नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान ईरानी विदेश मंत्री से कश्मीरी धार्मिक नेताओं ने मुलाकात की। इस दौरान मिर्वाइज उमर फारूक ने युद्ध के बजाय कूटनीति और शांतिपूर्ण संवाद का आह्वान किया।
- ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची और कश्मीरी धार्मिक नेताओं के बीच नई दिल्ली में बैठक हुई।
- मिर्वाइज उमर फारूक ने युद्ध की जगह कूटनीति और बातचीत को विवादों का समाधान बताया।
- नेताओं ने ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान में जारी संघर्षों पर गहरी चिंता व्यक्त की।
- बैठक में मुस्लिम उम्माह की एकता और अंतरराष्ट्रीय कानून के पालन पर जोर दिया गया।
नई दिल्ली में आयोजित 18वें BRICS शिखर सम्मेलन के इतर, एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक और धार्मिक संवाद देखने को मिला। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने शनिवार को कश्मीरी धार्मिक नेताओं के एक प्रतिनिधिमंडल के साथ अलग से बैठक की। इस प्रतिनिधिमंडल में मिर्वाइज उमर फारूक, पीडीपी विधायक मुंतजिर मेहदी, अंजुमन शारिए शियान के अध्यक्ष आगा सैयद हसन और अन्य प्रमुख नेता शामिल थे।
इस बैठक का मुख्य केंद्र वैश्विक संघर्षों के बीच शांति और संवाद की आवश्यकता थी। कश्मीरी नेताओं ने ईरान के प्रति अपनी एकजुटता व्यक्त की और युद्ध के कारण होने वाले जान-माल के नुकसान, बुनियादी ढांचे के विनाश और भय के माहौल पर गहरी चिंता जताई। मिर्वाइज उमर फारूक ने स्पष्ट रूप से कहा कि युद्ध केवल मानवीय पीड़ा को बढ़ाता है और अंततः सबसे कठिन विवादों को भी बातचीत और समझौते के माध्यम से ही सुलझाया जाना चाहिए।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि BRICS जैसे वैश्विक मंचों पर इस तरह की अनौपचारिक बैठकें क्षेत्रीय और धार्मिक संबंधों के बीच एक सेतु का काम करती हैं। कश्मीरी नेताओं का ईरान के साथ यह संवाद न केवल सांस्कृतिक संबंधों को दर्शाता है, बल्कि पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच शांति की एक वैश्विक अपील भी है।
युद्ध केवल मानवीय पीड़ा को कई गुना बढ़ा देता है; संवाद ही एकमात्र रास्ता है।
मिर्वाइज ने आगे चेतावनी दी कि वर्तमान संघर्षों को मुस्लिम जगत के भीतर सांप्रदायिक विभाजन को गहरा करने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। उन्होंने ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान की पीड़ा को मानवता के आधार पर जोड़ने की बात कही। उन्होंने महात्मा गांधी के अहिंसा के दर्शन का उल्लेख करते हुए कहा कि भारत इस तनावपूर्ण समय में संयम और कूटनीति को प्रोत्साहित करने में एक रचनात्मक भूमिका निभा सकता है।
अंजुमन-ए-शारिए शियान के अध्यक्ष आगा सैयद हसन ने भी ईरान के लोगों की लचीली भावना की सराहना की। उन्होंने एक ऐसे वैश्विक व्यवस्था की वकालत की जो संप्रभुता, आपसी सम्मान, अंतरराष्ट्रीय कानून और विवादों के शांतिपूर्ण समाधान पर आधारित हो। उन्होंने स्पष्ट किया कि कश्मीरी एक 'धौंस मुक्त' (bully-free) दुनिया के समर्थक हैं।
ईरानी विदेश मंत्री ने कश्मीरी नेताओं द्वारा व्यक्त की गई संवेदनाओं और एकजुटता की सराहना की और कश्मीर तथा ईरान के बीच गहरे ऐतिहासिक और जन-जन के संबंधों को स्वीकार किया। इससे पहले, इन नेताओं ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेशकियान के साथ भी बातचीत की थी।
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: यह बैठक कहाँ और कब हुई?
उत्तर: यह बैठक 12 सितंबर, 2026 को नई दिल्ली में BRICS शिखर सम्मेलन के दौरान हुई।
प्रश्न 2: कश्मीरी नेताओं ने किन देशों के संघर्षों का उल्लेख किया?
उत्तर: नेताओं ने ईरान, फिलिस्तीन और लेबनान में जारी मानवीय संकट और अस्थिरता का उल्लेख किया।