BRICS शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दिखा दिखावटी सुधार एशियाई प्रतिद्वंद्वियों के बीच गहरे अविश्वास और रणनीतिक मतभेदों को छिपा रहा है।
- BRICS में शी-मोदी संवाद के बावजूद भारत और चीन के बीच सीमा विवाद और रणनीतिक प्रतिस्पर्धा बनी हुई है।
- चीन ने BRICS के भीतर AI और स्मार्ट विनिर्माण में नेतृत्व करने के लिए एक 5-सूत्रीय कार्य योजना पेश की है।
- भारत चीन की तकनीकी प्रभुत्व की कोशिशों को लेकर सतर्क है।
हाल ही में संपन्न हुए BRICS शिखर सम्मेलन में चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग और भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बीच दिखाई देने वाली कथित 'नरमी' ने वैश्विक ध्यान आकर्षित किया है। हालांकि, ब्लूमबर्ग की रिपोर्टों और विभिन्न अंतरराष्ट्रीय विश्लेषणों से संकेत मिलता है कि यह कूटनीतिक गर्मजोशी केवल एक आवरण है, जो दोनों देशों के बीच मौजूद गहरे संरचनात्मक और भू-राजनीतिक मतभेदों को छिपाने का प्रयास कर रही है।
चीन ने इस मंच का उपयोग अपनी वैश्विक महत्वाकांक्षाओं को प्रदर्शित करने के लिए किया है। शी जिनपिंग ने BRICS देशों के बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), स्मार्ट विनिर्माण और तकनीकी सहयोग को बढ़ावा देने के लिए एक महत्वाकांक्षी 5-सूत्रीय कार्य योजना की घोषणा की है। चीन का लक्ष्य वैश्विक तकनीकी मानकों को निर्धारित करने में नेतृत्व करना है, जो सीधे तौर पर भारत की तकनीकी संप्रभुता और सुरक्षा चिंताओं से टकरा सकता है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि चीन का BRICS के माध्यम से तकनीकी प्रभुत्व स्थापित करने का प्रयास केवल आर्थिक नहीं, बल्कि रणनीतिक है। यदि चीन AI और डिजिटल बुनियादी ढांचे के लिए वैश्विक मानक निर्धारित करता है, तो भारत जैसे उभरते बाजारों को अपनी तकनीकी स्वायत्तता बनाए रखने के लिए कठिन संघर्ष करना पड़ सकता है।
एशियाई शक्ति संतुलन में चीन की तकनीकी आक्रामकता भारत के लिए एक बड़ी चुनौती बनी रहेगी, चाहे कूटनीतिक मंच पर बातचीत कितनी भी सहज क्यों न दिखे।
भारत की स्थिति इस मामले में जटिल है। एक ओर, भारत BRICS के माध्यम से 'ग्लोबल साउथ' की आवाज बनना चाहता है, वहीं दूसरी ओर, चीन का 'शक्ति ही सत्य है' (Might-makes-right) वाला दृष्टिकोण और सीमा पर निरंतर तनाव भारत के लिए रेड फ्लैग है। भारत ने स्पष्ट किया है कि द्विपक्षीय संबंधों का सामान्य होना सीमा विवाद के समाधान और विश्वास बहाली से ही संभव है।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और चीन के संबंध 1962 के युद्ध के बाद से उतार-चढ़ाव भरे रहे हैं। हाल के वर्षों में, विशेष रूप से लद्दाख में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद, दोनों देशों के बीच विश्वास का स्तर न्यूनतम स्तर पर पहुंच गया है। BRICS जैसे बहुपक्षीय मंचों पर सहयोग करना दोनों देशों के लिए मजबूरी और अवसर दोनों है।
Frequently Asked Questions
1. क्या BRICS में चीन का प्रभाव बढ़ रहा है? हाँ, चीन AI और विनिर्माण के माध्यम से समूह के भीतर अपनी तकनीकी नेतृत्वकारी भूमिका को मजबूत करने की कोशिश कर रहा है।
2. भारत और चीन के बीच मुख्य विवाद क्या है? मुख्य विवाद सीमा सुरक्षा, क्षेत्रीय प्रभुत्व और तकनीकी मानकों के निर्धारण को लेकर है।