नई दिल्ली में आयोजित BRICS शिखर सम्मेलन ने भारत की रणनीतिक शक्ति का प्रदर्शन किया है, जबकि चीन के विरोधाभासी रुख ने वैश्विक चिंताएं बढ़ा दी हैं। ईएएम एस. जयशंकर ने सम्मेलन की सफलता पर गर्व जताया है।

  • नई दिल्ली में संपन्न हुआ BRICS शिखर सम्मेलन भारत की कूटनीतिक सफलता का प्रतीक बना।
  • चीन के 'दोहरे मापदंडों' और क्षेत्रीय नीतियों को लेकर वैश्विक स्तर पर आलोचना हुई।
  • विदेश मंत्री एस. जयशंकर ने शिखर सम्मेलन के सफल समापन की सराहना की।

नई दिल्ली में आयोजित हालिया BRICS शिखर सम्मेलन ने वैश्विक भू-राजनीति के समीकरणों को बदलने का काम किया है। जहाँ एक ओर इस आयोजन ने भारत को एक 'रणनीतिक संतुलनकर्ता' (Strategic Balancer) के रूप में स्थापित किया है, वहीं दूसरी ओर चीन की उपस्थिति और उसके व्यवहार ने महत्वपूर्ण सवाल खड़े कर दिए हैं। राजनयिक गलियारों में इस बात की चर्चा है कि कैसे भारत ने विभिन्न गुटों के बीच सेतु का काम किया है।

सम्मेलन के दौरान, वैश्विक नेताओं ने भारत की समावेशी कूटनीति की प्रशंसा की। विशेषज्ञों का मानना है कि भारत ने सफलतापूर्वक यह सुनिश्चित किया कि BRICS केवल एक ब्लॉक न रहकर एक बहुध्रुवीय विश्व की आवाज बने। हालांकि, चीन के 'दोहरे मापदंडों' पर उठ रहे सवालों ने सम्मेलन के माहौल को कुछ हद तक तनावपूर्ण बना दिया। चीन पर आरोप है कि वह एक तरफ सहयोग की बात करता है और दूसरी तरफ क्षेत्रीय विस्तारवाद की नीति अपनाता है।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण के अनुसार, भारत की इस सफलता का अर्थ है कि अब वैश्विक दक्षिण (Global South) की आवाज को दबाया नहीं जा सकता। भारत ने दिखाया है कि वह न केवल आर्थिक शक्ति है, बल्कि एक ऐसा मंच भी प्रदान कर सकता है जहाँ विकासशील राष्ट्र अपनी बात मजबूती से रख सकें। यह सम्मेलन चीन के प्रभुत्व को चुनौती देने और भारत के नेतृत्व को वैश्विक मान्यता दिलाने में महत्वपूर्ण साबित हुआ है।

भारत ने सफलतापूर्वक सिद्ध कर दिया है कि वह वैश्विक अस्थिरता के बीच एक स्थिर और विश्वसनीय नेतृत्व प्रदान करने में सक्षम है।

विदेश मंत्री डॉ. एस. जयशंकर ने सम्मेलन के सफल समापन पर प्रसन्नता व्यक्त करते हुए कहा कि यह भारत की बढ़ती वैश्विक प्रतिष्ठा का प्रमाण है। उन्होंने जोर देकर कहा कि BRICS के माध्यम से साझा लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए सहयोग आवश्यक है, लेकिन यह पारदर्शिता और समानता पर आधारित होना चाहिए।

ऐतिहासिक पृष्ठभूमि

BRICS (ब्राजील, रूस, भारत, चीन और दक्षिण अफ्रीका) का गठन वैश्विक अर्थव्यवस्था में उभरते देशों की भूमिका को मजबूत करने के लिए किया गया था। पिछले कुछ वर्षों में, इसमें नए सदस्यों के शामिल होने से इसकी ताकत और जटिलता दोनों बढ़ी हैं। भारत के लिए, यह समूह चीन के प्रभाव को संतुलित करने और अपने आर्थिक हितों को सुरक्षित करने का एक महत्वपूर्ण मंच है।

Did You Know?: BRICS अब केवल पांच देशों का समूह नहीं रहा, बल्कि इसमें नए सदस्यों के जुड़ने से यह दुनिया की लगभग 45% आबादी का प्रतिनिधित्व करता है।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: चीन के 'दोहरे मापदंडों' से क्या तात्पर्य है?
उत्तर: इसका तात्पर्य चीन की उन नीतियों से है जहाँ वह अंतरराष्ट्रीय नियमों का समर्थन तो करता है, लेकिन स्वयं के क्षेत्रीय हितों के लिए उनका उल्लंघन भी करता है।

प्रश्न 2: भारत ने BRICS में क्या भूमिका निभाई?
उत्तर: भारत ने एक मध्यस्थ और रणनीतिक संतुलनकर्ता की भूमिका निभाई, जिससे विभिन्न देशों के बीच संवाद संभव हो सका।