नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) ने कडम्बरायार नदी के प्रदूषण को रोकने के लिए केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा सौंपी गई रिपोर्ट को अधूरा और दिशा-निर्देशों के विरुद्ध पाया है। ट्रिब्यूनल ने बोर्ड को सख्त चेतावनी देते हुए नई और विस्तृत रिपोर्ट पेश करने का आदेश दिया है।
- एनजीटी ने केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) की रिपोर्ट को 'अधूरा' और 'अनुपालन न करने वाला' करार दिया।
- ट्रिब्यूनल ने 'प्रदूषक भुगतान सिद्धांत' (Polluter Pays Principle) के आधार पर पर्यावरणीय मुआवजे के आकलन की मांग की।
- कडम्बरायार नदी को सीपीसीबी द्वारा चिन्हित 32 सबसे प्रदूषित नदी क्षेत्रों में शामिल किया गया है।
कोच्चि: नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल (NGT) की दक्षिणी पीठ ने केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (KSPCB) के कामकाज पर गंभीर नाराजगी व्यक्त की है। ट्रिब्यूनल ने एर्नाकुलम स्थित कडम्बरायार नदी के प्रदूषण को कम करने के लिए उठाए गए कदमों पर बोर्ड द्वारा प्रस्तुत नवीनतम रिपोर्ट को पूरी तरह से खारिज कर दिया है। जस्टिस पुष्पा सत्यनारायण और विशेषज्ञ सदस्य प्रशांत गर्गवा की पीठ ने स्पष्ट किया कि रिपोर्ट में उन विवरणों का अभाव है जो ट्रिब्यूनल ने पहले मांगे थे।
यह मामला तब सुर्खियों में आया जब 'द हिंदू' में प्रकाशित एक रिपोर्ट के माध्यम से नदी में मल-मूत्र और कचरे के भारी संदूषण का खुलासा हुआ। एनजीटी ने इस रिपोर्ट का संज्ञान लेते हुए स्थानीय निकायों और प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड को तत्काल सुधारात्मक कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। विशेष रूप से, ट्रिब्यूनल ने बोर्ड को निर्देश दिया था कि वह उन दोषियों की पहचान करे जिन्होंने नदी को प्रदूषित किया है और उनसे पर्यावरणीय मुआवजा वसूल करे।
केरल राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने 19 जून, 2026 को दाखिल अपनी रिपोर्ट में दावा किया था कि उसने 25 मई से 3 जून के बीच एदथला ग्राम पंचायत, त्रिक्काकरा नगर पालिका, कुन्नथुनाडु ग्राम पंचायत, किझाक्कंबलम ग्राम पंचायत और कोच्चि नगर निगम का निरीक्षण किया है। रिपोर्ट के अनुसार, त्रिक्काकरा नगर पालिका ने कचरा फेंकने वालों पर 26,590 रुपये का जुर्माना लगाया, जबकि कोच्चि नगर निगम ने ब्रह्मपुरम कचरा संयंत्र में 100 KLD क्षमता का एक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (STP) स्थापित किया है।
Why This Matters
BozokMedia विश्लेषण दर्शाता है कि यह मामला केवल एक प्रशासनिक विफलता नहीं है, बल्कि पर्यावरणीय शासन की गहरी समस्या को उजागर करता है। जब राज्य की नियामक संस्थाएं (Regulatory Bodies) स्वयं अधूरी रिपोर्ट पेश करती हैं, तो 'प्रदूषक भुगतान सिद्धांत' जैसे महत्वपूर्ण कानूनी ढांचे केवल कागजों तक सीमित रह जाते हैं। कडम्बरायार नदी की स्थिति केरल के अन्य जल निकायों के लिए एक चेतावनी है।
"प्रदूषण नियंत्रण बोर्डों को केवल निरीक्षण की रिपोर्ट नहीं देनी चाहिए, बल्कि यह सुनिश्चित करना चाहिए कि पर्यावरणीय क्षति की भरपाई वास्तविक रूप से की जाए।"
ट्रिब्यूनल ने इस बात पर कड़ी आपत्ति जताई कि बोर्ड ने रिपोर्ट में यह लिख दिया कि पंचायत या नगर निगम दस्तावेज बाद में प्रस्तुत करेंगे। एनजीटी ने कहा कि यह बोर्ड की जिम्मेदारी है कि वह दस्तावेजों का सत्यापन करे और फिर रिपोर्ट पेश करे, न कि केवल स्थानीय निकायों के आश्वासनों को आगे बढ़ाए।
| निकाय/क्षेत्र | उठाए गए कदम/स्थिति | कमी |
|---|---|---|
| त्रिक्काकरा नगर पालिका | ₹26,590 का जुर्माना लगाया | अपर्याप्त निवारक उपाय |
| कोच्चि नगर निगम | 100 KLD STP स्थापित किया | पूर्ण अनुपालन का प्रमाण नहीं |
| किझाक्कंबलम पंचायत | निरीक्षण किया गया | CCTV निगरानी का अभाव |
Frequently Asked Questions
1. एनजीटी ने रिपोर्ट को क्यों खारिज किया?
क्योंकि रिपोर्ट में पर्यावरणीय मुआवजे के आकलन और दोषियों के विवरण की कमी थी, जिसे ट्रिब्यूनल ने 'अधूरा' माना।
2. 'प्रदूषक भुगतान सिद्धांत' (Polluter Pays Principle) क्या है?
यह एक कानूनी सिद्धांत है जिसके तहत प्रदूषण फैलाने वाली पार्टी को पर्यावरण को हुए नुकसान की भरपाई और सफाई का खर्च वहन करना पड़ता है।