नेपाल ने जलवायु मुआवजे के रूप में 20 मिलियन डॉलर की मांग की है, लेकिन संयुक्त राष्ट्र का 'लॉस एंड डैमेज' फंड अब तक एक भी रुपया जारी नहीं कर पाया है। यह संकट वैश्विक जलवायु वित्त की गंभीर खामियों को उजागर करता है।

  • नेपाल ने जलवायु मुआवजे के रूप में $20 मिलियन (लगभग 191 करोड़ रुपये) की मांग की है।
  • UN का 'लॉस एंड डैमेज' फंड (FRLD) तीन साल बाद भी शून्य राशि वितरित कर चुका है।
  • फंड की संरचना और जटिल प्रक्रियाएं आपातकालीन राहत में बड़ी बाधा बन रही हैं।
  • अमेरिका जैसे बड़े देशों के पीछे हटने से फंड की वित्तीय स्थिति और कमजोर हुई है।

नेपाल सरकार ने संयुक्त राष्ट्र के 'लॉस एंड डैमेज फंड' (FRLD) से 20 मिलियन डॉलर (लगभग 191 करोड़ रुपये) की मांग की है। यह राशि कोई दान या सहायता नहीं, बल्कि एक 'जलवायु मुआवजा' है। नेपाल का तर्क है कि हिमालयी राष्ट्र एक ऐसी प्राकृतिक आपदा का सामना कर रहा है जिसे उसने पैदा नहीं किया है, और वह अकेले इससे निपटने में सक्षम नहीं है।

यह मामला फंड के अस्तित्व के तीन वर्षों में सबसे महत्वपूर्ण है। COP27 (शर्म अल-शेख, मिस्र, 2022) के दौरान स्थापित इस फंड का उद्देश्य जलवायु परिवर्तन से सबसे अधिक प्रभावित देशों को वित्तीय सहायता प्रदान करना था। हालांकि, अगस्त 2026 तक, इस फंड ने अब तक किसी भी देश को एक भी डॉलर जारी नहीं किया है।

बजट में बड़ी कमी और राजनीतिक अस्थिरता

FRLD को चलाने के लिए विकसित देशों से योगदान की अपेक्षा की जाती है, क्योंकि ऐतिहासिक रूप से वे ही सबसे बड़े उत्सर्जक रहे हैं। लेकिन समस्या यह है कि यह योगदान पूरी तरह से स्वैच्छिक है। वर्तमान में, संयुक्त अरब अमीरात और जर्मनी जैसे देशों ने बड़े योगदान दिए हैं, लेकिन कुल मांग और उपलब्ध राशि के बीच एक विशाल अंतर है।

विशेष रूप से, डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में अमेरिका ने जलवायु परिवर्तन को 'धोखा' बताकर फंड से खुद को अलग कर लिया है, जिससे वैश्विक जलवायु वित्त की कमर टूट गई है। नवंबर 2025 तक, देशों ने कुल $2.8 बिलियन की मांग की थी, जबकि फंड के पास संसाधन सीमित हैं।

क्यों यह मामला महत्वपूर्ण है?

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह केवल नेपाल की समस्या नहीं है, बल्कि यह वैश्विक जलवायु न्याय प्रणाली की विफलता का संकेत है। जब तक फंड 'आपातकालीन प्रतिक्रिया तंत्र' के बजाय एक 'पारंपरिक विकास कोष' की तरह काम करता रहेगा, तब तक आपदा प्रभावित देशों को न्याय मिलना कठिन है।

जलवायु वित्त विशेषज्ञ जवाद खालिद के अनुसार, यह तंत्र दोषपूर्ण है क्योंकि यह आपातकालीन राहत के बजाय पारंपरिक विकास परियोजनाओं की तरह काम करता है, जिससे देरी होती है।

नेपाल की आपदा, जो ग्लेशियर टूटने के कारण आई बाढ़ से जुड़ी है, ठीक उसी स्थिति का उदाहरण है जिसके लिए यह फंड बनाया गया था। लेकिन 11-चरणीय जटिल प्रक्रिया और तकनीकी समीक्षाओं के कारण, सहायता पहुँचने में वर्षों लग सकते हैं।

Frequently Asked Questions

1. 'लॉस एंड डैमेज' फंड क्या है?
यह COP27 में स्थापित एक वैश्विक कोष है जिसका उद्देश्य जलवायु परिवर्तन के कारण होने वाले नुकसान की भरपाई के लिए कमजोर देशों की मदद करना है।

2. नेपाल ने कितनी राशि की मांग की है?
नेपाल ने मुआवजे के रूप में 20 मिलियन डॉलर की मांग की है।

Did You Know?: संयुक्त राष्ट्र के इस फंड के लिए विकासशील देशों को लगभग 30 वर्षों तक संघर्ष करना पड़ा था।