ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा, भारत के साथ आर्थिक संबंधों और परमाणु वार्ता पर महत्वपूर्ण बयान दिए हैं। उन्होंने अमेरिका पर क्षेत्र में अस्थिरता फैलाने का आरोप भी लगाया।
- हॉर्मुज जलडमरूमध्य को अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के तहत खोला जा सकता है, यदि अमेरिका अपना नाकाबंदी अभियान समाप्त करता है।
- ईरान, ओमान के साथ मिलकर समुद्री सुरक्षा के लिए एक नया ढांचा तैयार करने पर बातचीत कर रहा है।
- राष्ट्रपति ने भारत को चाबहार बंदरगाह में निवेश बढ़ाने और आर्थिक भागीदारी को गहरा करने का निमंत्रण दिया।
- ईरान परमाणु वार्ता के लिए तैयार है, लेकिन अमेरिका के साथ विश्वास की कमी एक बड़ी बाधा है।
ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन ने ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान एक विशेष साक्षात्कार में वैश्विक भू-राजनीति और भारत-ईरान संबंधों पर महत्वपूर्ण स्पष्टीकरण दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि हॉर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) का मार्ग अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के आधार पर खुला रह सकता है, लेकिन इसके लिए अमेरिका को क्षेत्र में अपनी कथित नाकाबंदी और आक्रामक गतिविधियों को रोकना होगा।
पेज़ेश्कियन ने बताया कि ईरान वर्तमान में ओमान के साथ एक विशिष्ट समुद्री ढांचे पर बातचीत कर रहा है। इस बातचीत का उद्देश्य इस रणनीतिक जलमार्ग की सुरक्षा सुनिश्चित करना है, जो भारत जैसे देशों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है क्योंकि भारत की ऊर्जा आपूर्ति और भारतीय नाविकों की सुरक्षा इसी मार्ग पर निर्भर करती है। उन्होंने संकेत दिया कि अरब देशों के विदेश मंत्रियों और ओमान के बीच एक बैठक होने की संभावना है, जिसके बाद अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन (IMO) इसकी स्थिति की घोषणा करेगा।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, हॉर्मुज जलडमरूमध्य में किसी भी प्रकार का व्यवधान वैश्विक तेल कीमतों और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए एक गंभीर खतरा पैदा कर सकता है। यदि ईरान और ओमान एक सफल समुद्री ढांचा तैयार करते हैं, तो यह क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एक मील का पत्थर साबित होगा।
हॉर्मुज जलडमरूमध्य की सुरक्षा केवल एक क्षेत्रीय मुद्दा नहीं है, बल्कि यह वैश्विक ऊर्जा अर्थव्यवस्था की जीवन रेखा है।
भारत के साथ संबंधों पर चर्चा करते हुए, पेज़ेश्कियन ने चाबहार बंदरगाह पर विशेष जोर दिया। उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ अपनी मुलाकात का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत चाबहार में अपने निवेश को बढ़ा सकता है और ईरान के साथ व्यापारिक साझेदारी को नए स्तर पर ले जा सकता है। उन्होंने ईरान को एक 'भौगोलिक चौराहा' बताया जो पूर्व और पश्चिम को जोड़ने में सक्षम है।
परमाणु मुद्दे पर, पेज़ेश्कियन ने ईरान पर परमाणु हथियार विकसित करने के आरोपों को खारिज कर दिया। उन्होंने कहा कि ईरान परमाणु अप्रसार संधि (NPT) का सदस्य है और अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के भीतर अपनी गतिविधियों का संचालन कर रहा है। हालांकि, उन्होंने अमेरिका के साथ सीधे वार्ता पर सावधानी बरतते हुए कहा कि विश्वास की कमी और पिछले तनावों के कारण बातचीत की राह कठिन है।
अंत में, उन्होंने ईरान के सर्वोच्च नेता की स्थिति पर चल रही अफवाहों का भी खंडन किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि सर्वोच्च नेता जीवित हैं और अपने कर्तव्यों का पालन कर रहे हैं, और अमेरिका एवं इजरायल द्वारा उनकी सटीक स्थिति न जान पाना ही ऐसी अफवाहों का कारण है।
Frequently Asked Questions
1. क्या ईरान हॉर्मुज जलडमरूमध्य को बंद करने की योजना बना रहा है?
नहीं, पेज़ेश्कियन ने कहा कि मार्ग अंतरराष्ट्रीय सिद्धांतों के तहत खुला रहेगा, बशर्ते अमेरिका अपनी आक्रामक गतिविधियां बंद करे।
2. भारत के लिए चाबहार बंदरगाह क्यों महत्वपूर्ण है?
चाबहार भारत को मध्य एशिया और यूरोप तक पहुंचने के लिए एक रणनीतिक वैकल्पिक मार्ग प्रदान करता है।