प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व में भारत ने BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान ईरान और यूएई के बीच गहरे मतभेदों को पाटकर एक संयुक्त घोषणापत्र पर सहमति बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। यह ऐतिहासिक समझौता पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच वैश्विक शांति और आतंकवाद के खिलाफ एकजुटता का संदेश देता है।

  • भारत ने ईरान और यूएई के बीच पश्चिम एशिया संघर्ष को लेकर पैदा हुए गतिरोध को सफलतापूर्वक सुलझाया।
  • BRICS नेताओं ने आतंकवाद के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की नीति और नागरिक बुनियादी ढांचे पर हमलों की निंदा की।
  • घोषणापत्र में गाजा में फिलिस्तीनियों के जबरन विस्थापन के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया।
  • चीन और रूस ने सुरक्षा परिषद में भारत और ब्राजील की भूमिका बढ़ाने का समर्थन किया।

नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 2026 के BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक कूटनीति में भारत की बढ़ती शक्ति का प्रदर्शन किया है। घंटों तक चले गहन और तनावपूर्ण समझौतों के बाद, BRICS सदस्य देशों ने एक संयुक्त घोषणापत्र (New Delhi Declaration) पर सहमति व्यक्त की। यह सफलता तब प्राप्त हुई जब ईरान और यूएई के बीच पश्चिम एशिया के मौजूदा संघर्ष को लेकर गहरे मतभेद पैदा हो गए थे।

इस कूटनीतिक सफलता का मुख्य केंद्र ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियन और अबू धाबी के क्राउन प्रिंस शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान के बीच हुई एक दुर्लभ मुलाकात थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मध्यस्थता ने दोनों पक्षों को एक ऐसे साझा धरातल पर लाने में मदद की, जहाँ नागरिक बुनियादी ढांचे और शांतिपूर्ण परमाणु सुविधाओं पर हमलों के खिलाफ चिंता व्यक्त की जा सके।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत ने एक बार फिर 'ब्रिज-बिल्डर' (पुल बनाने वाले) की भूमिका निभाई है। जिस तरह 2023 के G20 शिखर सम्मेलन में भारत ने रूस-यूक्रेन युद्ध के बीच consensus बनाया था, ठीक उसी तरह BRICS में भी भारत ने वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को एकजुट किया है।

भारत की कूटनीति ने साबित कर दिया है कि वह केवल एक बड़ी अर्थव्यवस्था ही नहीं, बल्कि वैश्विक संघर्षों को सुलझाने वाला एक विश्वसनीय मध्यस्थ भी है।

घोषणापत्र में विशेष रूप से आतंकवाद के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया गया है। इसमें कहा गया है कि आतंकवाद के कृत्यों को 'आपराधिक और अनुचित' माना जाएगा, चाहे उनका उद्देश्य कुछ भी हो। महत्वपूर्ण रूप से, घोषणापत्र में पहलगाम आतंकवादी हमले का भी उल्लेख किया गया, जो क्षेत्रीय सुरक्षा के प्रति BRICS की गंभीरता को दर्शाता है।

गाजा मुद्दे पर, BRICS देशों ने अक्टूबर 2025 के युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा पर गहरी चिंता व्यक्त की। नेताओं ने फिलिस्तीनी लोगों के जबरन विस्थापन की किसी भी नीति का विरोध किया और उनके अधिकारों की रक्षा की मांग की।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन, दक्षिण अफ्रीका और नए सदस्य) का उद्देश्य वैश्विक शासन में सुधार करना है। भारत का इस समूह में नेतृत्व करना यह सुनिश्चित करता है कि विकासशील देशों की चिंताओं को वैश्विक मंच पर प्राथमिकता मिले।

Did You Know?: भारत ने 2023 में G20 की अध्यक्षता के दौरान भी इसी तरह की कूटनीतिक कुशलता का परिचय दिया था, जिससे रूस-यूक्रेन विवाद के बीच वैश्विक सहमति बनी थी।

Frequently Asked Questions

1. BRICS शिखर सम्मेलन में भारत की मुख्य भूमिका क्या थी?
भारत ने ईरान और यूएई के बीच मतभेदों को सुलझाने और एक संयुक्त घोषणापत्र तैयार करने में मुख्य मध्यस्थ की भूमिका निभाई।

2. घोषणापत्र में आतंकवाद पर क्या कहा गया है?
घोषणापत्र में आतंकवाद के सभी रूपों और सीमाओं के पार आतंकवादियों की आवाजाही के खिलाफ 'जीरो टॉलरेंस' की बात कही गई है।