नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कूटनीति का नया कीर्तिमान रचा। तीन दिनों के भीतर उन्होंने रूस के राष्ट्रपति पुतिन और चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग सहित 15 देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ताएं कीं।
- प्रधानमंत्री मोदी ने 3 दिनों के भीतर 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं।
- रूस के साथ 2030 तक 100 अरब डॉलर के व्यापार लक्ष्य पर चर्चा हुई।
- चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के साथ सीमा शांति और साझेदारी पर संवाद।
- ग्लोबल साउथ की प्राथमिकताओं और सप्लाई चेन लचीलेपन पर जोर।
नई दिल्ली के भारत मंडपम में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक कूटनीति के केंद्र में भारत को स्थापित कर दिया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इस तीन दिवसीय आयोजन के दौरान एक 'मैराथन डिप्लोमेसी' का प्रदर्शन किया, जिसमें उन्होंने न केवल 15 औपचारिक द्विपक्षीय बैठकें कीं, बल्कि कई अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं के प्रमुखों के साथ अनौपचारिक संवाद भी किया। इस सम्मेलन की थीम 'Building Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' रखी गई थी।
रूस के साथ रणनीतिक साझेदारी और व्यापारिक लक्ष्य
प्रधानमंत्री मोदी के कूटनीतिक दौर का आगाज़ रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के साथ हुई महत्वपूर्ण मुलाकात से हुआ। यह दोनों नेताओं की एक महीने के भीतर दूसरी मुलाकात थी। इस वार्ता में रक्षा, ऊर्जा और परमाणु ऊर्जा जैसे संवेदनशील क्षेत्रों पर विस्तृत चर्चा हुई। विशेष रूप से, दोनों देशों ने 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार को 100 अरब डॉलर तक पहुँचाने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य रखा है। रक्षा क्षेत्र में S-400 प्रणाली और ब्रह्मोस मिसाइल के उन्नयन जैसे महत्वपूर्ण तकनीकी सहयोग पर भी सहमति बनी।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि भारत की यह सक्रियता वैश्विक शक्ति संतुलन को बदलने की क्षमता रखती है। पुतिन के साथ गहराते संबंध और चीन के साथ संवाद की कोशिश, भारत को एक 'ब्रिज पावर' (Bridge Power) के रूप में पेश करती है जो पश्चिम और पूर्व के बीच संतुलन बना सके।
भारत की यह मैराथन कूटनीति दर्शाती है कि नई दिल्ली अब वैश्विक एजेंडा तय करने वाले देशों की अग्रिम पंक्ति में है।
चीन के साथ संबंधों में सुधार की सुगबुगाहट?
सात साल के लंबे अंतराल के बाद चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग का भारत आगमन इस शिखर सम्मेलन का सबसे बड़ा आकर्षण रहा। दोनों नेताओं ने भारत-चीन संबंधों में क्रमिक सुधार का स्वागत किया। हालांकि, पीएम मोदी ने स्पष्ट किया कि द्विपक्षीय संबंधों की प्रगति के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता अनिवार्य शर्त है। दोनों पक्षों ने प्रतिस्पर्धा के बजाय 'साझेदारी' के मॉडल पर चलने की बात कही।
ग्लोबल साउथ और क्षेत्रीय कनेक्टिविटी
ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान के साथ चाबहार बंदरगाह और ऊर्जा सुरक्षा पर चर्चा से लेकर कजाकिस्तान और दक्षिण अफ्रीका के नेताओं के साथ 'ग्लोबल साउथ' की आवाज उठाने तक, मोदी का एजेंडा व्यापक रहा। भारत ने स्पष्ट संदेश दिया कि विकासशील देशों की समस्याओं, जैसे कि मजबूत सप्लाई चेन और तकनीकी नवाचार, को वैश्विक मंच पर प्राथमिकता मिलनी चाहिए।
Frequently Asked Questions
1. BRICS शिखर सम्मेलन 2026 की थीम क्या थी?
इसकी थीम 'Building Resilience, Innovation, Cooperation and Sustainability' थी।
2. पीएम मोदी ने किन प्रमुख नेताओं से मुलाकात की?
उन्होंने पुतिन, जिनपिंग, मसूद पेजेश्कियान और एंटोनियो गुटेरेस सहित कई वैश्विक दिग्गजों से मुलाकात की।