दिल्ली हाई कोर्ट ने यह कहा कि महंगाई से स्थिर रखरखाव राशि का मूल्य घट जाता है, इसलिए 5% वार्षिक वृद्धि को वैध माना गया। यह निर्णय एक वैवाहिक विवाद में आया जहाँ पति ने आय का कम आंकड़ा पेश किया था।
मुख्य बिंदु
- महंगाई के कारण स्थिर रखरखाव की वास्तविक मूल्य घटती है
- हाई कोर्ट ने 5% वार्षिक वृद्धि को कानूनी मान्यता दी
- पति की आय को लेकर अदालत ने साक्ष्य‑आधारित निर्णय लिया
दिल्ली हाई कोर्ट ने यह स्पष्ट किया कि जीवनयापन की लागत और महंगाई समय के साथ बढ़ती है, जिससे एक निश्चित रखरखाव राशि का वास्तविक मूल्य धीरे‑धीरे घट जाता है। इसलिए, 5% वार्षिक वृद्धि केवल रखरखाव की प्रभावशीलता को बनाए रखती है और इसे अनैतिक या गैरकानूनी नहीं माना जा सकता।
यह फैसला 27 जुलाई को सुनाया गया, जब न्यायाधीश मधु जैन ने एक आपराधिक पुनरावलोकन याचिका पर विचार किया, जिसमें पति ने कहा था कि पारिवारिक न्यायालय ने उसकी आय को अधिक आंककर अत्यधिक रखरखाव निर्धारित किया। अदालत ने पति के 11,000 रुपये मासिक आय के दावे को "पूरी तरह अस्वीकृत" कर दिया।
Historical Background
विवाह 5 दिसंबर 2012 को हुआ था और उनका पुत्र 19 सितंबर 2013 को जन्मा। पत्नी ने 17 नवंबर 2014 को महिलाओं के खिलाफ अपराध सेल में घरेलू अत्याचार और दहेज की मांग की शिकायत दर्ज कराई। तब से वह अपने माता‑पिता के घर में रह रही है, जबकि पति ने अलगाव का दावा किया।
परिवार न्यायालय ने सभी दस्तावेज़, आय शपथपत्र और साक्ष्य की जांच के बाद पति को पत्नी को 15,000 रुपये और पुत्र को 10,000 रुपये मासिक रखरखाव देने का आदेश दिया, साथ ही 5% वार्षिक वृद्धि का प्रावधान किया। यह आदेश 13 फरवरी 2020 को जारी हुआ।
Why This Matters
BozokMedia analysis shows कि इस प्रकार की वार्षिक वृद्धि का मानक स्थापित होना भविष्य में समान मामलों में न्यायिक मार्गदर्शन प्रदान करेगा, जिससे आर्थिक दुरुपयोग के खिलाफ सशक्त सुरक्षा मिल सकेगी।
“रखरखाव में नियमित वृद्धि न केवल आर्थिक न्याय सुनिश्चित करती है, बल्कि महिलाओं को वित्तीय स्वतंत्रता की दिशा में भी सशक्त बनाती है।” – प्रो. अनीता सिंह, परिवार कानून विशेषज्ञ
Frequently Asked Questions
प्रश्न 1: क्या हर वर्ष रखरखाव में 5% वृद्धि अनिवार्य है?
उत्तर: नहीं, अदालतें प्रत्येक मामले की परिस्थितियों के आधार पर उचित प्रतिशत तय करती हैं।
प्रश्न 2: यदि पति आय में वृद्धि नहीं दिखाता तो क्या रखरखाव बढ़ेगा?
उत्तर: अदालत साक्ष्य‑आधारित निर्णय लेती है; यदि आय में वास्तविक वृद्धि नहीं है तो वृद्धि नहीं दी जा सकती।