इराक सरकार ने पुष्टि की है कि सऊदी अरब की महत्वपूर्ण तेल पाइपलाइन पर ड्रोन हमले उसकी अपनी सीमा से किए गए थे, जिसके बाद एक सैन्य कमांडर को बर्खास्त कर दिया गया है।
- सऊदी अरब की ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन पर ड्रोन हमले इराक के मायसन प्रांत से किए गए।
- प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने जांच के आदेश दिए और मायसन ऑपरेशंस कमांडर को बर्खास्त किया।
- तनाव के बीच इराक ने ईरान के साथ दो प्रमुख सीमा चौकियों को बंद कर दिया है।
- यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़त ने वैश्विक तेल आपूर्ति के लिए खतरा पैदा कर दिया है।
क्षेत्रीय सुरक्षा चिंताओं में एक बड़ी वृद्धि के रूप में, इराकी सरकार ने आधिकारिक तौर पर पुष्टि की है कि सऊदी अरब की रणनीतिक ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन को निशाना बनाने वाले ड्रोन हमले इराकी क्षेत्र से किए गए थे। विशेष रूप से, इन हमलों का स्रोत मायसन प्रांत पाया गया है, जो ईरान की सीमा के बेहद करीब है। इस सुरक्षा चूक के जवाब में, प्रधानमंत्री अली अल-ज़ैदी ने प्रांतीय ऑपरेशंस कमांड की व्यापक जांच के आदेश दिए और वहां के कमांडर को तत्काल प्रभाव से हटा दिया है।
सऊदी अरब ने शुक्रवार को एहतियात के तौर पर इस प्रमुख क्रॉस-कंट्री पाइपलाइन को बंद कर दिया था ताकि और अधिक नुकसान को रोका जा सके। हालांकि सऊदी विदेश मंत्रालय ने पुष्टि की कि ड्रोन इराक से आए थे, लेकिन रियाद ने फिलहाल जवाबी कार्रवाई न करने का फैसला किया है, ताकि बगदाद को अपनी सीमा के भीतर सक्रिय उग्रवादी तत्वों पर नियंत्रण पाने का अवसर मिल सके।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह घटना केवल एक स्थानीय सुरक्षा विफलता नहीं है, बल्कि अपनी जमीन पर संप्रभुता बनाए रखने के लिए इराक के संघर्ष का प्रतीक है। ईरान समर्थित मिलिशिया की संलिप्तता यह संकेत देती है कि सऊदी ऊर्जा बुनियादी ढांचे को अस्थिर करने के लिए एक समन्वित प्रयास किया गया है, जिसमें इराक का उपयोग एक लॉन्चपैड के रूप में किया गया। यह बगदाद को उसके रणनीतिक साझेदार ईरान और पड़ोसी सऊदी अरब के बीच एक कूटनीतिक संकट में डालता है।
सऊदी बुनियादी ढांचे पर हमलों के लिए इराकी जमीन का उपयोग बगदाद में केंद्रीय सत्ता के कमजोर होने का संकेत है, जिससे गैर-राज्य अभिनेता क्षेत्रीय राजनीति को नियंत्रित करने का साहस कर रहे हैं।
ईस्ट-वेस्ट पाइपलाइन का ऐतिहासिक महत्व अत्यधिक है। 1980 के दशक में ईरान-इराक युद्ध के दौरान होर्मुज जलडमरूमध्य में व्यवधानों से बचने के लिए इसका निर्माण किया गया था। अंतर्राष्ट्रीय ऊर्जा एजेंसी के अनुसार, जून की शुरुआत तक इस पाइपलाइन के अंत में लाल सागर बंदरगाह से तेल निर्यात 5 मिलियन बैरल प्रतिदिन से अधिक हो गया था, जिससे किसी भी तरह का व्यवधान वैश्विक ऊर्जा बाजारों के लिए खतरा बन जाता है।
तनाव को बढ़ाते हुए, इराक ने ईरान के साथ शालमचेह और चाजाबेह सीमा चौकियों को बंद कर दिया है, जिससे सभी वाणिज्यिक और यात्री यातायात रुक गया है। इस कदम को ईरानी सलाहकारों और ड्रोन हमलों के लिए जिम्मेदार मिलिशिया के बीच रसद संबंधों को तोड़ने के प्रयास के रूप में देखा जा रहा है। इस बीच, यमन में हूती विद्रोहियों ने बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य में एक द्वीप पर कब्जा कर लिया है, जो वैश्विक व्यापार के 12% हिस्से के लिए एक महत्वपूर्ण मार्ग है।
| संस्था | रणनीतिक भूमिका/कार्रवाई | वर्तमान स्थिति |
|---|---|---|
| इराक सरकार | जांच और सीमा बंदी | मिलिशिया को निशस्त्र करने का दबाव |
| सऊदी अरब | पाइपलाइन बंद करना | फिलहाल जवाबी कार्रवाई से परहेज |
| हूती विद्रोही | बाब अल-मंडेब पर कब्जा | यमन के पश्चिमी तट पर बढ़त |
| ईरान समर्थित मिलिशिया | ड्रोन लॉन्चिंग | निशस्त्रीकरण की समय सीमा की अनदेखी |
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: इराक ने ईरान के साथ अपनी सीमाएं क्यों बंद कीं?
शालमचेह और चाजाबेह की बंदी संभवतः ईरान से उन मिलिशिया तक हथियारों और कर्मियों की आपूर्ति रोकने के लिए की गई है जिन्होंने सऊदी अरब पर ड्रोन हमले किए।
प्रश्न 2: यमन में हूती विद्रोहियों की बढ़त का क्या प्रभाव है?
बाब अल-मंडेब जलडमरूमध्य पर नियंत्रण पाकर, हूती वैश्विक व्यापार और तेल शिपमेंट के एक बड़े हिस्से को बाधित कर सकते हैं, जिससे वैश्विक ऊर्जा कीमतों में भारी उछाल आ सकता है।