18वें BRICS शिखर सम्मेलन में नई दिल्ली घोषणापत्र को अपनाया गया, जो वैश्विक व्यापार, प्रतिबंधों और मध्य पूर्व के तनावों पर महत्वपूर्ण संकेत देता है। यह विश्लेषण UPSC उम्मीदवारों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।

  • 18वें BRICS शिखर सम्मेलन में 'नई दिल्ली घोषणापत्र' को सर्वसम्मति से अपनाया गया।
  • घोषणापत्र में यूक्रेन संघर्ष का कोई उल्लेख नहीं है, लेकिन 'एकतरफा प्रतिबंधों' की कड़ी आलोचना की गई है।
  • ईरान और यूएई के बीच मध्य पूर्व के तनाव पर सहमति बनी है।
  • चीन और रूस ने भारत और ब्राजील की UNSC सुधारों की मांग का समर्थन किया है।

नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक राजनीति के नए समीकरणों को जन्म दिया है। 45 पृष्ठों का यह विस्तृत घोषणापत्र केवल एक दस्तावेज नहीं है, बल्कि यह वैश्विक दक्षिण (Global South) की बढ़ती शक्ति का प्रतीक है। इस शिखर सम्मेलन का मुख्य उद्देश्य व्यापार, स्वास्थ्य, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और पर्यटन जैसे क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाना था, जिससे यह एक टकराववादी समूह के बजाय एक सहकारी मंच के रूप में उभरा है।

भू-राजनीतिक संतुलन और आर्थिक युद्ध

इस घोषणापत्र की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि इसने 'ट्रंप युग' की व्यापार नीतियों और पश्चिमी आर्थिक प्रतिबंधों की ओर इशारा किया है। हालांकि इसमें सीधे तौर पर अमेरिकी नीतियों का नाम नहीं लिया गया, लेकिन 'एकतरफा आर्थिक प्रतिबंधों' और 'व्यापार-प्रतिबंधात्मक कार्रवाइयों' का बार-बार उल्लेख किया गया है। यह स्पष्ट रूप से रूस और ईरान जैसे सदस्यों के हितों की रक्षा करने का एक प्रयास है, जो पश्चिमी प्रतिबंधों के दबाव में हैं।

BRICS अब केवल एक आर्थिक समूह नहीं, बल्कि पश्चिमी प्रभुत्व को चुनौती देने वाला एक रणनीतिक मोर्चा बनता जा रहा है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, BRICS का विस्तार और इसकी नई घोषणाएं वैश्विक शासन (Global Governance) के ढांचे को बदल सकती हैं। विशेष रूप से, चीन द्वारा अफ्रीकी देशों को शून्य-शुल्क (zero-tariff) देने का उल्लेख और भारत द्वारा ईरान-यूएई के बीच मध्यस्थ की भूमिका निभाना, भारत की कूटनीतिक परिपक्वता को दर्शाता है।

मध्य पूर्व और UNSC सुधारों पर दृष्टिकोण

पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच, भारत की मध्यस्थता ने ईरान और यूएई के बीच एक ऐतिहासिक सहमति का मार्ग प्रशस्त किया है। घोषणापत्र में दोनों पक्षों की संप्रभुता और नागरिकों की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। इसके अतिरिक्त, संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) में सुधारों के मुद्दे पर चीन और रूस ने भारत और ब्राजील की स्थायी सदस्यता की आकांक्षाओं का समर्थन किया है, जो वैश्विक शक्ति संतुलन की दिशा में एक बड़ा कदम है।

Did You Know?: BRICS समूह का विस्तार होने के बाद अब यह दुनिया की एक बड़ी आबादी और अर्थव्यवस्था का प्रतिनिधित्व करता है, जो G7 के प्रभाव को संतुलित करने की क्षमता रखता है।

Frequently Asked Questions

1. क्या नई दिल्ली घोषणापत्र में यूक्रेन युद्ध का उल्लेख है?
नहीं, 2026 के इस घोषणापत्र में यूक्रेन संघर्ष या रूस के आक्रमण का कोई सीधा उल्लेख नहीं किया गया है।

2. UPSC परीक्षा के लिए BRICS क्यों महत्वपूर्ण है?
यह अंतर्राष्ट्रीय संबंध (GS-II) के पाठ्यक्रम का हिस्सा है, विशेष रूप से क्षेत्रीय और वैश्विक समूहों के संदर्भ में।

विशेषताBRICS का रुखपश्चिमी देशों (G7) का रुख
व्यापार नीतिएकतरफा प्रतिबंधों का विरोधव्यापार प्रतिबंधों का उपयोग
UNSC सुधारभारत/ब्राजील का समर्थनसुधारों में धीमी गति