कनाडा से पीएचडी पूरी करने के बाद नंदन ठाकुर और ईशा सहा ने विदेशी जीवन और उच्च वेतन को ठुकराकर बेंगलुरु लौटने का फैसला किया। सामाजिक अलगाव, परिवार की कमी और भारत के बढ़ते AI इकोसिस्टम ने उन्हें यह बड़ा कदम उठाने पर प्रेरित किया।

  • कनाडा में सामाजिक अलगाव और कठोर सर्दियों ने दंपत्ति को मानसिक रूप से प्रभावित किया।
  • वीजा प्रक्रियाओं और अप्रवासी स्थिति से जुड़ी अनिश्चितता ने 'अपनेपन' की कमी महसूस कराई।
  • भारत में Microsoft Research और Google DeepMind जैसे संस्थानों के कारण AI रिसर्च का बढ़ता स्तर एक मुख्य आकर्षण रहा।

हाल ही में यूनिवर्सिटी ऑफ वाटरलू से पीएचडी पूरी करने वाले नंदन ठाकुर और उनकी पत्नी ईशा सहा ने एक ऐसा निर्णय लिया जिसने सोशल मीडिया पर एक नई बहस छेड़ दी है। वर्षों तक कनाडा में रहने और वहां की प्रतिष्ठित शिक्षा प्राप्त करने के बाद, इस दंपत्ति ने कनाडा के आरामदायक जीवन को छोड़कर भारत के बेंगलुरु शहर में बसने का फैसला किया। वर्तमान में नंदन ठाकुर बेंगलुरु में Microsoft India में पोस्ट-डॉक्टरल रिसर्चर के रूप में कार्यरत हैं।

नंदन ने अपने अनुभव साझा करते हुए बताया कि यह निर्णय केवल करियर आधारित नहीं, बल्कि भावनात्मक और व्यक्तिगत था। उन्होंने उल्लेख किया कि एडमॉन्टन जैसे शहरों में सामाजिक जीवन बनाना बेहद कठिन था। वहां की लंबी और भीषण सर्दियां लोगों को घरों में कैद कर देती थीं, जिससे नए दोस्त बनाना और सामाजिक जुड़ाव महसूस करना लगभग असंभव हो गया था।

Why This Matters

BozokMedia विश्लेषण से पता चलता है कि यह ट्रेंड 'रिवर्स ब्रेन ड्रेन' (Reverse Brain Drain) की ओर इशारा करता है। अब भारतीय प्रतिभाएं केवल पश्चिमी देशों की डिग्री के लिए नहीं जा रही हैं, बल्कि वे भारत में उभरते हुए टेक-हब और स्टार्टअप कल्चर में योगदान देना चाहती हैं। यह दर्शाता है कि भारत अब केवल एक 'विकल्प' नहीं, बल्कि एक 'प्राथमिकता' बन रहा है।

"एक अप्रवासी के रूप में, हमने दुर्भाग्य से उस देश के प्रति कभी भी पूर्ण अपनेपन का अनुभव नहीं किया।"

दंपत्ति के लिए एक बड़ी चुनौती वहां की प्रशासनिक जटिलताएं भी थीं। वीजा प्रक्रियाओं, कागजी कार्रवाई और इमिग्रेशन स्टेटस को लेकर होने वाली चिंता ने उनके मानसिक तनाव को बढ़ाया। उन्होंने देखा कि उनके कई मित्र केवल अपने कानूनी स्टेटस को लेकर निरंतर तनाव में रहते थे, जिससे जीवन की गुणवत्ता प्रभावित होती थी।

इसके विपरीत, भारत में AI (आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस) के क्षेत्र में हो रही प्रगति ने उन्हें आकर्षित किया। IITs, IISc, BITS जैसे संस्थानों के साथ-साथ Google DeepMind, IBM और Sarvam जैसे स्टार्टअप्स ने भारत को रिसर्च के लिए एक वैश्विक केंद्र बना दिया है। नंदन अब भारत में छात्रों को मेंटर करने और स्थानीय विश्वविद्यालयों के साथ सहयोग करने के लिए उत्सुक हैं।

हालांकि, वापसी इतनी आसान नहीं थी। बेंगलुरु आने के बाद उन्हें एक अलग तरह के 'कल्चर शॉक' का सामना करना पड़ा। शहर का भारी ट्रैफिक और शोर-शराबा उनके लिए चुनौतीपूर्ण रहा, लेकिन परिवार का साथ और अपनी भाषा बोलने की खुशी ने इन मुश्किलों को छोटा कर दिया।

कारक कनाडा का अनुभव भारत (बेंगलुरु) का अनुभव
सामाजिक जीवन कठिन, अकेलापन और सर्दियां परिवार, मित्र और जीवंत संस्कृति
करियर अवसर उच्च वेतन, स्थिर शोध तेजी से बढ़ता AI इकोसिस्टम, प्रभाव डालने का मौका
मानसिक स्थिति वीजा और स्टेटस की अनिश्चितता अपनेपन का अहसास और मानसिक शांति
क्या आप जानते हैं?: भारत वर्तमान में दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते AI टैलेंट पूल में से एक है, जिससे दुनिया भर के भारतीय शोधकर्ता वापस लौट रहे हैं।

Frequently Asked Questions

प्रश्न 1: क्या केवल करियर की वजह से इस कपल ने भारत लौटने का फैसला किया?
नहीं, करियर के अलावा सामाजिक अलगाव, परिवार की कमी और इमिग्रेशन से जुड़ी मानसिक तनाव मुख्य कारण थे।

प्रश्न 2: बेंगलुरु लौटने के बाद उन्हें किन समस्याओं का सामना करना पड़ा?
उन्हें मुख्य रूप से शहर के भारी ट्रैफिक और अत्यधिक शोर (हॉर्निंग) के कारण 'रिवर्स कल्चर शॉक' महसूस हुआ।