तैयार है।