भारत और वियतनाम ने रक्षा सहयोग को गहरा करने और भारतीय सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन के लिए हाथ मिलाया है। यह रणनीतिक कदम हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के बढ़ते प्रभाव के बीच दोनों देशों के संबंधों को एक नए स्तर पर ले जाएगा।
- भारत और वियतनाम के बीच रक्षा सहयोग और सैन्य उपकरणों के सह-उत्पादन पर ऐतिहासिक समझौता।
- हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और 'विज़न महासागर' पर जोर।
- भारत द्वारा वियतनाम को मिसाइल कॉर्वेट INS किरपान और हाई-स्पीड गार्ड बोट्स का उपहार।
- अगले वर्ष को 'भारत-वियतनाम मित्रता वर्ष' के रूप में मनाने का निर्णय।
नई दिल्ली में आयोजित 19वीं भारत-वियतनाम संयुक्त आयोग बैठक (JCM) के दौरान, विदेश मंत्री एस. जयशंकर और वियतनामी विदेश मंत्री ले होई ट्रुंग ने द्विपक्षीय संबंधों को नई ऊंचाइयों पर ले जाने के लिए एक व्यापक रूपरेखा तैयार की है। दोनों देशों ने न केवल रक्षा और सुरक्षा सहयोग को मजबूत करने पर सहमति व्यक्त की है, बल्कि भारतीय रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन (co-production) की दिशा में भी महत्वपूर्ण कदम उठाने का निर्णय लिया है।
यह विकास हिंद-प्रशांत क्षेत्र में चीन के आक्रामक व्यवहार को देखते हुए अत्यंत महत्वपूर्ण माना जा रहा है। विदेश मंत्री जयशंकर ने जोर देकर कहा कि वियतनाम भारत की 'एक्ट ईस्ट पॉलिसी' और 'विज़न महासागर' (MAHASAGAR) के दृष्टिकोण में एक प्रमुख भागीदार है। यह साझेदारी केवल सैन्य तक सीमित नहीं है, बल्कि इसमें व्यापार, निवेश, अंतरिक्ष क्षेत्र और परमाणु ऊर्जा जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों को भी शामिल किया गया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि भारत और वियतनाम के बीच यह रक्षा एकीकरण केवल सैन्य शक्ति का प्रदर्शन नहीं है, बल्कि यह दक्षिण-पूर्व एशिया में एक संतुलित शक्ति संरचना बनाने की कोशिश है। सैन्य उपकरणों का सह-उत्पादन वियतनाम की रक्षा आत्मनिर्भरता को बढ़ाएगा और भारत के रक्षा निर्यात क्षेत्र को वैश्विक मंच पर मजबूती प्रदान करेगा।
वियतनाम के साथ भारत का यह 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' उसे इस क्षेत्र में भारत का सबसे भरोसेमंद सुरक्षा भागीदार बनाता है।
ऐतिहासिक रूप से, भारत ने वियतनाम के साथ रक्षा संबंधों को निरंतर मजबूत किया है। जुलाई 2023 में, भारत ने स्वदेशी रूप से निर्मित मिसाइल कॉर्वेट INS किरपान वियतनाम को उपहार में दिया था। इसके अलावा, लार्सन एंड टुब्रो (L&T) द्वारा निर्मित 12 हाई-स्पीड गार्ड बोट्स भी वियतनाम को सौंपी जा चुकी हैं। भारत ने वियतनाम को वित्तीय सहायता प्रदान करने के लिए 120 मिलियन और 180 मिलियन अमेरिकी डॉलर की दो नई लाइन्स ऑफ क्रेडिट (LoC) भी हस्ताक्षरित की हैं।
ऐतिहासिक पृष्ठभूमि
भारत और वियतनाम के बीच राजनयिक संबंध दशकों पुराने हैं, लेकिन हाल के वर्षों में, विशेष रूप से वियतनामी राष्ट्रपति टो लैम की भारत यात्रा के बाद, संबंधों में अभूतपूर्व तेजी आई है। दोनों देश अब एक 'एन्हांस्ड कॉम्प्रिहेंसिव स्ट्रैटेजिक पार्टनरशिप' के तहत काम कर रहे हैं, जो उन्हें इस क्षेत्र के अन्य देशों की तुलना में एक विशिष्ट स्थान देता है।
Frequently Asked Questions
1. भारत और वियतनाम के बीच मुख्य रक्षा समझौता क्या है?
दोनों देश अब रक्षा उपकरणों के सह-उत्पादन और सैन्य क्षमता निर्माण पर ध्यान केंद्रित करेंगे।
2. 'विज़न महासागर' क्या है?
यह भारत का एक रणनीतिक दृष्टिकोण है जिसका उद्देश्य हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सुरक्षा और विकास के लिए सामूहिक सहयोग को बढ़ावा देना है।