संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने स्वीकार किया कि सुरक्षा परिषद वर्तमान में पंगु हो गई है, लेकिन उन्होंने जोर देकर कहा कि संयुक्त राष्ट्र संस्था पूरी तरह विफल नहीं हुई है। उन्होंने वैश्विक संस्थानों में सुधार की तत्काल आवश्यकता पर बल दिया।
- सुरक्षा परिषद की कार्यक्षमता में भारी गिरावट आई है।
- संयुक्त राष्ट्र महासचिव ने वैश्विक संस्थानों में सुधार की वकालत की है।
- भारत के प्रधानमंत्री मोदी द्वारा प्रस्तावित UNSC सुधारों को UN का समर्थन मिला है।
संयुक्त राष्ट्र महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने एक महत्वपूर्ण बयान में कहा है कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) वर्तमान में पंगु हो गई है, जिससे वैश्विक संघर्षों को रोकने में इसकी क्षमता सीमित हो गई है। हालांकि, उन्होंने स्पष्ट किया कि इसका अर्थ यह नहीं है कि संयुक्त राष्ट्र एक विफल संस्था है। गुटेरेस का मानना है कि संस्था अभी भी मानवीय सहायता और वैश्विक सहयोग के लिए महत्वपूर्ण है।
हाल ही में हुए शिखर सम्मेलनों में, गुटेरेस ने एक बहुध्रुवीय दुनिया की वास्तविकता को स्वीकार करने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि वैश्विक संस्थाओं को आज की दुनिया का प्रतिबिंब होना चाहिए, न कि 1945 के बाद की दुनिया का। यह बयान ऐसे समय में आया है जब दुनिया भर में भू-राजनीतिक तनाव चरम पर है।
क्यों यह महत्वपूर्ण है
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि सुरक्षा परिषद में वीटो पावर का दुरुपयोग और सदस्य देशों के बीच बढ़ते मतभेद इसे निर्णय लेने में अक्षम बना रहे हैं। यदि सुधार नहीं किए गए, तो संयुक्त राष्ट्र की प्रासंगिकता और भी कम हो सकती है।
वैश्विक संस्थानों को वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं के अनुरूप ढलना ही एकमात्र विकल्प है।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा सुरक्षा परिषद में सुधार के लिए किए जा रहे निरंतर प्रयासों को संयुक्त राष्ट्र से महत्वपूर्ण समर्थन मिल रहा है। गुटेरेस ने संकेत दिया है कि सुधारों को अब और अधिक समय तक टाला नहीं जा सकता है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
संयुक्त राष्ट्र की स्थापना 1945 में द्वितीय विश्व युद्ध के बाद हुई थी। सुरक्षा परिषद की संरचना मूल रूप से उस समय की महाशक्तियों के आधार पर बनाई गई थी, जो वर्तमान में उभरती हुई शक्तियों जैसे भारत, जापान और जर्मनी की भूमिका को पूरी तरह से नहीं दर्शाती है।
अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न
प्रश्न 1: सुरक्षा परिषद को 'पंगु' क्यों कहा जा रहा है?
उत्तर: स्थायी सदस्यों के बीच मतभेदों और वीटो के उपयोग के कारण परिषद महत्वपूर्ण वैश्विक संकटों पर ठोस निर्णय नहीं ले पा रही है।
प्रश्न 2: भारत UNSC में सुधार क्यों चाहता है?
उत्तर: भारत एक उभरती हुई वैश्विक शक्ति है और वह दुनिया की वर्तमान वास्तविकताओं के अनुसार निर्णय लेने की प्रक्रिया में अधिक प्रतिनिधित्व चाहता है।