केरल उच्च न्यायालय ने सबरीमाला सन्निधानम को मिल्मा द्वारा आपूर्ति किए गए घी में कथित गबन के मामले में त्वरित और अचूक जांच के आदेश दिए हैं, जिसमें खरीद अनियमितताओं का पता चला है।

  • केरल HC ने घी आपूर्ति अनियमितताओं की 'फुलप्रूफ' जांच के लिए SIT को निर्देशित किया।
  • जांच 2025-26 के सीजन में 'अरवन' बनाने के लिए मिल्मा द्वारा आपूर्ति किए गए 1,61,535 लीटर घी पर केंद्रित है।
  • त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) और मिल्मा के विभिन्न कार्यालयों से रिकॉर्ड जब्त किए गए।
  • ई-टेंडर प्रक्रिया को नजरअंदाज करने और आपूर्ति में कमी के गंभीर आरोप।

केरल उच्च न्यायालय ने घी की खरीद और आपूर्ति में कथित गबन से जुड़े एक हाई-प्रोफाइल मामले में जवाबदेही तय करने के लिए हस्तक्षेप किया है। जस्टिस वी. राजा विजयराघवन और जस्टिस के.वी. जयकुमार की खंडपीठ ने विशेष जांच दल (SIT) को केरल को-ऑपरेटिव मिल्क मार्केटिंग फेडरेशन लिमिटेड (मिल्मा) और सबरीमाला सन्निधानम के बीच हुए लेन-देन की "फुलप्रूफ और त्वरित जांच" करने का निर्देश दिया है।

यह विवाद 2025-26 के वार्षिक तीर्थयात्रा सीजन के दौरान पवित्र प्रसाद 'अरवन' तैयार करने के लिए मिल्मा से घी की खरीद से संबंधित है। अदालत का यह कदम सबरीमाला विशेष आयुक्त आर. जयकृष्णन और त्रावणकोर देवस्वोम बोर्ड (TDB) के मुख्य सतर्कता और सुरक्षा अधिकारी द्वारा दायर रिपोर्टों के बाद आया है, जिसमें खरीद प्रक्रिया में गंभीर अनियमितताएं पाई गई थीं।

SIT की रिपोर्ट के अनुसार, महत्वपूर्ण सबूत पहले ही जुटा लिए गए हैं। सबरीमाला, निलाकाल, एरुमेली, पथनमथिट्टा, पंडलम और तिरुवनंतपुरम में TDB के कार्यालयों से रिकॉर्ड जब्त किए गए हैं। इसके अलावा, तिरुवनंतपुरम और पथनमथिट्टा में मिल्मा के कार्यालयों से भी दस्तावेज बरामद किए गए हैं और कई गवाहों से पूछताछ की गई है।

यह क्यों महत्वपूर्ण है

BozokMedia के विश्लेषण से पता चलता है कि यह मामला केवल वित्तीय गबन का नहीं है, बल्कि यह भारत के सबसे पवित्र तीर्थस्थलों में से एक की शुचिता से जुड़ा है। जब ई-टेंडर प्रक्रिया को दरकिनार किया जाता है—जैसा कि TDB अध्यक्ष पी.एस. प्रशांत और अन्य सदस्यों पर आरोप है—तो यह कॉर्पोरेट गवर्नेंस की विफलता और सरकारी सहकारी समितियों और धार्मिक प्रशासन के बीच संभावित मिलीभगत को दर्शाता है। मुख्य प्रश्न यह है कि क्या मिल्मा द्वारा आपूर्ति किया गया पूरा 1,61,535 लीटर घी वास्तव में मंदिर पहुँचा या इसका एक बड़ा हिस्सा ब्लैक मार्केट में गायब हो गया।

सार्वजनिक-धार्मिक संस्थानों में पारदर्शी ई-टेंडरिंग की अनदेखी अक्सर गहरे भ्रष्टाचार और भाई-भतीजावाद को छिपाने का प्रयास होती है।

इस जांच का नेतृत्व विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के पुलिस अधीक्षक एम.जे. सोजन कर रहे हैं। SIT अब इस बात की जांच कर रही है कि विशेष आयुक्त द्वारा मिल्मा को टेंडर देने पर उठाए गए आपत्तियों को बोर्ड द्वारा क्यों नजरअंदाज किया गया।

क्या आप जानते हैं?: सबरीमाला में चढ़ाया जाने वाला 'अरवन' गुड़ और घी से बना एक पारंपरिक मिष्ठान है, और तीर्थयात्रा के चरम सीजन के दौरान इसकी मात्रा भारत के किसी भी मंदिर प्रसाद की तुलना में सबसे अधिक होती है।

अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न

प्रश्न 1: मिल्मा घी मामले में मुख्य आरोप क्या है?
मुख्य आरोप 1,61,535 लीटर घी की आपूर्ति में गबन, ई-टेंडर प्रक्रिया का उल्लंघन और उत्पाद की वास्तविक डिलीवरी में संभावित कमी का है।

प्रश्न 2: इस जांच का नेतृत्व कौन कर रहा है?
इस जांच का नेतृत्व विजिलेंस एंड एंटी-करप्शन ब्यूरो (VACB) के पुलिस अधीक्षक एम.जे. सोजन के नेतृत्व में एक विशेष जांच दल (SIT) कर रहा है।