केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो द्वारा विदेशी छोटे व्यापारियों को कारोबार बंद करने के निर्देश के बाद बुरुंडी के प्रवासियों में भारी डर का माहौल है। सैकड़ों बुरुंडी नागरिक देश वापस लौटने के लिए नैरोबी स्थित अपने दूतावास के बाहर कतारों में खड़े हैं, जिससे पूर्वी अफ्रीकी समुदाय में राजनयिक तनाव बढ़ गया है।
- राष्ट्रपति विलियम रुटो द्वारा विदेशी छोटे व्यवसायों को बंद करने के आदेश से प्रवासियों में डर।
- सैकड़ों बुरुंडी नागरिक वापस लौटने के लिए नैरोबी में अपने दूतावास के बाहर आपातकालीन पास लेने पहुंचे।
- केन्याई अधिकारियों ने सफाई देते हुए कहा कि राष्ट्रपति के बयान को गलत समझा गया था।
केन्या की राजधानी नैरोबी में इन दिनों विदेशी कामगारों के बीच भारी दहशत और अनिश्चितता का माहौल है। केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो के एक विवादास्पद बयान के बाद, सैकड़ों बुरुंडी नागरिक अपने देश वापस लौटने के लिए आपातकालीन यात्रा दस्तावेज (पास) हासिल करने हेतु नैरोबी स्थित बुरुंडी दूतावास के बाहर लंबी कतारों में खड़े नजर आए। इस घबराहट की शुरुआत राष्ट्रपति रुटो के उस निर्देश से हुई, जिसमें उन्होंने "छोटे व्यवसाय" चलाने वाले विदेशियों को अपना कारोबार बंद करने के लिए एक सख्त समय सीमा दी थी।
यह तनाव 2 सितंबर को दिए गए राष्ट्रपति रुटो के उस भाषण से शुरू हुआ, जिसमें उन्होंने स्थानीय उद्यमियों को संबोधित करते हुए कहा था, "हमने रेहड़ी-पटरी वाले विदेशियों के केन्या आने के लिए निवेशकों का भरोसा नहीं बनाया है।" इस बयान की तुलना हाल के महीनों में दक्षिण अफ्रीका में हुई हिंसक प्रवासी-विरोधी घटनाओं से की जा रही है। बुरुंडी के प्रवासियों को डर है कि केन्या में भी उनके खिलाफ हिंसक कार्रवाई या जबरन निर्वासन शुरू हो सकता है।
बुरुंडी लगभग 1.5 करोड़ की आबादी वाला दुनिया के सबसे गरीब देशों में से एक है। केन्या और बुरुंडी दोनों ही पूर्वी अफ्रीकी समुदाय (EAC) के सदस्य हैं, जो सैद्धांतिक रूप से अपने नागरिकों को सदस्य देशों में स्वतंत्र रूप से आने-जाने और काम करने की गारंटी देता है। हालांकि, जमीनी आर्थिक हकीकत इस राजनयिक समझौते से कोसों दूर है। एरिक बिजीमाना जैसे प्रवासियों के लिए, जो 2022 में बेहतर जीवन की तलाश में केन्या आए थे, महंगे वर्क परमिट की फीस चुकाना असंभव है, जिससे वे कानूनी रूप से असुरक्षित हो जाते हैं।
यह क्यों महत्वपूर्ण है
बोझोकमीडिया (BozokMedia) के विश्लेषण से पता चलता है कि केन्या में बढ़ता प्रवास संकट उप-सहारा अफ्रीका में एक बड़े और चिंताजनक चलन को दर्शाता है। जब घरेलू स्तर पर आर्थिक मंदी, मुद्रास्फीति और बेरोजगारी बढ़ती है, तो राजनीतिक नेता अक्सर स्थानीय मतदाताओं को खुश करने के लिए विदेशी कामगारों को निशाना बनाने वाले लोकलुभावन बयानों का सहारा लेते हैं। यह स्थिति पूर्वी अफ्रीकी समुदाय (EAC) जैसे क्षेत्रीय एकीकरण संगठनों के मूल सिद्धांतों को कमजोर करती है और आर्थिक संकट के समय पड़ोसियों को एक-दूसरे के खिलाफ खड़ा कर देती है।
"आर्थिक मंदी के दौरान विदेशी कामगारों को निशाना बनाने वाली लोकलुभावन बयानबाजी एक खतरनाक उपकरण है, जो तेजी से स्थानीय हिंसा में बदल सकती है और क्षेत्रीय संधियों को कमजोर कर सकती है।" - डॉ. अमारा ओकेचुकु, अफ्रीकी प्रवासन नीति विश्लेषक।
दोनों देशों के बीच आर्थिक असमानता को समझने के लिए निम्नलिखित तुलनात्मक तालिका देखें:
| मानक | केन्या | बुरुंडी |
|---|---|---|
| प्रति व्यक्ति जीडीपी (नाममात्र) | ~$2,100 | ~$250 |
| EAC सदस्यता स्थिति | आर्थिक महाशक्ति | कम आय वाला सदस्य देश |
| प्रवासन का मुख्य कारण | खाड़ी देशों में श्रम निर्यात | अस्तित्व बचाने के लिए केन्या में प्रवास |
इस घटनाक्रम का राजनयिक असर भी दिखने लगा है। बुरुंडी के विदेश मंत्री एडौर्ड बिजीमाना ने केन्या में "विदेशियों, विशेष रूप से बुरुंडी नागरिकों के खिलाफ हिंसा" की सार्वजनिक रूप से निंदा की। इसके जवाब में, केन्याई विदेश मंत्रालय के उप सचिव कोरिर सिंग'ओई ने स्थिति को संभालने के लिए बुरुंडी दूतावास का दौरा किया। उन्होंने प्रवासियों को आश्वस्त किया कि राष्ट्रपति के बयान को "गलत समझा गया" और उनका इरादा केवल बिना पंजीकरण वाले अवैध व्यवसायों को लक्षित करना था, न कि वैध विदेशी निवेशकों को।
इन आधिकारिक आश्वासनों के बावजूद, प्रवासियों का भरोसा डगमगा चुका है। वैध शरणार्थी दर्जा रखने वाले और पंजीकृत व्यवसायों वाले कई बुरुंडी नागरिकों ने भी डर के मारे अपनी दुकानें बंद कर दी हैं। बढ़ईगीरी का काम करने वाले नकुनजीमाना देव, जो अपने कारखाने में चार केन्याई नागरिकों को भी रोजगार देते थे, अब केन्या छोड़ने की तैयारी में हैं। स्थानीय लोगों द्वारा विदेशियों पर कम मजदूरी में काम करने और मकान किराया बढ़ाने के आरोपों के कारण पैदा हुए तनाव ने प्रवासियों को देश छोड़ने पर मजबूर कर दिया है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
1. बुरुंडी के प्रवासी केन्या क्यों छोड़ रहे हैं?
केन्या के राष्ट्रपति विलियम रुटो द्वारा विदेशी छोटे व्यवसायों को बंद करने के आदेश के बाद, प्रवासियों में हिंसा और जबरन निर्वासन के डर से देश छोड़ने की होड़ मच गई है।
2. क्या पूर्वी अफ्रीकी समुदाय (EAC) के तहत प्रवासियों को काम करने का अधिकार है?
हाँ, EAC संधि सदस्य देशों के नागरिकों को बिना किसी बाधा के आने-जाने और व्यापार करने की अनुमति देती है, लेकिन व्यावहारिक रूप से महंगे वर्क परमिट इसके आड़े आते हैं।